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लूशान युन वू

Lúshān yún wù · 庐山云雾

लूशान युन वू (庐山云雾, Lúshān yún wù) — चीन के सबसे पुरान आ सबसे परसिद्ध हरियर चाय मे से एक ह, जवन “चीन के दस गो परसिद्ध चाय” (中国十大名茶) के कैनन सूची मे सामिल बा। एकर नाँव — “लूशान पहाड़ के बादर-धुंध” — एकर सार ठीक-ठीक बतावेला: ई चाय सच्चे बादरन मे उपजेला, पबितर पहाड़ के ढलान पर, जेकरा साल भर करीबन 200 दिन धुंध छाइल रहेला।…

लूशान युन वू (庐山云雾, Lúshān yún wù) — चीन के सबसे पुरान आ सबसे परसिद्ध हरियर चाय मे से एक ह, जवन “चीन के दस गो परसिद्ध चाय” (中国十大名茶) के कैनन सूची मे सामिल बा। एकर नाँव — “लूशान पहाड़ के बादर-धुंध” — एकर सार ठीक-ठीक बतावेला: ई चाय सच्चे बादरन मे उपजेला, पबितर पहाड़ के ढलान पर, जेकरा साल भर करीबन 200 दिन धुंध छाइल रहेला। एकर परसिद्धी “छव गो सिद्धी” (六绝, liù jué) खातिर बा: मोट आ लचकदार टूँगा, पन्ना नियर हरियर रंग जेह मे भरपूर रोयाँ होखे, पारदर्शी तेजस्वी अर्क, कोमल एकरस पत्ती निचला मे, लमहर गहिर सुगंध, आ भरपूर मिठास लिहले स्वाद।

1. बरगीकरन आ उत्पत्ति:

  • किसिम: हरियर चाय (बे-किनवन वाली)। भूनल हरियर चाय (炒青绿茶, chǎoqīng lǜchá) के श्रेणी मे आवेला, जेकर पत्ती के बिसेस लपटान रूप होला, चीड़ के पतई नियर भा ऑर्किड (orchid) फूल नियर।

  • श्रेणी: “चीन के दस गो परसिद्ध चाय” (中国十大名茶) के सूची मे सामिल। इतिहासी “गोंग चा” (贡茶, gòngchá) — सोंग राजबंस के जमाना से राजदरबार मे चढ़ावल जाए वाला चाय। 1982 मे “चीन के नामी चाय” (中国名茶) के दरजा दिहल गइल। 2015 मे मिलान के बिस्व प्रदरसनी (एक्सपो) मे सोनहरा पुरस्कार मिलल।

  • उत्पत्ति: चीन, जिआंगसी प्रांत (江西, Jiāngxī), जिउजिआंग सहर (九江, Jiǔjiāng), लूशान परबत श्रेणी (庐山, Lúshān)। उतपादन के इलाका पूरा लूशान परबत के हिस्सा घेरेला, जेहमे हानयांगफेंग (汉阳峰), उलाओफेंग (五老峰), शियाओतिआनची (小天池) नियर चोटी सभ आ लगही के गहिर घाटी सामिल बाड़ी सऽ।

  • भूगोलीय निर्देसांक: करीबन 29°35′ उत्तरी अक्सांस, 115°59′ पूरबी देसान्तर।

2. इतिहास आ सांस्कृतिक महत्त्व:

  • इतिहास: लूशान युन वू सबसे पुरान इतिहास वाली चाय सभ मे से एक बा, जेकर इतिहास करीब दू हजार बरिस के बा। लूशान मे चाय उपजावे के सुरुआत बौद्ध भिक्षु आ दाओवादी एकांतवासी सभ के साथे भइल, हान राजबंस (206 ई.पू.–220 ई.) के जमाना मे, जे लोग सबसे पहिलका पहाड़ी ढलान पर जंगली चाय के झाड़ी सभ के चुने आ खेती करे लगले।

    पूरबी जिन बंस (317–420) मे परसिद्ध बौद्ध गुरु हुईयुआन (慧远, Huìyuǎn) लूशान के पाँखर मे दोंगलिन मंदिर (东林寺, Dōnglín Sì) अस्थापित कइलें आ “गाँव-धरम-बुवाई” (农禅并重, nóng chán bìng zhòng) के परंपरा के बढ़ावलेन — मने मठ के साधना के साथे खेती करे के चलन — एकरा से ओह इलाका के चाय-संस्कृति के बड़का बल मिलल।

    तांग बंस (618–907) मे लू यू (陆羽, Lù Yǔ) “चाय सूत्र” (茶经, Chá Jīng) मे लिखले: “लूशान परबत के चाय बादर-धुंध मे बढ़ेला, एकर स्वाद बहुते नीमन होला।” एह जमाना से ई चाय “गोंग चा” के रूप मे दरबार भेजल जाए लागल। कबी बाई जुई (白居易, Bái Jūyì) लूशान के चाय के अपन कबिताई मे गावलें, आ एकर साहित्यिक कीरति मजबूत कइलें।

    सोंग राजबंस (960–1279) मे ई चाय आधिकारिक रूप से साम्राज्यिक चढ़ावा बन गइल। दार्शनिक झू सी (朱熹, Zhū Xī) अपन दार्शनिक बातचीत मे लूशान के चाय के इस्तेमाल कइलें, चाय-संस्कृति के नव-कन्फूशियाई सोच से जोड़तानी।

    मिंग बंस (1368–1644) मे चाय के टिकाऊ नाँव “युन उ चा” (云雾茶) — “बादर-धुंध के चाय” पड़ल, जे ओकर लगातार बादरन से तोपाइल पहाड़ी चोटी से उत्पत्ति के देखावेला।

    नवका जमाना मे: 1959 मे मार्शल झू दे (朱德, Zhū Dé) चाय खातिर तारीफ के कबिता लिखलें; 1982 मे लूशान युन वू “चीन के नामी चाय” के आधिकारिक रजिस्टर मे सामिल कइल गइल; 2015 मे मिलान के बिस्व प्रदरसनी मे सोनहरा पुरस्कार मिलल।

  • नाँव:

    • “लूशान” (庐山) — जिआंगसी प्रांत के एगो पबितर परबत, जे यूनेस्को के बिस्व धरोहर सूची मे सामिल बा। एह नाँव के जुड़ाव कुआं बंस के सात गो भाई सभ के कथा से बा, जे झोउ बंस के जमाना मे पहाड़ पर झोंपड़ी (庐, lú) बनवले रहले।
    • “युन उ” (云雾) — “बादर आ धुंध”: परबत के जलवायु के ठीक-ठीक बखान, जहाँ बादर के परदा साल मे करीबन 200 दिन रहेला, चाय उपजावे खातिर अलगे किसिम के दसा बनावेला।
  • सांस्कृतिक महत्त्व: लूशान — चीनी बौद्ध आ दाओवाद के पबितर परबत सभ मे से एक, साहित्यिक जातरा आ दार्शनिक एकांतवास के जगह। लूशान के चाय चान-बौद्ध धरम (जेन), तांग आ सोंग जुग के कबिताई, आ पहाड़ी एकांतवासी के छबि के साथे अटूट रूप से जुड़ल बा। लूशान युन वू खाली पिए वाला चीज ना, बालुक “बादर से परे” के पबितरता आ आतमिक सफाई के परतीक बा।

3. बनस्पति बरनन आ कच्चा माल:

  • किसिम / कल्टीवार: लूशान युन वू बनावे खातिर चाय के झाड़ी Camellia sinensis var. sinensis के कई ठे किसिम इस्तेमाल होला:

    • लोकल चुनतीझोंग (本地群体种, běndì Qúntǐzhǒng) — बीया से उपजावल जाए वाला देशी किसिम, सदियन से लूशान के ऊँच पहाड़ी बादर-जलवायु के हिसाब से ढल गइल। जटिल, कई परत वाला स्वाद देला।
    • बाहर से ले आइल किसिम: लोंगजिंग 43 (龙井43, Lóngjǐng 43), शांगमेइझोउ (上梅州, Shàngméizhōu), आनहुई नं. 1 (安徽一号) — ठंढ सहन करे के छमता आ गुन के एकरसता सुधारेला।
    • नवका किसिम: लू युन 1, 2, 3 (庐云1号、2号、3号, Lú Yún) — 2019 मे रजिस्टर भइल, जल्दी पाके वाला किसिम हई स, खासकर ऑर्किड आकर के चाय बनावे खातिर बहुते उपयुक्त।
  • तोड़ाई: तोड़ाई सुरुआती बसंत मे शुरू होला। सबसे बढ़िया मानल जाला “मिंगछ्यान छा” (明前茶, Míngqián chá) — चींगमिंग (~5 अप्रैल) से पहिले तूतल चाय: एह मे खासकर पूरा-पूरा कलियन (单芽, dān yá) रहेला, जेकर हिस्सा एगो जथ्था मे कम से कम 90% होला। एमीनो एसिड के ऊँच मातरा के चलते एकरा मे मिठास खास अंदाज से होला। “यूछ्यान छा” (雨前茶, Yǔqián chá) — गुयू (~20 अप्रैल) से पहिले के चाय: “एगो कली — एगो पत्ती” के मानक, कलियन के हिस्सा कम से कम 80%, पॉलिफेनॉल के ऊँच मातरा के चलते स्वाद अउरी भरपूर आ गाढ़ होला। गरमी-पतझड़ के चाय सीमित मातरा मे बनेला आ गुन मे पाछे रहेला।

  • तोड़ाई के मानक: सबसे ऊँच दरजा खातिर — पूरा कली भा एगो कली बस खुलहीं लागल पाती के साथे। पहिला दरजा खातिर — एगो कली एक पाती के साथे। दूसरा दरजा खातिर — एगो कली दू गो पाती के साथे, जवन अभिन खुले लागल होखे।

  • कच्चा माल खातिर जरूरत: कोमल, साबुत टूँगा, एकही नाप के, मोट पाती भा यांत्रिक घाव बिना। ओही दिने प्रोसेसिंग।

4. इलाका (टेरवार) आ उपजावे के बिसेसता:

  • जलवायु: लूशान उप-उष्णकटिबंधीय नम जलवायु इलाका मे आवेला। खास पहिचान — बहुते ढेर बादर आ धुंध: सालाना धुंध वाला दिन के औसत करीबन 200 (सबसे ढेर — 223 दिन साल भर मे)। सापेक्छ आद्रता — 78% (अप्रैल से सितंबर ले 81% से ऊपर)। भरपूर धुंध बिखराइल सूरजमारी (散射光) के आदर्श दसा बनावेला, जे कुल धूप के 75% से ढेर होला। दिन-रात के तापमान के उतार-चढ़ाव 15°C तक पहुँचेला — दिन मे ऊँच तापमान जैविक पदारथ जमा करे के बढ़ावा देला, रात के ठंढक ऊर्जा खरचे के धीमा कर देला, एकरा से पाती मे एमीनो एसिड आ कैफीन के मातरा बढ़ जाला।

  • उँचाई: मुख्य चाय बाग सभ समुद्र तल से 800–1200 मीटर के ऊँचाई पर, लगातार बादर के इलाका मे बाड़ी स।

  • उच्चावच आ जल बिग्यान: लूशान परबत यांगत्से नदी (长江) के उत्तरी तीरे पर बा, एकर दक्खिनी ढलान चीन के सबसे बड़हन मीठपानी के ताल — पोयांगहू (鄱阳湖, Póyáng Hú) के ओर रुख कइले बा। ताल आ नदी के पानी के परसत बहुते ढेर भाप बनाके उड़ावेला, जे गहिर पहाड़ी घाटी सभ से ऊपर उठेला आ बादर के परदा बनावेला। ठीक ई भू-आकृति बिग्यानी “पंप” लूशान के छोटका जलवायु के अलगे बनावेला।

  • माटी: उपजाऊ, खटाई लिहले माटी, जैविक पदारथ आ खनिज से भरपूर। लगातार धुंध आ ठंढक के दसा मे चाय के झाड़ी के धीरे-धीरे बढ़े से मांसल, रसदार टूँगा (芽叶肥壮) मिलेला।

  • उतपादन के केन्द्र: उलाओफेंग (五老峰) आ हानयांगफेंग (汉阳峰) चोटी सभ के बीच के इलाका, जहाँ धुंध लगभग दिने-रात छाइल रहेला — एहिजा के चाय सबसे बढ़िया गुन वाली मानल जाला।

5. बनावे के तकनीक:

लूशान युन वू परंपरागत हाथ से आ मसीन से दुनो तरीका से बनावल जाला। हाथ के तकनीक के ढेर कीमत दिहल जाला आ एकरा से ऊँच दरजा के चाय बनेला।

हाथ के तकनीक (手工工艺, shǒugōng gōngyì):

  • “हरियर मारल” / फिक्सेशन (杀青 — shāqīng): पाती सभ के कच्चा लोहा के कड़ाही मे मद्धिम आँच पर भूनल जाला। लूशान युन वू के तकनीक के खास बात — कम तापमान पर भूनाई (低温炒制, dīwēn chǎozhì), जेकरा से पाती के पन्ना रंग अधिका से अधिका बचल रहेला।

  • हिलावल आ बिखरावल (抖散 — dǒu sàn): फिक्सेशन के बाद पाती जोर से हिलावल जाला, चिपकल टूँगा सभ के अलग-अलग कइल जाला आ बेसी भाप निकारल जाला।

  • लपेटाई (揉捻 — róuniǎn): पाती सभ के नरमी से लपेटल जाला, सुरुआती ढाँचा खड़ा कइल जाला आ कोशिकीय रस निकारल जाला।

  • पहिलका सुखाई (初干 — chūgān): नमी घटावे खातिर सुरुआती सुखाई।

  • रस्सी नियर लंबा आकार (搓条 — cuō tiáo): उस्ताद हाथ से पाती सभ के गाढ़ रस्सी नियर बेल के चीड़ के पतई भा ऑर्किड के मुड़ल पंखड़ी नियर बिसेस आकार देला।

  • रोयाँ निकारल (做毫 — zuò háo): एगो बिसेस तरीका, जेकरा से चाँदी नियर उज्जर रोयाँ (白毫) पाती के सतह से अलग हो के लपेटल टूँगा सभ के तोप लेला, चाय के बिसेस “पाला” नियर रूप देला।

  • आखिरी सुखाई (再干 — zài gān): कम तापमान पर टिकाऊ दसा मे ले आवल।

मसीन से तकनीक (机械工艺, jīxiè gōngyì):

  • बिछवाई (摊青) → फिक्सेशन (杀青) → ठंढाई आ नमी वापस लवटल (摊凉回潮) → लपेटाई (揉捻) → सीध करे (理条) → कस के आकार (紧条做形) → सुखाई (烘干).

6. इंद्रीय गुन (ऑरगैनोलेप्टिक):

  • सूखल पाती के बाहरी रूप: लपेटल आकार, चीड़ के पतई भा ऑर्किड के मुड़ल पंखड़ी नियर (卷曲形,形似松针或兰花). टूँगा गाढ़, पातर आ सोहावन (紧结秀丽). रंग — पन्ना-हरियर, भरपूर चाँदी-उज्जर रोयाँ के साथे (翠绿披毫).

  • सूखल पाती के सुगंध: जटिल, कई परत वाला। ऑर्किड के सुगंध (兰花香, lánhuā xiāng) मुख्य होला — साफ, ठंढहा, “पहाड़ी”। गरम करे पर चेस्टनट (शाहबलूत) के सुगंध (栗香, lì xiāng) उबरे लागेला। प्याला ठंढा होखे पर (冷杯) सहद के मिठास (蜜香, mì xiāng) उभर के आवेला।

  • अर्क के सुगंध: ऑर्किड जइसन, टिकाऊ आ गहिर। गरम अर्क मे चेस्टनट के सुगंध अउरी मजबूत हो जाला। ठंढा होखे पर — सहद के महक लंबा गूँज के साथे।

  • स्वाद: ताजा (鲜爽, xiānshuǎng) — एमीनो एसिड के ऊँच मातरा के चलते “उमामी” के तेज अनुभव। गाढ़ आ भरपूर (醇厚, chúnhòu). मीठ — लंबा समय ले लउटत मिठास के साथे (回甘持久, huígān chíjiǔ). कई बेर पानी चढ़ावे पर भी टिकाऊ (耐泡, nàipào) — 4 भा ढेर बेर पानी चढ़ावे पर भी टिक जाला। चखनी के क्लासिक सूत्र: “पहिलका घूँट — हलकी कसैलाहट; दूसरका — खिलत सुगंध; तीसरका — लौटत मिठास; चउथका से — स्वाद धीरे-धीरे हलका होखत जाला” (初品微涩,二品留香,三品回甘,四泡后味淡).

  • अर्क के रंग: कोमल हरियर, साफ आ तेजस्वी (嫩绿明亮), क्रिस्टल नियर पारदर्शी।

  • चाय के तली (पानी चढ़ल पाती): कोमल, एकरस पीयर-हरियर रंग के टूँगा (黄绿鲜活), “छोट कली” (嫩匀成朵) के रूप मे जुटल। पाती लचकदार, जीवंत, अपन मूल आकार बचवले।

7. रासायनिक संरचना:

ऊँच पहाड़ी उत्पत्ति, लगातार धुंध आ दिन-रात के बड़हन तापमान के उतार-चढ़ाव लूशान युन वू के खास रासायनिक रूप निरधारित करेला:

  • पॉलिफेनॉल (कैटेचिन): ढेर मातरा मे। ईजीसीजी — मुख्य घटक, जे एंटीऑक्सीडेंट छमता आ हलकी ढाँचागत कसैलाहट देला।

  • एमीनो एसिड (एल-थीएनिन समेत): ऊँच मातरा — “बादर वाली” ऊँच पहाड़ी चाय सभ के एगो मुख्य पहिचान। ठीक एमीनो एसिड के ऊँच सतर स्वाद के ताजगी आ मिठास खातिर जिम्मेदार बा। धुंध आ बिखराइल सूरजमारी के दसा मे टूँगा के धीरे बढ़े से एमीनो एसिड के कैटेचिन मे बदलल धीमा हो जाला, जेकरा से नरम, कड़ुवाहट बिना के गुन बचल रहेला।

  • एल्केलॉइड: कैफीन के ऊँच मातरा — लंबा बढ़े के समय वाली ऊँच पहाड़ी चाय सभ के पहिचान। एकरा से साफ लेकिन नरम टॉनिक असर होला। थीओब्रोमीन आ थीओफिलीन भी होला।

  • बिटामिन: बिटामिन C के ऊँच मातरा (सुरुआती बसंत के तोड़ाई के हरियर चाय के पहिचान)। बिटामिन B समूह, कैरोटिनॉइड।

  • खनिज: पोटैसियम, मैगनीसियम, जस्ता, लोहा, मैंगनीज — संरचना लूशान के उपजाऊ खटाई माटी से निरधारित होला।

  • सुगंधित यौगिक: बाष्पसील सुगंधित समूह मे लिनालूल आ अउरी टरपीनॉइड होला, जे बिसेस ऑर्किड-चेस्टनट के गुलदस्ता बनावेला।

8. लाभदायक गुन:

  • टॉनिक असर आ दिमागी सफाई: कैफीन एल-थीएनिन के साथे मिल के हलकी, लमहर ताजगी आ ऊँच एकाग्रता (提神醒脑) देला।

  • पाचन सुधार: चाय के पॉलिफेनॉल चरबी के टूटे के बढ़ावा देला आ चिकनाई खाए पर भारीपन के अनुभव हटावेला (消食解腻).

  • ठंढा करे आ पेशाब ले आवे के असर: बेसी तरल पदारथ के निकासे मे मदत करेला, हल्के तरीका से भीतरी गरमी हटावेला (清热利尿).

  • एंटीऑक्सीडेंट असर: पॉलिफेनॉल आ बिटामिन C के ऊँच मातरा ऑक्सीडेटिव तनाव से मजबूत सुरक्छा देला (抗衰老).

  • दिल-रकतवाहिका तंत्र के सहायता: पॉलिफेनॉल कोलेस्ट्रॉल के सतर घटावे आ रकतचाप सामान्य करे मे मदत करेला (降脂降压).

  • ताजगी देबे वाला असर: साफ अर्क साँस के ताजा करेला आ भीतरी हल्कापन के अनुभव करावेला।

  • जरूरी: बतावल गुन हरियर चाय के संरचना के आम उपलब्ध आँकड़ा पर आधारित बाड़ी स आ चिकित्सकीय सलाह ना हई स।

9. पानी चढ़ावल (खीनी):

  • पानी के तापमान: 80–85°C (खउलत पानी, करीबन 2 मिनट ठंढा कइल)। जेतना ऊँच दरजा, ओतने कम तापमान — सबसे ऊँच दरजा खातिर 80°C उचित।

  • चाय के मातरा: 150 मिली पानी खातिर 3 ग्राम।

  • बासन: काँच के गिलास (玻璃杯) — लपेटल टूँगा सभ के खुले के निहारे आ अर्क के रंग के आँकल करे मे मदद करेला। सफेद चीनी माटी के गैवान (白瓷盖碗) भी उपयुक्त बा — सुगंध के अउरी ठीक से नियंत्रित करे खातिर।

  • परकिरिया (मझिला पानी चढ़ावे के तरीका / 中投法, zhōng tóu fǎ):

    1. बासन गरम पानी से गरम करीं, पानी ढारि दीं।
    2. गिलास भा गैवान मे 3 ग्राम चाय डालीं।
    3. 1/3 भाग ले पानी भरल जाव — चाय के “गीला” करीं, 30 सेकंड इंतजार करीं, पानी ढारि दीं (धुलाई)।
    4. 7/10 भाग ले पानी भरल जाव।
    5. पहिलका अर्क — 1–2 मिनट।
    6. बाद के पानी चढ़ावे पर — समय बढ़ावल जाव। चाय 3–4 भरपूर पानी चढ़ावे तक टिकेला।
  • धियान दीं: स्वाद के सबसे नीमन अनुभव — करीबन 60°C के अर्क तापमान पर, जब ताजगी आ मिठास अधिकतम लागे। खाली पेट पीयल ठीक ना ह (टैनिन स्लेषमा के जलन पैदा क सकेला)। संवेदनशील पेट होखे पर — खाना के एक घंटा बाद पीयल जाव।

10. जमा करे (संरक्छन):

  • हवाबंद बासन मे राखल जाव — चीनी माटी, काँच भा टीन के डिबिया मे — अँधेरा, सूखा आ ठंढा जगह पर, बाहरी गंध से दूर।
  • आदर्श तापमान — 0–5°C (फ्रिज), पूरा बंद पैकिंग मे, खाए के सामान से अलग।
  • सरत के पालन करे पर जमा करे के समय — 12 महीना ले।
  • खोलला के बाद — सुगंध के अधिकतम ताजगी खातिर एक महीना के भीतर इस्तेमाल करे के सलाह।

11. दाम आ नकली चीज:

लूशान युन वू — ऊँच नाँव आ कोर जोन से सीमित उतपादन वाली चाय ह, एकरा से ई अकसर नकल के शिकार बनेला। दाम किसिम, तोड़ाई के समय, हाथ भा मसीन से बनावल आ कोर जोन (उलाओफेंग आ हानयांगफेंग के बीच) भा बाहरी इलाका से उत्पत्ति पर निरभर करेला।

मानक के हिसाब से, चाय चार दरजा मे बाँटल जाला: सबसे ऊँच (特级), पहिला (一级), दूसरा (二级) आ तीसरा (三级).

  • नकली से कइसे बचीं:

    • जाँचल-परखल बेचे वाला से खरीदीं, जेकरा लगे लूशान परबत से उत्पत्ति के सबूत होखे।
    • बाहरी रूप के आँकल करीं: असली लूशान युन वू — गाढ़ लपेटल टूँगा, ढेर चाँदी नियर रोयाँ के साथे। तेज हरियर “प्लास्टिक” रंग, रोयाँ बिना — मैदानी इलाका के चाय के पहिचान।
    • सुगंध के आँकल करीं: बिसेस ऑर्किड-चेस्टनट के सुगंध। “पहाड़ी” खासियत न होखे — संदेह के कारन।
    • पानी चढ़ावे के टिकाऊपन जाँचीं: असली लूशान युन वू 3–4 भरपूर पानी चढ़ावे तक ठहरेला; नकली पहिलका के बाद “हार जाला”।
    • दाम पर धियान दीं: संदिग्ध रूप से कम दाम — नकली होखे के पक्का पहिचान।

12. रोचक जानकारी:

  • लूशान परबत — यूनेस्को के बिस्व धरोहर (1996 से) “बिसिस्ट बैसरिक कीमत के सांस्कृतिक परिदृश्य” के रूप मे। युन वू चाय — एह धरोहर के हिस्सा।

  • मार्शल झू दे (朱德), चीन लोकराज के संस्थापकन मे से एक, लूशान के चाय के बड़का पारखी रहलें आ एकरा खातिर कबिता लिखलें: “लूशान के बादर-धुंध — चाय सभ मे चाय।” ई कबिता नवका चीन मे चाय के पुनरुत्थान के परतीक बन गइल।

  • पारिभासा “六绝” (छव गो सिद्धी) — एगो अलगे फारमूला, जेकरा से “दस गो परसिद्ध चाय” मे खाली लूशान युन वू के बिसेसता बतावल जाला। अउरी ढेर चाय सभ खातिर “चार गो सिद्धी” कहल जाला।

  • लूशान के तराई मे दोंगलिन मंदिर, जे चउथी सदी मे हुईयुआन के अस्थापित कइल गइल, शुद्ध भूमि संप्रदाय (净土宗, Jìngtǔ Zōng) के उदगम आ सबसे पहिलका जगह सभ मे से एक मानल जाला जहाँ चाय-संस्कृति चान-बौद्ध साधना से जुड़ल।

  • नवका किसिम “लू युन” (庐云), 2019 मे रजिस्टर, बहुबरिसी चुनाव-काम के परिणाम ह, जेकर मकसद जल्दी पाके वाला कल्टीवार बनावल रहे, जे लूशान के कठोर ऊँच पहाड़ी जलवायु मे ढल जा सकें।

13. अउरी परसिद्ध चीनी हरियर चाय सभ से तुलना:

  • हुआंगशान माओ फेंग (黄山毛峰, Huángshān Máo Fēng): आनहुई प्रांत से। दुनो — “पहाड़ी धुंध वाली” चाय हई स, लेकिन हुआंगशान माओ फेंग हलकही आ कोमल होला, फूल के सुगंध प्रधान होला। लूशान युन वू — अउरी गाढ़ आ भरपूर, चेस्टनट के सुगंध खास अंदाज से आ लमहर स्वाद के साथे।

  • सी हू लोंग जिंग (西湖龙井, Xīhú Lóngjǐng): चापट पाती, चेस्टनट-फली के सुगंध। लोंग जिंग — “ढाँचागत” आ “उमामी” ओर झुकल; लूशान युन वू — अउरी “जंगली”, ऑर्किड वाला, पहाड़ी ताजगी के साथे।

  • बीलुओचुन (碧螺春, Bìluóchūn): जिआंगसू प्रांत से। कसल सर्पिल आकार, फल-फूल के सुगंध, फलदार पेड़ के साथे सह-खेती के चलते। बीलुओचुन — अउरी कोमल आ फलदार; लूशान युन वू — अउरी मजबूत आ “पहाड़ी”, साफ “खनिजीपन” के साथे।

  • दोउयुन माओ जियान (都匀毛尖, Dōuyún Máo Jiān): गुइझोउ प्रांत से। पातर टूँगा, ढेर रोयाँ, ताजा आ मिठुआइल स्वाद। दोउयुन — अउरी हलकही आ कोमल; लूशान युन वू — अउरी भरा-भराव आ टिकाऊ।

आखिर मे:

लूशान युन वू — ई चाय ह, जेकर जनम बादरन मे भइल बा। दू हजार बरिस के इतिहास, बौद्ध मंदिर आ दाओवादी कुटीर, तांग आ सोंग जुग के महान उस्तादन के कबिताई — ई सब कुछ हर लपेटल टूँगा मे समा गइल बा, जे पहाड़ी रोयाँ के चाँदी नियर पाला से तोपाइल बा। ऑर्किड के सुगंध, जे चेस्टनट के गरमाहट मे बदल जाला, भरपूर मीठ स्वाद, लमहर लौटत मिठास आ क्रिस्टल नियर साफ हरियर अर्क — ई सब लूशान युन वू के ओह लोग खातिर आदर्श चाय बनावेला, जे हर प्याला मे गहराई, चरित्र आ ऊँच पहाड़ी पबितरता के अनुभव खोजत बाड़े।