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योंगशी हुओ चिंग
Yǒngxī huǒ qīng · 涌溪火青
योंगशी हुओ चिंग (涌溪火青, Yǒngxī huǒ qīng) — चीन के आन्हुई प्रांत के जिंगशियान काउंटी से एगो अनोखा मोती नियर हरियर चाय ह, जवन कि चीन के कुछे अइसन हरियर चाय सभ में से ह जिनकर पत्ता के घन गोल-गोल दाना में लपेटल जाला, जवन मोती नियर लागेला। नाँव 'हुओ चिंग' (火青, जेकर मतलब 'आग के हरियाली') एकर तकनीक के खास बात बतावेला: कोइला…
योंगशी हुओ चिंग (涌溪火青, Yǒngxī huǒ qīng) — चीन के आन्हुई प्रांत के जिंगशियान काउंटी से एगो अनोखा मोती नियर हरियर चाय ह, जवन कि चीन के कुछे अइसन हरियर चाय सभ में से ह जिनकर पत्ता के घन गोल-गोल दाना में लपेटल जाला, जवन मोती नियर लागेला। नाँव ‘हुओ चिंग’ (火青, जेकर मतलब ‘आग के हरियाली’) एकर तकनीक के खास बात बतावेला: कोइला के आँच पर बीस घंटा ले सुखावल, जेकरा से गहिर, कई परत वाला महक आ अद्भुत टिकाऊपन पैदा होला। 1979 में, देंग शियाओपिंग एह चाय के चख के कहलन कि ‘गुणवत्ता में ई हुआंगशान माओ फेंग (黄山毛峰, Huángshān Máo Fēng) आ सी हू लोंग जिंग (西湖龙井, Xīhú Lóngjǐng) से कम ना ह’।
1. वर्गीकरण आ उत्पत्ति:
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प्रकार: हरियर चाय (बिना फर्मेंट कइल)। ई ‘झूचा’ (珠茶, zhūchá) — मोती नियर हरियर चाय के श्रेणी में आवेला, जेकरा के घन गोल-गोल दाना में लपेटल जाला। आखिरी सुखावे के तरीका के हिसाब से ई ‘चाओचिंग’ (炒青, chǎoqīng) ह, माने केतली में भून के सुखावल।
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श्रेणी: चीन के कृषि मंत्रालय के भौगोलिक संकेत वाला उत्पाद (全国农产品地理标志, quánguó nóngchǎnpǐn dìlǐ biāozhì)। आन्हुई प्रांत के एगो ऐतिहासिक नामी चाय। 2011 में एकरा के भौगोलिक संकेत संरक्षण मिलल।
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उत्पत्ति: चीन, आन्हुई प्रांत (安徽, Ānhuī), जिंगशियान काउंटी (泾县, Jīngxiàn), लांगच्याओ टाउन (榔桥镇, Lángqiáo Zhèn)। भौगोलिक संकेत वाला इलाका में 12 प्रशासनिक गाँव शामिल बा: हुआंगत्यान (黄田), योंगशी (涌溪), झेशी (浙溪) अउरी अउरी गाँव।
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भौगोलिक निर्देशांक: 118°15′18″—118°38′18″ पूरबी देशांतर, 30°25′07″—30°37′52″ उत्तरी अक्षांश।
2. इतिहास आ सांस्कृतिक महत्व:
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इतिहास: योंगशी हुओ चिंग के इतिहास मिंग राजवंश (1368–1644) से सुरू होला। पहिला दस्तावेजी सबूत ‘जिंगशियान काउंटी के रिकार्ड’ (泾县志, Jīngxiàn Zhì) में 1645 (शुंझी के शासन के दूसरका साल, किंग राजवंश) में मिलेला, जेह में लिखल बा कि योंगशी नदी के इलाका में ‘बहुतायत में बढ़ियाँ चाय पैदा होला’ (涌溪一带”多产美茶”)। उत्पादन के उत्कर्ष श्यानफेंग काल (咸丰, 1851–1861) में भइल, जब सालाना उत्पादन सौ दान (लगभग 5 टन) से ढेर हो गइल, जेकर 20% हिस्सा सबसे बढ़िया किस्म के रहे।
एह तकनीक के रचना हुआंगत्यान गाँव (黄田村) के झू वंश (朱氏) के मानल जाला। परिवहन आ लंबा समय ले भंडारण खातिर चाय के सुविधाजनक बनावे के कोसिस में, झू परिवार के कारीगर लोग हुइझोउ के ‘चाओचिंग’ (炒青) तकनीक के अनुकूल बनवले, जवना से दाना बनावे आ कोइला पर लंबा समय ले सुखावे के एगो मूल तरीका विकसित भइल। परिणाम रहल — कॉम्पैक्ट, भारी ‘मोती’ जवना में महक आ स्वाद के बहुत टिकाऊपन रहे, जवन जल्दिये ‘महक गाढ़, स्वाद मीठ’ (香浓味甘) के नारा से परसिद्ध हो गइल।
गृहयुद्ध के दिनन में उत्पादन लगभग बंद हो गइल। 1955 में चाय के फेरु जिंदा कइल गइल आ पहिला खेप केंद्र सरकार के उपहार में भेजल गइल, जेकरा खातिर उत्पादक लोग के चीन के राज्य परिषद से खास धन्यवाद पत्र मिलल। 1979 में, देंग शियाओपिंग (邓小平, Dèng Xiǎopíng) खुद योंगशी हुओ चिंग चखीं आ कहलीं कि ‘ई हुआंगशान माओ फेंग (黄山毛峰, Huángshān Máo Fēng) आ सी हू लोंग जिंग (西湖龙井, Xīhú Lóngjǐng) जेतना बढ़िया बा’ (有黄山毛峰、西湖龙井之好)।
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नाँव:
- ‘योंगशी’ (涌溪) — जिंगशियान काउंटी में एगो पहाड़ी नदी (आ गाँव) के नाँव, जहाँ पुरान चाय बागान बा।
- ‘हुओ’ (火) — ‘आग’: ई चाबी तकनीकी प्रक्रिया — कोइला के आँच पर लंबा समय ले सुखावे के ओर इशारा करेला।
- ‘चिंग’ (青) — ‘हरियाली’, ‘हरियर’: ई हरियर चाय के श्रेणी बतावेला।
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सांस्कृतिक महत्व: योंगशी हुओ चिंग दक्खिनी आन्हुई (皖南, Wǎnnán) के चाय संस्कृति के एगो प्रतीक ह — ऊ इलाका जवन दुनिया के कई गो परसिद्ध चाय दिहलस। ई चाय हुइझोउ के कारीगरी परंपरा आ ‘धीरे-धीरे जरे वाला आग’ के दर्शन से अटूट रूप से जुड़ल बा — धैर्य से, घंटन चले वाला काम, जहाँ कि गति से ना, बल्कि सहनशीलता से निपुणता झलकेला।
3. वनस्पति वर्णन आ कच्चा माल:
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किस्म / कल्टीवार: मुख्य कल्टीवार — योंगशी लियुये झोंग (涌溪柳叶种, Yǒngxī Liǔyè Zhǒng) — ‘योंगशी के विलो पत्ता’, Camellia sinensis var. sinensis के एगो स्थानीय देसी किसिम। ई मझोला पत्ता वाला झाड़ीदार प्रकार में आवेला। पत्ता अंडाकार, गूदेदार, मुख्य नस के खास मोड़ आ किनारे पर छिटपुट दाँत वाला होला। एकर खासियत बा कि ई मुश्किल हालात में भी टिक सकेला, बढ़िया उपज देवेला आ घन दाना बनावे में उपयुक्त बा।
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तुड़ाई: बसंत के तुड़ाई के मानक ह — ‘एगो कली जेह में दू गो पत्ता खुले के सुरुआती दसा में होखें’ (一芽二叶初展, yī yá èr yè chū zhǎn)। ऊँच श्रेणी के खातिर कच्चा माल हाथ से, सूखा मौसम में तूरल जाला, बैंगनी कोंपल, खराब आ मोट पत्ता ना चुने के नियम ह।
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कच्चा माल के जरूरत: ताजा, कोमल, एक समान कोंपल जेह में कवनो खराबी, बाहरी मिलावट या मुरझाए के लच्छन न होखे। तुड़ाई के दिने प्रसंस्करण शुरू हो जाला।
4. टेरोइर आ उगाए के खासियत:
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जलवायु: उपोष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु। सालाना औसत तापमान — 15.6°C, सालाना बरखा — 1519–1800 मिमी, सापेक्ष आर्द्रता — 90%। बसंत में बादर छाए के अनुपात बहुत ऊँच होला — एह मौसम में धूप वाला दिन के हिस्सा खाली 26% होला। एकर मतलब बा कि बिखराइल रोशनी के परधानता रहेला आ एकरा से अमीनो एसिड के कैटेचिन में बदलाव के प्रकाश संश्लेषण कम हो जाला, जेकरा से स्वाद के मिठास आ कोमलता बनल रहेला। दिन-रात के तापमान के अंतर बहुते होला, जे सुगंधित पदार्थन के जमा करे में मदद करेला।
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उगाए के ऊँचाई: समुद्र तल से 400–900 मीटर। सबसे बढ़िया बागान — टेरोइर के कोर में: फेंगकेन (枫坑), पांकेन (盘坑) आ शिजिंगकेन (石井坑) घाटी, 600–900 मीटर के ऊँचाई पर।
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माटी: पहाड़ी ‘गहिर बलुआ’ माटी (乌沙土, wūshā tǔ) गहिर प्रोफाइल वाली, pH लगभग 5.5, जैविक पदार्थ आ मुख्य पोषक तत्व (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश) से भरपूर। एह माटी से हवा आ पानी के निकास बढ़िया से होला।
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पारिस्थितिकी तंत्र: पहाड़ी घाटी जहाँ बहुत सारा नदी-नाला आ झरना बा, हमेशा बादर रहेला। पानी के नजदीकी से अधिक नमी वाला लघु-जलवायु बनेला, जवन मोट, रसदार कोंपल बनावे खातिर आदर्श ह।
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टेरोइर के कोर: तीन गो घाटी — फेंगकेन तुआंजीयान (枫坑团结岩), पांकेन जिजुआवू (盘坑鸡爪坞) आ शिजिंगकेन यिंगवोयान (石井坑鹰窝岩) — सबसे बढ़िया गुणवत्ता वाली चाय पैदा करेली।
5. उत्पादन तकनीक:
योंगशी हुओ चिंग के तकनीक हरियर चाय सब में अलगे ह: ई कुछ अइसन हरियर चाय में से ह जेकरा के लगभग 20 घंटा ले सुखावल जाला। पूरा प्रक्रिया में आठ गो चरण शामिल बा:
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‘हरियाली खतम कइल’ / फिक्सेशन (杀青 — shāqīng): पत्ता के गरम केतली में भूनल जाला, जेकरा से एंजाइम ऑक्सीकरण रुक जाला आ ताजा सुगंध सुरक्षित रहेला।
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पहिला बेर मरोड़ल (揉捻 — róuniǎn): नरमी से मरोड़ के सुरुआती संरचना बनावल जाला आ कुछ कोशिका रस निकले लागेला।
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पहिला बेर भूनल — ‘चाओ तोउपेई’ (炒头坯 — chǎo tóupēi): केतली में भून के सुरुआती सुखावल आ दाना के आकार दिहल जाला।
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दोबारा मरोड़ल (复揉 — fùróu): चाय के पत्ता के संरचना के अउरी घन करे खातिर फेरु से मरोड़ल जाला।
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दूसरा बेर भूनल — ‘चाओ एरपेई’ (炒二坯 — chǎo èrpēi): आकार देवे के काम जारी रहेला: चाय के दाना धीरे-धीरे घन होखत जाला आ गोलाई लेत जाला।
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फैलाइल आ आराम दिहल (摊放 — tānfàng): बीच में ठंडा करे खातिर छोड़ दिहल जाला ताकि नमी दोबारा बराबर हो जाए।
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आखिरी लंबा सुखावल — ‘बाई लाओगुओ’ (掰老锅 — bāi lǎoguō): सबसे खास आ महत्वपूर्ण चरण। चाय के कोइला से गरम केतली में रख के कम तापमान पर लगभग 20 घंटा ले धीरे-धीरे सुखावल जाला। कारीगर लगातार चलावत ह आ दाना के सही गोल आकार आ गहिर, बहुपरती सुगंध तक ले पहुँचावत ह। ईहे ‘धीमा आँच’ चाय के नाँव दिहलस — ‘हुओ चिंग’ (火青, ‘आग के हरियाली’)।
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छानल आ छँटाई (分筛 — fēnshāi): तइयार चाय के छान के आकार अनुसार बाँटल जाला आ चूरा हटा दिहल जाला।
6. ऑर्गनोलेप्टिक गुण:
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सूखल पत्ता के रूप: घन, भारी गोल दाना (腰圆形, yāoyuán xíng — ‘कमर के मनका के आकार’), छोट-छोट मोती नियर। रंग — तेलिया चमक वाला गहिर गहरा हरियर (墨绿莹润, mòlǜ yíngrùn)। सतह पर चानी जइसन रोआँ के घन परत होला (银毫密披)। दाना एक समान, घन, हाथ में उठावे पर भारी लउकेला — सही आकार बनल होखे के पहिचान।
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सूखल पत्ता के महक: शुद्ध फूलदार महक (清花香, qīng huāxiāng) जेह में चेस्टनट आ ऑर्किड के नोट बा। ‘बुद्ध के हाथ वाला सिट्रॉन के महक’ (佛手韵, fóshǒu yùn) — एगो महीन सिट्रस-फूलदार बारीकी, जवन लंबा समय ले कोइला पर सुखावल चाय के पहिचान ह। ऊँच श्रेणी में ई महक टिकाऊ, गहिर आ बहुपरती होला।
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रस के महक: गाढ़, सुगंधित (清香馥郁, qīngxiāng fùyù)। पहिला पानी में ऑर्किड के नोट खुलेला, दूसरा-तीसरा में चेस्टनट के। महक टिकाऊ होला, 4–5 बेर पानी चढ़ावे ले टिकल रहेला।
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स्वाद: घन आ भरपूर (醇厚, chúnhòu), ताजा आ रसीला (鲜爽, xiānshuǎng), खास तवर के लवटत मिठास के साथ (甘爽回甘)। दूसरा आ तीसरा पानी के स्वाद सबसे बढ़िया मानल जाला — इहाँ महक, गाढ़ापन आ मिठास के संतुलन चरम पर होला। कसैलापन बहुत कम होला, करवाहट बिल्कुल ना। स्वाद के अंत — लंबा, गरम, मीठ-मीठ।
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रस के रंग: हरियर चाय खातिर असामान्य — खुबानी-पीयर, चमकदार आ पारदर्शी (杏黄明亮, xìnghuáng míngliàng)। ई गरम सोनहा रंगत लंबा कोइला सुखावे के नतीजा ह — ई योंगशी हुओ चिंग के अधिकतर हरियर चाय सभ से अलग बनावेला, जवन हरियरपन लिए रस देवेली।
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चा के तलहटी (पानी में फूलल पत्ता): कोमल, लचकदार कोंपल, जवन दाना से फूल नियर खुल जाला (嫩匀成朵)। रंग — हल्का पियरई लिए कोमल हरियर। पत्ता साबुत, बिना खराबी के।
7. रासायनिक संरचना:
लंबा कोइला सुखावल आ ऊँच पहाड़ी उत्पत्ति के कारन योंगशी हुओ चिंग के रासायनिक प्रोफाइल खास बा:
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पॉलीफेनोल (कैटेचिन): हरियर चाय खातिर मध्यम मात्रा। कैटेचिन एंटीऑक्सीडेंट क्षमता आ स्वाद में हल्का संरचनात्मक गहिराई देवेला। लंबा सुखावे से कैटेचिन के आंशिक रूप से रूपांतरण हो जाला, जेकरा से कसैलापन कम हो जाला।
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अमीनो एसिड (एल-थीनाइन सहित): ऊँच पहाड़ी उत्पत्ति आ भरपूर बिखराइल रोशनी (बसंत में 74% बादर) के कारन बढ़ल मात्रा। ई ताजगी, मिठास आ स्वाद के कोमलता देवेला।
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अल्कलॉइड: कैफीन — मध्यम मात्रा। थियोब्रोमाइन आ थियोफिलाइन भी होला, जिनका से हल्का स्फूर्तिदायक आ पेशाब बढ़ावे वाला असर होला।
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फ्लेवोनोइड (黄酮类, huángtóng lèi): अध्ययन के अनुसार, फ्लेवोनोइड के मात्रा काफी होला। ई कैटेचिन के एंटीऑक्सीडेंट काम के पूरक होला।
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खनिज: जस्ता (锌, xīn) के मात्रा बढ़ल पावल गइल बा, जवन पहाड़ी माटी के खनिज संगठन से जुड़ल बा।
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विटामिन: विटामिन सी, बी समूह के विटामिन, कैरोटिनॉइड।
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सुगंधित यौगिक: लंबा कोइला सुखावे से एगो अनोखा सुगंधित मिश्रण बनेला जेह में बुद्ध के हाथ वाला सिट्रॉन, चेस्टनट आ ऑर्किड के नोट होला — ई आम हरियर चाय से अधिका ‘गरम’ आ गहिर होला।
8. फायदेमंद गुण:
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आँख के रोशनी बढ़ावे (明目, míngmù): परंपरागत रूप से मानल जाला कि नियमित हरियर चाय पीये से आँख के सेहत ठीक रहेला — कैरोटिनॉइड आ विटामिन सी ऑक्सीडेटिव तनाव से बचावे में मदद करेला।
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ताकत बढ़ावे वाला असर: एल-थीनाइन के साथे कैफीन हल्की स्फूर्ति आ एकाग्रता देवेला।
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एंटीऑक्सीडेंट असर: कैटेचिन आ फ्लेवोनोइड फ्री रेडिकल के बेअसर करेला।
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पाचन सुधार: पॉलीफेनोल पाचक एंजाइम के निकास उत्तेजित करेला, चिकनाई वाला भोजन पचावे में मदद करेला (消食去腻)।
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प्यास बुझावल आ ठंडक: गरमी के मौसम में परंपरागत सलाह (止渴生津, 清热消暑)।
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हृदय-रक्तवाहिनी तंत्र के सहारा: फ्लेवोनोइड आ पॉलीफेनोल रक्तवाहिनी के लचक बनावे में मदद करेला।
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जरूरी: बतावल गइल गुण आम जानकारी पर आधारित बा आ चिकित्सकीय सलाह ना ह।
9. बनावे के तरीका:
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पानी के तापमान: 85°C (उबलत पानी के लगभग 2 मिनट ठंडा कइल गइल)।
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चाय के मात्रा: 250 मिली पानी खातिर 5 ग्राम (अनुपात 1:50)। घन दाना खुला पत्ता से भारी होला, एह से देखे में मात्रा कम लउकेला।
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बर्तन: काँच के गिलास — दाना के फूलत देखे खातिर, जवन पानी में ऑर्किड फूल नियर खुलेला (如兰花舒展)। सफेद चीनी माटी के गाइवान — महक के सटीक नियंत्रण खातिर।
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प्रक्रिया:
- बर्तन के गरम पानी से गरम करीं, पानी फेंक दीं।
- 5 ग्राम चाय डालीं।
- पहिला पानी — तेज धोवाई: पानी डालीं, कुछ सेकेंड रुकीं, फेंक दीं (润茶)।
- दूसरा पानी — गिलास के देवाल से पानी डालीं (सीधे चाय पर मत), 10 सेकेंड खातिर छोड़ दीं।
- अगिला पानी खातिर — हर बेर 5–10 सेकेंड समय बढ़ावत जाईं। चाय 4–5 गो पूरा-पूरा पानी तक टिक सकेला।
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ध्यान दीं: सबसे बढ़िया स्वाद दूसरा आ तीसरा पानी में होला: एह समय ले दाना पूरा तरीके से खुल जाला आ अधिकतम महक आ मिठास देला। रस के खुबानी-सोनहा रंग एह चाय खातिर सामान्य बा, पुरान होखे के निशानी ना।
10. भंडारण:
- हवाबंद बर्तन में, अँधेरा, सूखा आ ठंडा जगह पर राखीं, बाहरी महक से दूर।
- सबसे अच्छा तापमान — 0–5°C (फ्रिज), हवाबंद पैकिंग में।
- घन दाना के आकार आ कम बचल नमी (20 घंटा सुखावे के नतीजा) के कारन, योंगशी हुओ चिंग अधिकतर हरियर चाय से कुछ बढ़िया बनल रहेला — सही स्थिति में 12–18 महीना तक।
- खोलला के बाद — 2–3 महीना भीतर इस्तेमाल करे के सलाह दिहल जाला।
11. दाम आ नकली चाय:
योंगशी हुओ चिंग के उत्पादन सीमित बा (भौगोलिक संकेत के इलाका खाली 12 गाँव), एहसे ई अक्सर नकल होला। दाम ग्रेड (स्पेशल/特级, पहिला/一级, दूसरा/二级, तीसरा/三级), कोर जोन (फेंगकेन, पांकेन, शिजिंगकेन) के उत्पत्ति, आ हाथ या मशीन प्रसंस्करण पर निर्भर करेला।
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नकली चाय से बचे खातिर:
- भरोसेमंद बेचे वाला से खरीदीं जिनकरा लगे जिंगशियान काउंटी के उत्पत्ति के प्रमाण होखे।
- आकार आ वजन देखीं: असली दाना — घन, भारी, गोल, तेलिया चमक वाला होखे। ढीला, हलक ‘गोली’ नकल या निम्न गुणवत्ता के पहिचान ह।
- रस देखीं: खुबानी-पीयर रंग, साफ आ पारदर्शी। अगर रस सोनहरपन लिए बिना हरियर बा त ई दोसर किसिम के चाय हो सकेला।
- टिकाऊपन जाँचीं: असली योंगशी हुओ चिंग 4–5 पूरा पानी तक टिक जाला। नकली 1–2 पानी के बाद फीका हो जाला।
- दाम पर धियान दीं: संदिग्ध रूप से कम दाम नकल के पक्का संकेत ह।
12. रोचक तथ्य:
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1979 में, देंग शियाओपिंग योंगशी हुओ चिंग चख के एकरा के चीन के दू गो सबसे महान हरियर चाय — हुआंगशान माओ फेंग आ सी हू लोंग जिंग के बराबरी में रखलन। ई वाक्य दंतकथा बन गइल आ आजु ले खास विपणन दलील के रूप में इस्तेमाल होला।
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रस के खुबानी-सोनहर रंग हरियर चाय खातिर बहुत कम देखे के मिलेला। अधिकतर हरियर चाय हरियर या पीयर-हरियर रस देवेली, जबकि योंगशी हुओ चिंग — गरम सोनहर। ई 20 घंटा कोइला सुखावे के परिणाम ह, जवना में क्लोरोफिल आ कैटेचिन के आंशिक रूपांतरण हो जाला।
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‘बाई लाओगुओ’ (掰老锅 — ‘पुरान केतली में काम’) तकनीक — 20 घंटा लगातार आखिरी सुखावल — चीन के परसिद्ध हरियर चाय सब में कतहु आ ना मिले। चाय उत्पादन के सबसे मेहनती काम में से एगो ह।
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काँच के गिलास में बनावे पर दाना के फूलल कई मिनट ले चलेला — इ देखल कि कइसे कॉम्पैक्ट ‘मोती’ धीरे-धीरे पूरा कोपल में खुलत जाला, बिल्कुल ऑर्किड फूल नियर, चा पीये के एगो सौंदर्य आनंद ह।
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1955 में, उत्पादन फेरु शुरू करे के बाद, चाय के पहिला खेप सीधे चीन के केंद्र सरकार के भेजल गइल — आ राज्य परिषद खास धन्यवाद पत्र से जवाब दिहलस, जवन एगो क्षेत्रीय चाय खातिर बेजोड़ घटना रहल।
13. आन्हुई प्रांत के अउरी नामी हरियर चाय से तुलना:
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हुआंगशान माओ फेंग (黄山毛峰, Huángshān Máo Fēng): भून के सुखावल हरियर चाय (烘青) जवना के आकार ‘गौरइया के जीभ’ नियर होला। माओ फेंग — अधिका हलक आ फूलदार, ऑर्किड के नोट के परधानता। योंगशी हुओ चिंग — अधिका घन, गोल स्वाद आ ‘गरम’, एकरा में चेस्टनट के गहिराई आ अनोखा खुबानी रस होला।
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ताइपिंग होउ कुई (太平猴魁, Tàipíng Hóu Kuí): बड़हन चपटा पत्ता ऑर्किड महक वाला। होउ कुई — ‘भव्य’ आ गहिर; योंगशी हुओ चिंग — कॉम्पैक्ट, सांद्र आ टिकाऊ।
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लिउ’आन गुआ प्यान (六安瓜片, Liù’ān Guā Piàn): बिना कली के चपटा ‘कुम्हड़ा के बीया’। गुआ प्यान — अधिका गाढ़ आ घास नियर; योंगशी हुओ चिंग — अधिका गोलाई लिए आ मीठ, अनोखा मोती आकार वाला।
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जिंगशियान ते ज्यान (泾县特尖, Jīngxiàn Tè Jiān): एकही काउंटी के भाई। ते ज्यान — आकार में अधिका परंपरागत (मरोड़ल पत्ता), योंगशी हुओ चिंग — दाना के रूप आ लंबा सुखावे के तरीका से मूल रूप से अलग।
अंत में:
योंगशी हुओ चिंग — धैर्य वालन खातिर चाय ह। हर खेप में कारीगर के लगावल बीस घंटा के कोइला सुखावल, स्वाद के गहिराई आ बहुपरती रूप में गुँजेला, जवन एकबेरगी ना, बल्कि हर बेर पानी चढ़ावे पर खुलेला — ठीक ओइसहीं जइसे सवेरे के कुहासा धीरे-धीरे योंगशी के पहाड़ी घाटी से छँटेला। एकर घन मोती, खुबानी-सोनहर रस, ऑर्किड-चेस्टनट के महक बुद्ध के हाथ वाला सिट्रॉन के नोट के साथे आ लंबा गरम स्वाद के अंत — इ सब योंगशी हुओ चिंग के ओह लोगन खातिर एगो खोज बना देला जे मानत रहल कि हरियर चाय हमेशा ‘हलक आ ताजा’ होला। इहाँ — दोसर किसिम के हरियाली: घन, गाढ़ आ आग से तपावल।