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शूचङ स्याओ लान हुआ
Shūchéng xiǎo lán huā · 舒城小兰花
शूचङ स्याओ लान हुआ (舒城小兰花, Shūchéng xiǎo lán huā) — एगो आन्हुई (安徽, Ānhuī) प्रान्त के हरियर चाय ह, जेकर रूप अभी खिलल आर्किड फूल नियर लउकेला, आ एकर सुगंध में सच्चा आर्किड के नोट होला। ई अनोखा रूप आ गंध के मेल के पाछे तीन सौ बरिस से बेसी के शिल्प परंपरा आ पूरबी डाबीशान (大别山, Dàbiéshān) के तराई के बेजोड़ टेरुआर बा।
शूचङ स्याओ लान हुआ (舒城小兰花, Shūchéng xiǎo lán huā) — एगो आन्हुई (安徽, Ānhuī) प्रान्त के हरियर चाय ह, जेकर रूप अभी खिलल आर्किड फूल नियर लउकेला, आ एकर सुगंध में सच्चा आर्किड के नोट होला। ई अनोखा रूप आ गंध के मेल के पाछे तीन सौ बरिस से बेसी के शिल्प परंपरा आ पूरबी डाबीशान (大别山, Dàbiéshān) के तराई के बेजोड़ टेरुआर बा।
1. वर्गीकरण आ उत्पत्ति:
- प्रकार: हरियर चाय (बिना खमीर उठावल); ई होंगचिंग (烘青, hōngqīng) श्रेणी में आवेला — जेमें अंतिम चरण में कोइला पर सूखाए (烘焙) के प्रमुख भूमिका होला; हालाँकि, स्थिरीकरण तवा पर भून के (锅炒杀青, guōchǎo shāqīng) करल जाला, एह से एकर तकनीक मिलाजुला “भूनल-सेंकल” (炒烘结合) ह।
- श्रेणी: आन्हुई (安徽, Ānhuī) के इतिहासी नामी चाय (安徽历史名茶); प्रान्त के दस गो पारंपरिक नामी चाय (安徽十大传统名茶) में से एक। आर्किड-सुगंध वाला हरियर चाय के एगो प्रतिनिधि (兰香型绿茶)।
- उत्पत्ति: चीन, आन्हुई प्रान्त (安徽, Ānhuī), शूचङ जिला (舒城, Shūchéng), लूआन (六安, Lù’ān) नगर परिमंडल। ई डाबीशान (大别山, Dàbiéshān) पर्वत श्रृंखला के पूरबी ढाल पर, यांग्त्सी नदी आ हुआइहे नदी के बीच बसल बा। भौगोलिक संकेत के संरक्षित क्षेत्र में जिला के परबती इलाका आवेला: स्याओतियान (晓天), ताङची (汤池), लूजङ (庐镇), हेबाङ (河棚), गाओफङ (高峰) नियर गाँव आ कस्बा, साथे उश्यान (五显), चुनच्यू (春秋), नानगाङ (南港), शूचा (舒茶)।
- भौगोलिक निर्देशांक: 31°01′–31°34′ उ.अ., 116°26′–117°15′ पू.दे. (मूल जिला रिकार्ड के अनुसार)। उत्पादन के मूल इलाका — 31°27′–31°48′ उ.अ., 116°49′–117°01′ पू.दे.।
2. इतिहास आ सांस्कृतिक महत्व:
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इतिहास: शूचङ (舒城, Shūchéng) एगो पुरान चाय क्षेत्र ह। “नवीन ताङ इतिहास” (《新唐书·地理志》) के अनुसार, ताङ आ सुङ काल में इहँवा के चाय मशहूर रहे आ शाही दरबार में भेजल जात रहे। हालाँकि, ओह समय के तकनीक आज से एकदम अलग रहे: आजु जवन “आर्किड चाय” (兰花茶, Lánhuā chá) के रूप आ ख़ास सुगंध ह, ऊ चिंग राजवंश (清朝) में बनल, संभवतः 17वीं-18वीं सदी के शुरुआत में। जानल-मानल चाय विद्वान चेन चुआन (陈椽, Chén Chuán) “आन्हुई चाय ग्रंथ” (《安徽茶经》) में लिखले बाड़न: “चिंग से पहिलहीं स्थानीय अभिजात वर्ग आर्किड चाय उत्पादन पर ख़ास ध्यान देत रहे।” उनकर मूलभूत रचना “चीन के नामी चाय पर चुनिंदा अध्ययन” (《中国名茶研究选集》) आ “चाय बनावे के विज्ञान” (《制茶学》) में शूचङ स्याओ लान हुआ के बीलुओचुन (碧螺春, Bìluóchūn), ताइपिङ होउ कुई (太平猴魁, Tàipíng Hóu Kuí), योङसी हुओचिंग (涌溪火青, Yǒngxī Huǒqīng), लूआन गुआप्यान (六安瓜片, Lù’ān Guāpiàn) आ थ्येगुआनयिन (铁观音, Tiěguānyīn) जइसन उत्कृष्ट चाय के बराबर रखल गइल बा। एह तरह से चाय के इतिहास कम से कम 300 बरिस पुरान ह।
नाम के उत्पत्ति के बारे में दू गो लोक कथा प्रचलित बा। पहिली कहानी स्याओतियान गाँव के बाइसाङयुआन (白桑园) गाँव के लान हुआ (兰花, “आर्किड”) नाउँ के एगो लइकी के बारे में बा: ऊ एगो कुशल कारीगर रही, जेकर चाय असाधारण सुगंध आ आर्किड जइसन रूप खातिर मशहूर रहे। शानदोङ के ब्यापारी लोग ऊँच दाम पर एकरा खरीदत रहे, आ लान हुआ अपने गाँव वालन के मदद करे खातिर रात-दिन काम करत रही, जब तक कि ऊ थकान से मर न गइली; गाँव के लोग उनकर याद में चाय के नाम रख देहलन। दूसर कथा मोचयुआन (磨子园) गाँव के हुआङजियावान (黄家湾) के कारीगर शेन शिङयू (沈兴余) से जुड़ल बा: उनकर चाय से तोङचेङ (桐城) के ब्यापारी चङ गुओयिङ (郑国英) एतना प्रभावित भइलन कि चिल्ला उठलन: “रूप में जौ के बाली नियर, आ सुगंध में आर्किड फूल नियर.”
1958 में माओ चतुङ (毛泽东) शूचङ जिला के शूचा जन कम्यून (舒茶人民公社) में आइल रहन, इहँवा के चाय पियलन आ ई प्रसिद्ध सलाह दिहलन: “आगे से पहाड़ी ढलान पर ढेर चाय बगान लगावल जाए।” (以后山坡上要多多开辟茶园) ई दौरा जिला आ पूरा देस में चाय उत्पादन के बिकास खातिर बड़हन प्रेरणा बनल। 1995 में शूचङ में वन च्याबाओ (温家宝) आइलन, जवन स्थानीय चाय उद्योग के उत्थान में सहायक भइल। 1980 के दशक में पारंपरिक तकनीक के आधार पर नया उत्पाद बाइ शुआङ ऊ हाओ (白霜雾毫) आ वान शी चाओ हुआ (皖西早花) बिकसित कइल गइलन, जवन 1987 में “आन्हुई के नामी चाय” के दरजा पवलन। 2016 में शूचङ स्याओ लान हुआ के भौगोलिक संकेत (国家地理标志保护产品) के रूप में संरक्षण मिलल। उत्पादन तकनीक आन्हुई प्रान्त के अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (2010) के सूची में दर्ज बा।
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नाम: शूचङ (舒城) — जिला के नाम। स्याओ (小) — “छोट”, जवन एह चाय के बड़ पत्ता वाला “दा लान हुआ” (大兰花, 4–5 पत्ता वाला कच्चा माल से) से अलग करेला। लान हुआ (兰花) — “आर्किड”: नाम एकर बाहरी रूप (अंकुर पत्ता से जुड़ल होखे से आर्किड फूल नियर लउकेला) आ सुगंध (सच्चा आर्किड नोट) दुनो के ओर इशारा करेला। आम गुणवत्ता सूत्र — “तीन आर्किड” (三兰, sān lán): आर्किड रूप (兰花形), आर्किड रंग (兰草色), आर्किड सुगंध (兰花香)।
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सांस्कृतिक महत्व: शूचङ स्याओ लान हुआ जिला के पहिचान, एकर “सोनहरा नाम” (金名片) ह। ई चाय राष्ट्रीय भौगोलिक संकेत (证明商标) के रूप में पंजीकृत बा, “चीन के नया आ बढ़िया कृषि उत्पाद” (全国名特优新农产品) के सूची में शामिल बा, “आन्हुई के प्रसिद्ध व्यापार चिह्न” (安徽省著名商标) के दरजा पा चुकल बा। 2022 तक जिला के चाय बगान के क्षेत्रफल 13.3 लान मू (लगभग 8867 हेक्टेयर) रहे, बार्षिक उत्पादन 4000 टन सूखा चाय, चाय उद्योग के कुल मूल्य 23.5 अरब युआन रहे। चाय उत्पादन में 20 गाँव-कस्बा, 55 हजार से बेसी किसान परिवार आ 200 हजार चाय मजदूर जुटल बाड़न।
3. वानस्पतिक बिबरण आ कच्चा माल:
- प्रजाति: Camellia sinensis var. sinensis।
- किसिम / कल्टीवार: आधार — स्थानीय आबादी वाला रोपण (当地群体种, dāngdì qúntǐzhǒng), जवन सदियन से डाबीशान (大别山, Dàbiéshān) के परिस्थिति में ढल गइल बा आ ऊँच ठंडा सहन करे के क्षमता रखेला। एकरे आधार पर तीन गो राष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त कल्टीवार बिकसित कइल गइल बा: शूचा चाओ (舒茶早, Shūchá Zǎo) — अगेती किसिम, शान्पो ल्यू (山坡绿, Shānpō Lǜ) आ गूयू चुन (谷雨春, Gǔyǔ Chūn)। क्लोनल प्रसार वाला बगान (无性系良种) के क्षेत्रफल 6.6 लान मू तक पहुँच गइल बा, किसिम के शुद्धता दर लगभग 50% बा।
- तुड़ाई: गूयू (谷雨, अप्रैल के मध्य) से शुरू। स्याओ लान हुआ खातिर कोमल, रसीला, घना रोआँ वाला, एक समान पीयर-हरियर रंग के, बैंगनी अंकुर (紫芽) रहित कच्चा माल चाहीं। ऊँच ग्रेड में कली पत्ता से लमहर होखे के चाहीं। तुड़ाई के समय पहाड़ में जंगली आर्किड के फूल खिलेला — मानल जाला कि चाय के अंकुर ओकर सुगंध सोख लेला।
- तुड़ाई मानक: ख़ास आ पहिला ग्रेड खातिर एगो कली जवन अभी खुले शुरू होखे वाला एक पत्ता के साथ होखे (一芽一叶初展); मानक स्याओ लान हुआ खातिर एगो कली दू-तीन पत्ता के साथ (一芽二叶至一芽三叶); दा लान हुआ (大兰花) खातिर एगो कली चार-पाँच पत्ता के साथ। तोड़ल गइल कच्चा माल ओही दिन संसाधित करल जाला (现采现制)।
- कच्चा माल के जरूरत: पूरा, बिना नोकसान के अंकुर, जेमें अधिक गर्मी, मुरझाव या यांत्रिक क्षति के निशान न होखे।
4. टेरुआर आ उगावे के ख़ासियत:
- उगावे के ऊँचाई: भौगोलिक संकेत मानक के अनुसार कम से कम 300 मीटर। मुख्य चाय परबत: बाइसाङयुआन (白桑园), च्याओच्युशी (珓子石), मोचयुआन (磨子园), लोङम्यानशान (龙眠山), स्याओमाइलिङ (小麦岭), गूचीचाइ (古迹寨), थ्यानच्युचाइ (天子寨)। जिला के सबसे ऊँच बिंदु — वान्फोशान (万佛山, 1539 मीटर)।
- जलवायु: उत्तरी उपोष्णकटिबंधीय नम क्षेत्र (北亚热带湿润气候)। बार्षिक औसत तापमान 15 °C; बार्षिक वर्षा 1200–1600 मिमी (परबत पर सबसे ढेर); बार्षिक औसत कोहरा वाला दिन — 280 से बेसी; सापेक्ष आर्द्रता ≥ 80%; दिन-रात के तापमान में बड़हन अंतर। बिखराइल रोशनी के स्थिति अमीनो अम्ल के संचय खातिर सहायक।
- माटी: पीयर-भूअर माटी (黄棕壤), pH 5.5–6.5, जैविक पदार्थ के मात्रा ≥ 1.5%, माटी के गहिराई ≥ 1.0 मीटर। माटी में सूक्ष्म तत्व सेलेनियम (硒) आ जस्ता (锌) के जमाव बढ़िया होला, जवन चाय के खनिज संरचना पर सकारात्मक असर डालेला।
- कृषि तकनीक: जिला एगो अनोखा “चाय — जंगल — हरी खाद” (茶—林—绿肥) मॉडल अपनावेला: चाय के झाड़ी गाछ आ जंगली घास-फूस (रोडोडेंड्रॉन, आर्किड, फर्न) के बीच उगेला, जेमें चोटी पर जंगल के “टोपी”, ढलान पर झाड़ी-घास के “पेटी” आ निचला हिस्सा में घास के “जूता” बनेला (头戴帽,腰系带,脚穿鞋)। बरसन से जंगल के साथ रहे से चाय के पेड़ में प्राकृतिक सुगंध तत्व भर जाला। इलाका के जंगल आच्छादन — 93%; औद्योगिक प्रदूषण ना के बराबर। खाद — मुख्य रूप से खली (饼肥) आ जैविक। जिला “राष्ट्रीय जैविक उत्पाद (चाय) अड्डा” के रूप में प्रमाणित बा।
5. उत्पादन तकनीक:
शूचङ स्याओ लान हुआ के पारंपरिक तकनीक में तवा पर स्थिरीकरण (锅炒杀青) आ कोइला के आँच (炭火烘焙) के संयोग होला — अंतिम कोइला-सेंकाई आर्किड सुगंध के “खोलेला”।
- फइलाव आ छँटाई (摊凉拣剔 — tānliáng jiǎntī): ताजा अंकुर के सतही नमी सुखावे आ खराब पत्ता हटावे खातिर फइला देहल जाला।
- स्थिरीकरण आ रूप देवे (锅炒杀青、做型 — guōchǎo shāqīng, zuòxíng): ई काम ख़ास भट्ठी पर जुड़ल दू गो तिरछा तवा (两口并连斜锅) में होला। कारीगर ठोस बाँस के डाँड़ी वाला बाँस के चाय झाड़ू (实心竹丝把) से एकही दिशा में गोल-गोल घुमावेला। सिद्धांत: “झाड़ू चाय से जुदा न होखे, चाय तवा से जुदा न होखे” (把不离茶,茶不离锅)। आगे के (गरम) तवा में मुख्य रूप से उछारल जाला, पाछू के (ठंढा) में लपेटल आ दबावल जाला, जेकरा से अंकुर के ख़ास “अँकुसी” आकार (弯钩状) बनेला। मकसद होला पत्ता के “पाँच हिस्सा सूखल” (五成干) स्थिति तक ले जाइल, जब “शा-शा” के आवाज आवे आ साफ सुगंध उठे।
- कोइला पर सुरुआती सुखाई (炭火笼初烘 — tànhuǒ lóng chūhōng): पारंपरिक रूप से बाँज (黄栗树) या तुङ (桐树) के लकड़ी के कोइला इस्तेमाल होला। अधपका माल बाँस के बुनल टोकरी (篾制烘斗) पर रख के 100–120 °C पर 70–80% सूखल तक सुखावल जाला। ई चरण आर्किड सुगंध के नींव रखेला।
- छँटाई (拣剔 — jiǎntī): पीयर पत्ता, डाँठ आ अमानक चीज हटावल जाला।
- अंतिम कोइला सुखाई (足烘 — zúhōng): तापमान घटा के 80–100 °C कर देहल जाला; पत्ता के तब तक सुखावल जाला जब तक नमी ≤ 6% न रहि जाए। ठीक एही समय आर्किड सुगंध सबसे बेसी खुलेला — “गरमी उठला पर एगो सुगंध निकलेला” (热气上冒一支香)।
यंत्रीकृत उत्पादन में स्थिरीकरण आ सुखाई के बीच अलग से मरोड़ (揉捻) आ/या मशीन से रूप सुधार (理条, lǐtiáo) के चरण जोड़ल जाला, लेकिन पारंपरिक हाथ के तरीका के ढेर कीमत दिहल जाला।
6. इंद्रिय-बोध के बिसेसता:
- सूखल पत्ता के बाहरी रूप: पत्ता से जुड़ल अंकुर खिलत आर्किड जइसन लउकेला; आकार — पातर लपेटल “अँकुसी” (条索细卷呈弯钩狀), प्राकृतिक रूप से फइलल। रंग — चमकीला पन्ना-हरियर (翠绿匀润) जेमें चमकीला चाँदी नियर रोआँ (毫锋显露) साफ देखाई देला।
- सूखल पत्ता के सुगंध: साफ ताजगी जेमें स्पष्ट आर्किड नोट आ चेस्टनट के हल्का झलक होला। “तीन सुगंध” के सूत्र (三香): पहिला सुगंध — पैकेट खोले पर (清香扑鼻, “निर्मल सुगंध नाक में समा जाला”), दूसर — पहिला घूँट पर (满口生香, “पूरा मुँह सुगंध से भर जाला”), तीसर — स्वाद खतम होखे के बाद (齿颊留香, “दाँत आ गाल के बीच सुगंध बनल रहेला”)।
- काढ़ा के सुगंध: ताजा, टिकाऊ, जोरदार आर्किड नोट वाला (兰花香型) — चाय के मुख्य इंद्रिय हस्ताक्षर। चेस्टनट (栗香) आ फूल के सुर मिलजुल के आवेला।
- स्वाद: ताजा, रसीला (鲜爽), मीठ-कोमल (甘醇), लंबा समय तक लउटत मिठास (回甘持久) वाला। सही तरीका से बनावे पर — कड़वाहट के नामोनिशान ना; “स्फूर्ति” (爽) आ अगिला घूँट के इंतजार के एहसास।
- काढ़ा के रंग: कोमल-हरियर, चमकीला आ साफ (汤色嫩绿明净)। ढेर पकल कच्चा माल से हरियर-पीयर रंग आवेला।
- चाय के तली (बनल पत्ता): अंकुर “गुच्छा” के रूप में जमा हो जाला (叶底成朵), रंग — कोमल पीयर-हरियर (嫩黄绿色), एक समान; बनावट मांसल, जवन कच्चा माल के बढ़िया गुणवत्ता देखावेला।
7. रासायनिक संरचना:
- पॉलीफेनॉल (茶多酚): मात्रा परबती होंगचिंग-चाय खातिर सामान्य — मध्यम, जवन स्वाद के कोमलता सुनिश्चित करेला। स्रोत के अनुसार, रोगजनक सूक्ष्मजीवन के खिलाफ स्याओ लान हुआ के पॉलीफेनॉल के जीवाणुरोधी प्रभावकारिता कई गो दोसर हरियर चाय से ढेर होला।
- अमीनो अम्ल (氨基酸): कोहरा वाला ऊँच पहाड़ी जलवायु में बिखराइल रोशनी के कारण L-थियानीन के भरपूर मात्रा। ई अमीनो अम्ल “श्यानशुआङ” (鲜爽) के ख़ास स्वाद खातिर जिम्मेदार हवें।
- एल्केलॉइड: कैफीन — मात्रा “ढेर” (咖啡碱含量高) बतावल गइल बा; थियानीन के साथ तालमेल से कोमलता बनल रहत भरपूर स्फूर्ति मिलेला।
- आवश्यक तेल आ सुगंधित यौगिक: आर्किड सुगंध जटिल रूप से बनेला: प्राकृतिक परिस्थिति (आर्किड के बीच उगे, तुड़ाई के समय सुगंध अणु सोख लेब) के बाद तकनीकी रूप से कोइला-सुखाई में ई सुगंध खुलेला। मुख्य तत्व: लिनालूल, नेरोल, गेरानिओल, सिस-जास्मोन।
- विटामिन: C, B₁, B₂, E, कैरोटीनॉइड।
- खनिज: सेलेनियम (硒) आ जस्ता (锌) — स्थानीय माटी में जमा सूक्ष्म तत्व, जवन शूचङ के आन्हुई के दोसर चाय क्षेत्रन से अलग करेला।
- एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि: कुछ स्रोत के अनुसार, स्याओ लान हुआ के पॉलीफेनॉल के मुक्त कण बेअसर करे के क्षमता विटामिन E से 18 गुना ढेर होला।
8. फायदेमंद गुण:
- जीवाणुरोधी आ सूजनरोधी असर: रोगजनकन के खिलाफ पॉलीफेनॉल के बढ़ल प्रभावकारिता — चीनी स्रोतन में उजागर एगो ख़ासियत।
- स्फूर्तिदायक प्रभाव: कैफीन के ऊँच मात्रा थियानीन के साथ मिल के बिना घबराहट के दिमाग के साफ आ स्फूर्ति देला।
- एंटीऑक्सीडेंट रक्षा: कैटेचिन आ विटामिन C कोशिका सेहत के बढ़ावा देला आ ऑक्सीकरण के धीमा करेला।
- पाचन में सहायक: पॉलीफेनॉल आंत के गति आ माइक्रोफ्लोरा सामान्य करेला।
- हृदय-रक्तवाहिनी तंत्र: नियमित सेवन रक्तवाहिनी के लचक आ सामान्य कोलेस्ट्रॉल स्तर बनाए रखे में मदद करेला।
- दिमागी काम: L-थियानीन दिमाग के अल्फा ताल के सहारा देला।
- प्रतिरोधक क्षमता: विटामिन आ सूक्ष्म तत्व (सेलेनियम, जस्ता) के मेल रक्षा कार्य मजबूत करेला।
- खाली पेट पिये के सलाह ना दिहल जाला (टैनिन श्लेष्मा में जलन पैदा कर सकेला); नया चाय के “आग उतारे” (褪火气) खातिर 15 दिन रखले के बाद पियल बेहतर; कैफीन के प्रति संवेदनशीलता होखे पर खाली दिन के पहिला हिस्सा में पियल जाए।
9. बनावे के तरीका:
- पानी के तापमान: 80–85 °C। उबलत पानी हानिकारक — इ क्लोरोफिल नष्ट कर देला, काढ़ा पीयर पड़ जाला, आ सुगंध आपन नफासत खो देला।
- चाय के मात्रा: 150 मिली खातिर 3–5 ग्राम (गिलास विधि); 100–120 मिली खातिर 5–7 ग्राम (गोङफू शैली में गाइवान)।
- बर्तन: काँच के गिलास (玻璃杯) — एह में देख सकील जाला कि अंकुर “खड़ा” हो के खिलत आर्किड नियर लउकेला; चीनी माटी के गाइवान (盖碗) — नियंत्रित रूप से पानी छान के बनावे खातिर।
- प्रक्रिया:
- बर्तन गरम पानी से गरम करीं, पानी फेंक दीं।
- चाय डालीं।
- पहिला पानी: 80–85 °C पानी डालीं, 30 सेकेंड रखीं।
- दूसरा से छठवाँ पानी तक: 10 सेकेंड बढ़ावत जाईं (गोङफू), 6–10 पानी।
- यूरोपीय तरीका में: 2–3 मिनट; अगर कड़वाहट लउके त तापमान या मात्रा घटाईं।
- पानी: नरम (कम खनिज) पानी मिठास आ आर्किड सुर उभारेला। कड़ा पानी सुगंध दबा देला।
10. भंडारण:
- हवाबंद, रोशनीरहित डिब्बा; रोशनी, नमी, बाहरी गंध आ तापमान के उतार-चढ़ाव से बचावल जाए।
- सबसे बढ़िया — 0–5 °C पर फ्रिज में कस के वैक्यूम या पन्नी वाला पैकिंग में।
- नया चाय के कोइला-सुखाई के बाद “आराम” खातिर लगभग 15 दिन अँधेरा ठंढा जगह पर रखल जाए।
- उत्पादन के पहिला 6–12 महीना में सबसे बढ़िया सुगंध आ स्वाद देला।
11. कीमत आ नकली:
- कीमत के दायरा ग्रेड आ मौसम पर निर्भर करेला: ख़ास ग्रेड (特级, खुले शुरू होखे वाला पत्ता के साथ अकेल कली, ≥ 90% एकरूपता) 500 ग्राम खातिर 800 युआन से शुरू; आम मात्रा वाला बहुत सस्ता। मूल उत्पादन क्षेत्र (बाइसाङयुआन, मोचयुआन) के कच्चा माल के ख़ास ऊँच कीमत मिलेला।
- नकली से कइसे बचल जाए:
- उत्पत्ति जाँचीं: असली स्याओ लान हुआ शूचङ जिला के परबती इलाका (ऊँचाई ≥ 300 मीटर) में बनल होखे के चाहीं — 25 मार्च से पहिले के खेप दोसर जगह से, संभवतः असली शूचङ स्याओ लान हुआ ना ह।
- बाहरी रूप: पत्ता से जुड़ल अंकुर “अँकुसी” नियर, आर्किड नियर लउके; मोट टूटल कच्चा माल नकली के पहिचान ह।
- सुगंध: असली स्याओ लान हुआ में साफ आर्किड नोट होला, खाली “हरियर ताजगी” ना।
- काढ़ा: साफ, कोमल हरियर; धुँधला या गहिरा रंग संदेह पैदा करेला।
- निशान: भौगोलिक संकेत (地理标志) के लोगो आ उत्पादक के जानकारी के मौजूदगी।
12. रोचक तथ्य:
- “अठारह दिव्य झाड़ी” (十八棵神茶) के कथा: लान हुआ के मरले के बाद गाँव वालन उनकर दफन स्याओमाइतान (小麦淌) ढलान पर सबसे बढ़िया चाय के पेड़ के नीचे कइले, आ जल्दिए ओहिजा 18 गो झाड़ी उग आइल, जवना के दिन में तोड़ल जा सकत रहे — आ सबेरे तक उनमें नया अंकुर फूट आवत रहे। ई पेड़ सबसे कीमती कच्चा माल के स्रोत बन गइलन।
- बनावे के समय स्याओ लान हुआ के अंकुर गिलास में खड़ा हो जाले, छोट-छोट आर्किड के गुच्छा नियर — एह नजारा खातिर चाय के सिर्फ पेय ना, बलुक सौंदर्यबोध के रूप में भी सराहल जाला। मशहूर लोकोक्ति — “गरमी उठला पर एगो सुगंध” (热气上冒一支香): गरम गाइवान के ढक्कन खोले पर चेहरा पर आर्किड के सुगंध के एगो गाढ़ धारा टकरावेला।
- 1958 में माओ चतुङ के शूचा कम्यून के दौरा खाली शूचङ खातिर ना, बलुक पूरा चीन के चाय उद्योग खातिर एगो निर्णायक मोड़ बनल: उनकर “पहाड़ी ढलान पर ढेर चाय बगान लगावल जाए” के आह्वान के राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में ले लिहल गइल आ देस भर में चाय बगान के बड़हन बिस्तार भइल।
- शूचङ जिला प्रसिद्ध “31वीं समानांतर” (北纬31°) पर बसल बा — ऊ अक्षांश जेकरा चीन में “चाय उत्पादन के सोनहरा पट्टी” कहल जाला आ जहाँ शी हू लोङचिङ (西湖龙井), लूआन गुआप्यान (六安瓜片) आ अउरी महान चाय भी मौजूद बाड़ी स।
13. दोसर हरियर चाय से तुलना:
- लूआन गुआप्यान (六安瓜片, Lù’ān Guāpiàn): आन्हुई के पड़ोसी — ई दुनिया के अकेल हरियर चाय ह जेमें कली-डाँठ ना होला, खाली पत्ता के परत होला। रूप आ स्वाद बिलकुल अलग: गुआप्यान ढेर सघन, गहिर, “लाओ हुओ” (拉老火) तकनीक के कारण तेज “आग” के चरित्र वाला। स्याओ लान हुआ ढेर सुघर, हलुक, जोरदार आर्किड नोट वाला।
- हुओशान ह्वाङ या (霍山黄芽, Huòshān Huáng Yá): पड़ोसी जिला हुओशान (霍山) के पीयर चाय, जवन डाबीशान में ही बा। हुओशान ह्वाङ या में “मनह्वाङ” (闷黄, “पीयर पड़े के”) प्रक्रिया होला, जवन एकरा ढेर कोमल, मीठ चरित्र देला। स्याओ लान हुआ शुद्ध हरियर, ताजा आ सुगंध में ढेर चमकीला।
- ताइपिङ होउ कुई (太平猴魁, Tàipíng Hóu Kuí): एगो अउरी आन्हुई के नामी हरियर चाय जेमें बड़हन चिपटा पत्ता आ ख़ास “आर्किड” सुगंध होला। लेकिन एकर आर्किड नोट कम तीखा, आ पत्ता के रूप बिलकुल अलग — होउ कुई भव्य, स्याओ लान हुआ नन्हा आ सुंदर।
- चिङश्यान लान स्याङ (泾县兰香, Jīngxiàn Lánxiāng): पड़ोसी जिला चिङश्यान (泾县) के हरियर चाय — आन्हुई स्कूल के एगो अउरी “आर्किड” प्रतिनिधि। शैली में करीब, लेकिन शूचङ स्याओ लान हुआ के ख़ास “अँकुसी” आकार आ ढेर साफ चेस्टनट पृष्ठभूमि एकरा अलग करेला।
अंत में:
शूचङ स्याओ लान हुआ (舒城小兰花, Shūchéng xiǎo lán huā) — कविताई चाय ह। एहमें सब कुछ एगोहे बिचार — आर्किड — के अधीन बा: अंकुर के आकार, काढ़ा के रंग, आ सबसे बड़ बात, ऊ अलभ्य लेकिन बिना गलती के पहिचानल जाए वाला सुगंध, जवन कउनो दोसर हरियर चाय से भ्रमित ना कइल जा सके। एह आर्किड के सुघरता के पाछे डाबीशान (大别山, Dàbiéshān) के कठोर परबती टेरुआर, सदियन पुरान आबादी वाला रोपण जवन जंगली आर्किड के साथे उगल बा, आ बाँस के झाड़ू वाला कारीगर बा, जवन एक्के गति में मुट्ठी भर अंकुर के कला के कृति बना देला। ई चाय धीरज राखे वाला के इनाम देला: एकरा सही पानी, सही तापमान दीं — आ ई तीन गो सुगंध से जबाब दी: पहिला साँस में, पहिला घूँट में, आ लंबा, उजियार स्वाद-बाद में।