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शीशान चा
Xīshān chá · 西山茶
शीशान चा (西山茶, Xīshān chá) गुआंगशी क एगो परसिद्ध हरियर चाय हऽ, जवन पबित्र बौद्ध परबत शीशान (西山, “पछिमी परबत”) पर जनमल ह, जहाँ मंदिर, चिकित्सक झरना रूच्वान (乳泉, “दूध क झरना”) आ हजारन बरिस पुरान चाय के झाड़ एक दोसरा से अभिन्न रूप से जुड़ल बाड़ें। एह चाय के रोपाई टांग राजबंस के भिक्षु लोग कइले रहे;
शीशान चा (西山茶, Xīshān chá) गुआंगशी क एगो परसिद्ध हरियर चाय हऽ, जवन पबित्र बौद्ध परबत शीशान (西山, “पछिमी परबत”) पर जनमल ह, जहाँ मंदिर, चिकित्सक झरना रूच्वान (乳泉, “दूध क झरना”) आ हजारन बरिस पुरान चाय के झाड़ एक दोसरा से अभिन्न रूप से जुड़ल बाड़ें। एह चाय के रोपाई टांग राजबंस के भिक्षु लोग कइले रहे; छिंग राजबंस में ई “साम्राज्य के 24 महान चाय” (全国二十四名茶) में सामिल रहे आ राजदरबार में गोंगचा (贡茶) के रूप में भेजल जात रहे। 1950 के दसक में, भिक्षुणी कुआन्नेंग आ चांगहुई तीन बेर माओ जेदोंग के चाय भेजलीस, आ ऊ लोग के जबाब मिलल: “नीमन चाय, लोंगजिंग से कम नइखे” (好茶,可与龙井媲美)। 2021 में शीशान चा चीन-यूरोपीय संघ के भौगोलिक संकेत सभ के आपसी मान्यता के सूची में दर्ज भइल – गुइगांग शहरी जिला के अकेल चाय जेकरा ई दरजा मिलल होखे। एकर अनोखा परिघटना “चार मौसम – चार सुगंध” (四季四香) बाटे: बसंत के चाय – चिंगशियांग, गरमी के – नाशपाती के, पतझड़ के – गहिर, जाड़ा के – कमल के।
1. वर्गीकरण आ उत्पत्ति:
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प्रकार: हरियर चाय (बिना किण्वित, 绿茶, lǜchá)। हरियाली के स्थिरीकरण – कच्चा लोहा के कड़ाही (铁锅, tiěguō) में 180 °C पर भुनाई, बिधि “काँपल + सिझावल” (抖闷结合, dǒu mèn jiéhé)। आकृति – लपेटल धागा (条索形, tiáosuǒ xíng)।
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श्रेणी: भौगोलिक संकेत उत्पाद (国家地理标志保护产品, 2010 से); चीन-यूरोपीय संघ भौगोलिक संकेत आपसी मान्यता रजिस्टर (中欧地理标志互认名录, 2021) में सामिल। गुइगांग शहर के अभौतिक सांस्कृतिक धरोहर (2019)। दू बेर “राष्ट्रीय नामित चाय” (全国名茶, 1986, 1990)। चीन के 21 ऐतिहासिक नामित चाय सभ में से एक आ छिंग साम्राज्य के “24 महान चाय” में से एक।
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उत्पत्ति: चीन; गुआंगशी-जुआंग स्वायत्त क्षेत्र (广西壮族自治区, Guǎngxī); गुइपिंग काउंटी-स्तरीय शहर (桂平市, Guìpíng Shì), जवन गुइगांग शहरी जिला (贵港市, Guìgǎng Shì) में आवेला। संरक्षण क्षेत्र – पूरा गुइपिंग (26 ब्लाक आ कस्बा, 4074 किमी²)। गुणवत्ता के केंद्र – शीशान परबत (西山, प्राचीन नाँव 思灵山, Sīlíng Shān), शतरंज पाथर के क्षेत्र (棋盘石, Qípán Shí), दूध के झरना (乳泉井, Rǔquán Jǐng) आ सीशी-आन आश्रम (洗石庵, Xǐshí Ān) – 700 मीटर ऊँचाई तक, प्राथमिक जंगल के क्षेत्र में।
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भौगोलिक निर्देशांक: ~23°10′–24°10′ उ.अ., 109°30′–110°30′ पू.दे. (गुइपिंग के क्षेत्र)।
2. इतिहास आ सांस्कृतिक महत्व:
- इतिहास:
शीशान चा गुआंगशी के सभसे पुरान दस्तावेजीकृत चाय सभ में से एक बाटे। काउंटी गजट “गुइपिंग श्यानझी” (《桂平县志》) के अनुसार, “शीशान के चाय शतरंज पाथर, दूध झरना आ ग्वानइन चट्टान के नीचे उपजेला – निचला झाड़ी, जड़ि पाथर के रस सोखेला, पत्ता भोर के सूरज के परावर्तित करेला, एहीसे एकर सवाद मीठ आ गाढ़ होला आ सुगंध सुवासित होला” (西山茶,出西山棋盘石、乳泉井、观音岩下,矮株散植,根吸石髓,叶映朝暾,故味甘腴,而气芬芳)। खेती के सुरुआत टांग राजबंस (7वीं-9वीं सदी) से जोड़ल जाला, जब उच्च पदस्थ भिक्षु ली मिंगयुआन (李明远) जियांगनान से चाय के बीया ले आइल रहस आ ओकरा के शतरंज पाथर के लगे रोपलस – एगो पौराणिक जगह जहाँ, कहानी अनुसार, अमर लोग शतरंज खेलत रहे आ आसमानी चाय पियत रहे; ओहिजे से गुजरत एगो लकड़हारा ओह लोग के साथ एक दिन गुजार दिहलस, आ ओकरा बाद दुनिया में सौ बरिस बीत गइल रहे।
मिंग राजबंस तक चाय पूरा दक्खिनी चीन – गुआंगडोंग, हूनान, फूज्यान में परसिद्ध हो गइल। छिंग राजबंस में शीशान चा “साम्राज्य के 24 महान चाय” के सूची में सामिल कइल गइल आ गोंगचा (贡茶) बन गइल। गुआंगशू काल के गजट “स्यूनझोऊ फूझी” (《浔州府志》) दर्ज कइलस: “शीशान चाय – रंग साफ आ हरियर, सुगंध सुवासित, लोंगजिंग से कम नइखे” (西山茶,色清而味芬芳,不减龙井)।
20वीं सदी में चाय पतन के सामना कइलस, बाकिर बौद्ध भिक्षुणिन के कोसिस से एकर पुनरुत्थान भइल। 1949 में, भिक्षुणी कुआन्नेंग (释宽能, Shì Kuānnéng), जेके परसिद्ध बौद्ध सुधारक जुजान (释巨赞) बोलवले रहले, शीशान आइली आ भिक्षुणी चांगहुई (释昌慧, Shì Chānghuì) के साथ मिल के शतरंज पाथर आ सीशी-आन आश्रम के चाय बगीचा सभ के फिर से स्थापित कइली। 1950 के दसक में ऊ लोग चुनिंदा चाय तीन बेर माओ जेदोंग के भेजली, आ अध्यक्ष जबाब दिहले: “नीमन चाय, लोंगजिंग से कम नइखे” (好茶,可与龙井媲美), साथ में उत्पादन बढ़ावे के बात कइलस।
अंतर्राष्ट्रीय मान्यता: 1986, 1990 – “राष्ट्रीय नामित चाय” (वाणिज्य मंत्रालय); 2010 – चीन के भौगोलिक संकेत; 2021 – चीन-यूरोपीय संघ भौगोलिक संकेत आपसी मान्यता रजिस्टर में सामिल (गुइगांग के एह सूची में पहिला आ अकेला चाय)। 2023 तक चाय बगीचा के रकबा – 20,500 मू (≈1367 हेक्टेयर), बार्षिक उत्पादन – 1069 टन।
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नाँव: 西山 (Xīshān) – “पच्छिमी परबत” – गुइपिंग में एगो परसिद्ध बौद्ध परबत, “दक्खिन के चार महान बौद्ध स्थान” (南方四大佛教名山) में से एक। पुरान नाँव – सीलिंगशान (思灵山, “मानसिक आत्मा के परबत”); 茶 (Chá) – “चाय”। अन्य नाँव: चिपान चा (棋盘茶, “शतरंज के चाय”) आ चिपान श्यानमिंग (棋盘仙茗, “शतरंज बोर्ड के अमर चाय”) – अमर लोग के किंबदंती से।
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सांस्कृतिक महत्व: शीशान चा चीन के उन चुनिंदा चाय सभ में से एक बाटे जवन बौद्ध संस्कृति से अटूट जुड़ल बाटे। “禅茶一味” (chán chá yī wèi, “चान आ चाय – एकही सवाद”) के परंपरा एहिजे टांग जुग से जीवित बाटे: भिक्षु आ भिक्षुणी ना खाली चाय उपजाईन अउरी बनाईन, बलुक ओकरा के ध्यान साधना के साधन के रूप में भी इस्तेमाल करीन। दूध झरना रूच्वान गुआंगशी के एगो परसिद्ध प्राकृतिक आकर्षण बाटे: एकर पानी, दूध नियर उज्जर, शीशान चा बनावे खातिर आदर्श मानल जाला। स्थानीय कहाउति बाटे: “परबत नीमन दृश्य, चाय नीमन सवाद” (山有好景,茶有佳味)। 1950 के दसक में चाय मोरक्को के राजा के उपहार में भेजल गइल – चीन के “चाय कूटनीति” के सुरुआती उदाहरण।
3. वानस्पतिक बिबरन आ कच्चा माल:
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किसिम / कल्टीवार: गुइपिंग शीशान समूह किसिम (桂平西山茶群体种, Guìpíng Xīshān Chá Qúntǐzhǒng) – स्थानीय झाड़ीदार छोट-पत्ता किसिम Camellia sinensis var. sinensis। पत्ता अंडाकार, गहिरा हरियर, भरपूर रोमिल। 100 अंकुर “कोंपल + 3 पत्ता” के वजन – ~46 ग्राम। जैवरासायनिक रूपरेखा: एमिनो एसिड ≥3.2%, पॉलिफेनॉल ≥27.5% (बसंत के कच्चा माल)। जल-निष्कर्षणीय पदार्थ ~50% – बहुत ऊँच सूचक।
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तुड़ाई: लगभग सालभर – फरवरी अंत से नवंबर तक, हर मौसम में 20–30 बैच। चार मौसम चार अलग-अलग सुगंध रूपरेखा देलें: बसंत – चिंगशियांग (清香, साफ हरियर), गरमी – लीशियांग (梨香, नाशपाती), पतझड़ – चुनशियांग (醇香, गहिर/मलाईदार), जाड़ा – हेशियांग (荷香/莲香, कमल)।
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तुड़ाई मानक: सभसे ऊँच किसिम – अकेल कोंपल या कोंपल आधा खुलल एक पत्ता के साथ। लंबाई – ≤4 सेमी। आकार, लंबाई आ रंग में एकरूपता जरूरी।
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कच्चा माल के जरूरत: कोमल, पूरा, ताजा अंकुर। हाथ से तुड़ाई – बस हाथ, कैंची ना। बाँस के टोकरी में सावधानी से ले जाइल, बिना नोकसान या दबाइल।
4. क्षेत्रीय पहचान (टेरोइर) आ उपजाई के खासियत:
गुइपिंग गुआंगशी के दक्खिन में, स्यूनजियांग नदी (浔江) के तीरे बसल बाटे, जवन महान शीजियांग (西江) के सहायक नदी हई। शीशान परबत मैदानी इलाका के बीच एगो अलग-थलग परबत श्रृंखला बाटे, जवन आपन अलगे सूक्ष्म जलवायु बनावेला।
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उपजाई ऊँचाई: 700 मीटर तक (मुख्य क्षेत्र – शतरंज पाथर, दूध झरना, ग्वानइन चट्टान)। मुख्य बागान – 200–700 मीटर।
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जलवायु: दक्खिनी उपोष्णकटिबंधीय। औसत बार्षिक तापमान 21.4°C; बरखा 1700–2400 मिमी/बरिस (चीन के सभसे नम चाय क्षेत्रन में से एक); कोहरा वाला दिन >200 साल में; पाला-मुक्त अवधि 354 दिन। खासियत – “夏不热而秋热,冬不寒而春寒” (“गरमी ना गरम, बाकिर पतझड़ गरम; जाड़ा ना ठंडा, बाकिर बसंत ठंडा”) – उल्टा तापमान शासन, जे सुगंधित पदार्थन के असामान्य जमाव के उत्तेजित करेला।
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माटी: पीयर-लाल रेतीली दोमट (黄红砂壤), ग्रेनाइट के अपक्षय से बनल। pH 4.5–6.5, कार्बनिक पदार्थ 2–3%। नीमन जल निकासी, ग्रेनाइट के आधार से खनिज समृद्ध। मुख्य क्षेत्र – जल संरक्षण क्षेत्र (水源保护区), जहाँ रासायनिक खाद आ कीटनाशक वर्जित बाड़ें।
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पारिस्थितिकी: मुख्य बगीचा शीशान के ढाल पर प्राथमिक जंगल के बीच, झरना रूच्वान के लगे बाड़ें। ऊँच नमी, बिखरल रोशनी (>70% प्रकाश प्रवाह) आ लगातार कोहरा एमिनो एसिड आ सुगंधित यौगिकन के संश्लेषण खातिर आदर्श स्थिति बनावेलें। सिंचाई के पानी – दूध झरना से, कैल्शियम आ मैग्नीशियम से खनिजित। शीशान परबत – दक्खिनी चीन के सभसे महत्वपूर्ण बौद्ध तीरथ सभ में से एक, एहीसे सख्त पारिस्थितिक नियंत्रण बाटे: ई क्षेत्र आर्थिक गतिविधि पर पाबंदी वाला राष्ट्रीय संरक्षित क्षेत्र बाटे। ई भू-संकेत मानकन के अलावे उपजाई के वातावरण के शुद्धता के प्राकृतिक गारंटी बाटे।
5. उत्पादन तकनीक:
शीशान चा पारंपरिक तकनीक से बनेला, जवन गुइगांग के अभौतिक सांस्कृतिक धरोहर रजिस्टर (2019) में सामिल बाटे। प्रमुख खासियत – “दू भुनाई आ दू लपेटाई” (二炒二揉, èr chǎo èr róu) के बिधि, एकमात्र बाँस आ लकड़ी के बरतन के इस्तेमाल आ आखिरी “रोम उजागर करे खातिर हल्का लपेटाई” (轻揉显毫)।
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तुड़ाई (采摘): हाथ से, मानक “कोंपल + एक-दू पत्ता”, ≤4 सेमी।
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मुरझाई (摊青 — tān qīng): बाँस के ट्रे पर 4–6 घंटा।
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पहिला भुनाई / हरियाली के स्थिरीकरण (杀青 — shāqīng): कच्चा लोहा के कड़ाही में 180°C पर, “काँपल + सिझावल” (抖闷结合) बिधि से – पत्ता के हवा में उछालल आ गरम सतह पर दबावल के बदल-बदल के। “उठाई, फेंकाई, झटकाई, उड़ाई” (扬、抛、抖、甩) के तकनीकन के संयोजन।
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पहिला लपेटाई (揉捻): हल्का हाथ से लपेटाई – धागा नियर संरचना बनावल।
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दूसरा भुनाई (初炒 — chū chǎo): आकृति के स्थिर करल।
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बाँस के जाली पर सुखाई (烘焙 — hōngbèi): 80°C पर पारंपरिक बाँस के अंगीठी-टोकरी (竹焙笼, zhú bèi lóng) में।
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आखिरी भुनाई / सुगंध उजागर (复炒 — fù chǎo): अंतिम “साधाई” भुनाई, जवन चेस्टनट आ फूल-फल के सुगंध बनावेला। नमी के मात्रा ≤5%।
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नोट: पूरा प्रक्रिया धातु के औजार (हरियाली स्थिरीकरण खातिर कच्चा लोहा के कड़ाही के अलावे) के बिना होला – बाँस आ लकड़ी के उपकरण ऑक्सीकरण करे वाला धातु से संपर्क रोकेलें। ई सिद्धांत शिन्यी हे लुओ ल्यू चा के “तीन ना” (三不原则) सिद्धांत से मेल खाला: दुनो परंपरा स्वतंत्र रूप से एकही निष्कर्ष पर पहुँचल – धातु से चाय के संपर्क पॉलिफेनॉल के गुणवत्ता बिगाड़ देला।
6. ऑर्गेनोलेप्टिक (इंद्रिय-ग्राह्य) लच्छन:
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सूखल पत्ता के बाहरी रूप: पतला, ठोस, हल्का मुड़ल धागा (紧细微曲), करिया-हरियर चाँदी नियर रोम के साथ (黛绿显毫)। “ड्रैगन-सर्पिल” (龙卷状, lóng juǎn zhuàng) – नोकदार सिरा वाला बिसेस आकृति। चाँदी के टिप्स ऊपरी भाग के ढँकले रहेली।
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सूखल पत्ता के सुगंध: मौसम पर निर्भर। बसंत – साफ हरियर (清香); गरमी – नाशपाती (梨香); पतझड़ – गहिर मलाईदार (醇香); जाड़ा – कमल (莲香/荷香)। स्थायी आ बहुस्तरीय।
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काढ़ा के सुगंध: फूल-फल (花果香) – एगो अनोखी “चार-मौसमी” बिसेसता, जवन जादेतर हरियर चाय सभ खातिर असामान्य बाटे। ठंडा होखे पर चेस्टनट के पृष्ठभूमि उभरेला।
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सवाद: साफ आ सामंजस्यपूर्ण (醇和, chún hé), स्पष्ट ताजगी (鲜爽) आ लंबा लउटत बाद-स्वाद (回甘持久) के साथ। भरपूर, बाकिर बिना कठोर कसैलापन के। टिकाऊपन – 3–6 डुबकी।
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काढ़ा के रंग: पन्ना-हरियर, साफ आ चमकीला (碧绿清澈)।
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चाय के तली (डुबावल पत्ता): कोमल-हरियर, सम, ताजा आ जीवंत (嫩绿匀整鲜活)।
7. रासायनिक संरचना:
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पॉलिफेनॉल (茶多酚): ≥27.5%; कुछ आँकड़न में मुख्य बैच खातिर 35.6% तक। एमिनो एसिड के साथे नीमन संतुलन, जवन बेसी कसैलापन के बिना कोमलता देवेला। EGCG के उच्च मात्रा।
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एमिनो एसिड (氨基酸): ≥3.2% (बसंत के चाय)। L-थियेनिन प्रमुख।
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जल-निष्कर्षणीय पदार्थ (水浸出物): ~50% – हरियर चाय सभ में सभसे ऊँच में से एक, जवन काढ़ा के असाधारण भरपूर आ “घनापन” के सूचक बाटे।
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कैफीन (咖啡碱): ≥3.9% – औसत से ढेर, स्पष्ट टॉनिक प्रभाव देवेला।
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विटामिन: विटामिन C, B समूह के विटामिन, विटामिन E। फ्लेवोनॉइड्स।
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खनिज: पोटैशियम, मैंगनीज, फ्लोरीन; ग्रेनाइट माटी आ रूच्वान के खनिज पानी से कैल्शियम आ मैग्नीशियम के अंश।
8. लाभकारी गुण:
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एंटीऑक्सीडेंट रक्षा: पॉलिफेनॉल (≥27.5%) + फ्लेवोनॉइड्स + विटामिन C – ऑक्सीडेटिव तनाव से बहुआयामी रक्षा।
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टॉनिक प्रभाव: कैफीन (≥3.9%) L-थियेनिन के साथे तालमेल में – हल्का, लंबा समय के स्फूर्ति।
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हृदय-संवहन तंत्र के सहारा: कैटेचिन कोलेस्ट्रॉल नियमन आ रक्तवाहिनी लचक में मदद करेलें।
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त्वचा सेहत: फ्लेवोनॉइड्स आ विटामिन C मिल के ऑक्सीकरण रोकेलें आ पराबैंगनी नोकसान घटावेलें – गुआंगशी के दक्खिनी अक्षांशन में तेज सूर्यपात खातिर खास प्रासंगिक।
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संज्ञानात्मक कार्य: L-थियेनिन मस्तिष्क के अल्फा-तरंग गतिविधि के उत्तेजित करेला।
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महत्वपूर्ण: बतावल गइल गुण आम आँकड़ा पर आधारित बाड़ें आ चिकित्सकीय सलाह ना बाड़ें। खाली पेट पियल उचित नइखे। ताजा चाय के “आग उतारे” खातिर 7 दिन रखल जरूरी। खोले के बाद – 10 दिन के भीतर पिया जाय।
9. चाय बनावाई:
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पानी के तापमान: 80–85°C। आदर्श – खनिज पानी, रचना में रूच्वान के करीब (मुलायम, हल्का क्षारीय)। उबलत पानी (>85°C सक्रिय पदार्थ नोकसान करेला आ करवाइ ले आवेला) इस्तेमाल ना करीं।
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चाय के मात्रा: 150 मिली खातिर 3 ग्राम (अनुपात 1:50)।
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बर्तन: काँच के गिलास – “खड़ा अंकुर” (芽叶竖立) देखे खातिर; सफेद पोर्सिलेन गाइवान।
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प्रक्रिया (काँच के गिलास):
- गिलास गरम करीं, पानी फेंक दीं।
- चाय डालीं, 80–85°C पर पानी डालीं।
- पहिला काढ़ा – 1–2 मिनट। “खड़ा अंकुर” के खुलत देखीं।
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प्रक्रिया (गाइवान): धोवाई 5 सेकंड → पहिला ढरका 20 सेकंड → हरेक अगिला +10 सेकंड। 3–6 डुबकी।
10. भंडारण:
- तापमान: 0–5°C (फ्रिज)।
- बर्तन: हवाबंद, बिना बाहरी गंध के।
- रोशनी: पूरा अलगाव।
- अवधि: “चार-मौसमी” सुगंध के अधिकतम तेजस्विता खातिर पहिला 6 महीना में पिया जाय के सलाह। ताजा चाय – “आग” उतारे खातिर 7 दिन “醒茶” (चाय जगावल) रखल जरूरी। जाड़ा के बैच (कमल के सुगंध) बसंत के तुलना में कम नमी के कारण ढेर दिन टिकेला।
11. कीमत आ नकल:
शीशान चा मध्यम-ऊँच कीमत खंड के चाय बाटे। सभसे ऊँच किसिम – 500 युआन/जिन से; पहिला – 200–400 युआन/जिन; दूसरा – 200 युआन/जिन से नीचे।
- नकल से कइसे बचीं:
- भौगोलिक संकेत चिन्ह “西山茶” जाँचीं।
- दृश्य पहचान – “चाँदी के नोक वाला करिया-हरियर धागा” (黛绿银尖)। रोम के अनुपस्थिति – मिलावट।
- सुगंध – फूल-फल, स्थायी। “घास” या “भुनल” गंध – शीशान चा नइखे।
- दूध झरना के पानी (या मुलायम खनिज पानी) में बनावे पर चाय एगो अनोखा मिठास उजागर करेला।
12. दिलचस्प तथ्य:
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“लोंगजिंग से कम नइखे”: ई वाक्य दू बेर कहल गइल – छिंग काल के काउंटी गजट (19वीं सदी) आ माओ जेदोंग (1950 के दसक)। दुनो के बीच दू सदी, आ मूल्यांकन एकहे बाटे: शीशान चा चीन के सबसे नीमन हरियर चाय के स्तर के बाटे।
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चार मौसम – चार सुगंध: अनोखा विशेषता: बसंत – चिंगशियांग (साफ हरियर), गरमी – नाशपाती, पतझड़ – गहिर मलाईदार, जाड़ा – कमल। ई शीशान के असामान्य उल्टा तापमान शासन के परिणाम बाटे।
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शतरंज पाथर के किंबदंती: कहानी अनुसार, एगो लकड़हारा के परबत पर दू अमर लोग शतरंज खेलत मिलल, ऊ ओह लोग के चाय चखलस आ ओकरा लगे एक दिन बिता दिहलस – लवटला पर पता चलल कि सौ बरिस बीत गइल। ओकरा भूलाइल कुल्हाड़ी के जगह चाय के पेड़ उग आइल। एहीसे चाय के दूसर नाँव – “शतरंज के चाय” (棋盘茶)।
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दूध झरना: रूच्वान (乳泉) – एगो सोझर जेकर उज्जर, “दूधिया” पानी, शीशान के ग्रेनाइट चट्टानन से निकलेला। शीशान चा बनावे खातिर आदर्श पानी मानल जाला; खनिज संघटन में – यूरोप के सभसे नीमन परबती सोझरन के करीब।
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चाय राजनयिक उपहार के रूप में: 1950 के दसक में शीशान चा मोरक्को के राजा के भेंट कइल गइल – चीन के “चाय कूटनीति” के सुरुआती एपिसोड। 2021 में चीन-यूरोपीय संघ रजिस्टर में सामिल होखले से यूरोपीय बाजार खुलल।
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भिक्षुणी-चाय उत्पादक: शीशान चा के पुनरुत्थान दू बौद्ध भिक्षुणिन के श्रेय बाटे: कुआन्नेंग आ चांगहुई। युद्धोत्तर बरिसन में ऊ लोग नोकसान भइल बगीचा फिर से बसवलीस आ “रोम उजागर करे खातिर हल्का लपेटाई” (轻揉显毫) के तकनीक बिकसित कइली, जवन आधुनिक शीशान चा के पहचान बन गइल।
13. गुआंगशी के अन्य हरियर चायन से तुलना:
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सानजियांग ल्यू चा (三江绿茶, Sānjiāng Lǜchá): गुआंगशी, ल्युझोऊ। स्थिति में ढेर “उत्तरी”। चेस्टनट-ऑर्किड रूपरेखा, टिकाऊपन 5–7 डुबकी। शीशान – ढेर “फूल-फल” वाला, अनोखा कमल के जाड़ा सुगंध के साथ। सानजियांग – बड़ पैमाना (215,000 मू); शीशान – छोट (20,500 मू), ढेर ऊँच दरजा के साथ।
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लिंगयुन बाई हाओ (凌云白毫, Língyún Báiháo): गुआंगशी, बाइसे। उच्च-परबती (800–1500 मी), लिंग्युन बाई हाओ कल्टीवार से। ढेर नाजुक, “चाँदी नियर” चाय बहुत रोम के साथ। शीशान – रूपरेखा में “गरम”, ढेर जटिल सुगंध आ बौद्ध सांस्कृतिक भार।
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शी हू लोंग जिंग (西湖龙井, Xīhú Lóngjǐng): झेजियांग। तुलना अटल: दू गजट – छिंग आ गणतंत्र काल के – दावा करेलें कि शीशान “लोंगजिंग से कम नइखे”, आ माओ जेदोंग 20वीं सदी में एकर पुष्टि कइलस। लोंग जिंग – चापट, चेस्टनट-अखरोट; शीशान – लपेटल, फूल-फल। लोंग जिंग – बहुत ढेर महँगा आ परसिद्ध; शीशान – कम परसिद्ध, बाकिर अनोखा “चार-मौसमी” सुगंध आ बौद्ध इतिहास के साथ, जवन लोंग जिंग में नइखे।
अंत में:
शीशान चा – अइसन चाय जवन प्रार्थना आ कोहरा में जनमल: टांग भिक्षु एकरा के शतरंज पाथर के लगे रोपले, जहाँ किंबदंती अनुसार अमर लोग शतरंज खेलत रहे, आ दूध झरना रूच्वान तबसे एकर जड़ि के उज्जर खनिज पानी से सींचत बाटे। तेरह सौ बरिस में ई छिंग राजबंस में गोंगचा रहल, माओ जेदोंग के तारीफ पावल आ यूरोपीय रजिस्टर में दाखिल भइल – बाकिर एकर सबसे बड़ चमत्कार पुरस्कार में ना, बलुक “चार मौसम के चार सुगंध” में बाटे: बसंत के साफ हरियरी, गरमी के नाशपाती के कोमलता, पतझड़ के मलाईदार गहिराई आ जाड़ा के कमल के ठंडक। मुलायम पानी से 80°C पर बनाईं – आ पच्छिमी परबत के चाय के आपन हजार बरिस के कहानी सुनावे दीं, जवन दू अमर लोग के बीच शतरंज के एगो बाजी से सुरू भइल रहे।