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ल्यूलोंग होंगचा

Liùlóng hóngchá · 六龙红茶

1930 के दशक में (1932 के उल्लेख बा) स्थानीय चाय उत्पादन के नया गति मिलल: पहिला बड़हन बागान लगावल गइल। 1960 के दशक में राष्ट्रव्यापी कृषि आधुनिकीकरण के तहत उत्पादन के मानकीकरण के काम शुरू भइल। लंबा समय तक ल्यूलोंग चाय मुख्य रूप से हरियर चाय के रूप में जानल जात रहल: "ल्यूलोंग बाईहाओ" (六龙白毫, सफ़ेद रोवेंदार), "ल्यूलोंग…

  • प्रकार: लाल चाय (红茶, hóngchá) — पूरा रूप से किण्वित (ऑक्सीकृत) चाय।
  • श्रेणी: क्षेत्रीय चीनी लाल चाय। “ल्यूलोंग चाय” (六龙茶) एक राष्ट्रीय भौगोलिक संकेतित कृषि उत्पाद (国家地理标志农产品) के रूप में पंजीकृत बा। लाल चाय “ल्यूलोंग यान्चि” (六龙岩赤, Liùlóng Yánchì, “ल्यूलोंग क लाल चट्टान”) ब्रांड के तहत बेचल जाले आ एहमें कई गो किसिम शामिल बाड़ी: “सुनहरा कलिका” (金芽红茶), “सुनहरा सर्पिल” (金螺红茶), “पारंपरिक सियाओचोंग” (传统小种红茶)।
  • उद्गम: चीन, गुआंगशी-चुआंग स्वायत्त क्षेत्र (广西壮族自治区, Guǎngxī Zhuàngzú Zìzhìqū), हेची नगर जिला (河池市, Héchí Shì), नान्डान काउंटी (南丹县, Nándān Xiàn)। ऐतिहासिक जन्मस्थान आ उत्पादन के केंद्र — ल्युचाइ टाउन (六寨镇, Liùzhài Zhèn), लोंगमा गाँव (龙马村, Lóngmǎ Cūn)। संरक्षित क्षेत्र मंचांग (芒场镇), युएली (月里镇), चेंगगुआन (城关镇) आ चोंगबाओ-मियाओ बस्ती (中堡苗族乡) के इलाका के भी कभर करेला — कुल 5 प्रशासनिक इकाई आ 70 गाँव।
  • भूगोलीय निर्देशांक: ≈ 25.0° N, 107.5° E (नान्डान काउंटी के केंद्र के अनुसार; मूल फाइल में त्रुटिपूर्ण निर्देशांक रहल — सुधार कइल गइल)।

2. इतिहास आ सांस्कृतिक महत्व:

  • इतिहास: लोंगमा गाँव के आसपास चाय उगावे के इतिहास लगभग 800 साल पुरान बा, ई सोंग-युआन काल (宋元, 12वीं–14वीं सदी) से चलल आ रहल बा जब स्थानीय लोग पहाड़ी ढाल पर जानबूझ के चाय के झाड़ लगवले। नान्डान काउंटी गुआंगशी आ गुइचो के संगम पर स्थित बा, ऐतिहासिक व्यापार मार्ग के लगे, जवन चाय संस्कृति के प्रसार में सहायक रहल।

    1930 के दशक में (1932 के उल्लेख बा) स्थानीय चाय उत्पादन के नया गति मिलल: पहिला बड़हन बागान लगावल गइल। 1960 के दशक में राष्ट्रव्यापी कृषि आधुनिकीकरण के तहत उत्पादन के मानकीकरण के काम शुरू भइल। लंबा समय तक ल्यूलोंग चाय मुख्य रूप से हरियर चाय के रूप में जानल जात रहल: “ल्यूलोंग बाईहाओ” (六龙白毫, सफ़ेद रोवेंदार), “ल्यूलोंग युन्जियान” (六龙云尖, “बादल के नोक”), “ल्यूलोंग त्सुईपियान” (六龙翠片, “जेड के पंखुड़ी”), “चोंगहुआ यू या” (中华玉芽, “स्वर्ग के जेड कलिका”)।

    “ल्यूलोंग यान्चि” (六龙岩赤) ब्रांड के तहत लाल चाय उत्पादन अपेक्षाकृत नया दिशा हवे जे 2010 के दशक से विकसित हो रहल बा। “ल्यूलोंग चाय उद्योग” (六龙茶业) कंपनी एकर नेतृत्व कइलस आ “कंपनी + सहकारी + आधार + किसान परिवार” मॉडल लागू कइलस। 2011 में “ल्यूलोंग चाय” ब्रांड “हरियर उत्पाद” (绿色食品A级) के प्रमाणीकरण पास कइलस। 2019 में हांगकांग STC से “चेंग” (正印) मार्क के साथे अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणपत्र मिलल। 2022 में “ल्यूलोंग चाय” राष्ट्रीय भौगोलिक संकेत उत्पाद के रूप में पंजीकृत भइल। ल्यूलोंग चाय बनावे के तकनीक हेची शहर के अमूर्त सांस्कृतिक विरासत रजिस्टर में शामिल बा। 2025 में ई ब्रांड चाय पर्यटन आ निर्यात पर जोर देत विकास करत जारी बा।

    सबसे महत्वपूर्ण पुरस्कार में शामिल बा: चेंगदू अंतर्राष्ट्रीय चाय प्रदर्शनी (中国(成都)国际茶博览会金奖) के स्वर्ण पदक; “चोंग चा बेइ” प्रतियोगिता (中茶杯全国名优茶评比一等奖) के पहिला पुरस्कार; “गुओ यिन बेइ” प्रतियोगिता (国饮杯全国茶叶评比一等奖) के पहिला पुरस्कार; गुआंगशी विशेष कृषि उत्पाद प्रदर्शनी के स्वर्ण पदक। अपेक्षाकृत युवा ब्रांड खातिर शीर्ष-स्तरीय पुरस्कारन के अइसन एकाग्रता दुर्लभ बा, ई कच्चा माल के असली गुणवत्ता आ तकनीक के परिपक्वता के गवाह ह।

  • नाम: “ल्यूलोंग” (六龙) नाँव के दूहरा अरथ ह। एक ओर ई उत्पत्ति स्थान के ओर इशारा करेला — ल्युचाइ टाउन (六寨), लोंगमा गाँव (龙马, “ड्रैगन घोड़ा”), जेकरा पहिला अक्षरन से 六龙 (“छह ड्रैगन”) बनल। दूसर ओर ई नाँव प्राचीन ग्रंथ “आइ-चिंग” (《易经》) के संदर्भ देला, जहाँ कियान हेक्साग्राम (乾卦) में कहल गइल बा: “時乘六龍以御天” — “उचित समय पर छह ड्रैगन पर सवार हो के स्वर्ग पर शासन करल”। ई प्रतीक शक्ति, सामंजस्य आ उत्थान के बोध करावेला — जवन ब्रांड के महत्वाकांक्षा से मेल खाला। 红茶 (hóngchá) — “लाल चाय”। लाल चाय के ब्रांड “यान्चि” (岩赤) के शाब्दिक अरथ “लाल चट्टान” ह, जवन पहाड़ी-पथरीली भू-भाग के चरित्र पर जोर देला।

  • सांस्कृतिक महत्व: नान्डान काउंटी बाइकु-याओ (白裤瑶, Báikù Yáo, “सफ़ेद पैंट वाला याओ”) लोग के जन्मस्थान ह, जे दक्खिन चीन के सबसे विशिष्ट जातीय समूह में से एक हवें, जिनकर संस्कृति नृवंशविज्ञान के “जीवित जीवाश्म” मानल जाले। नान्डान के चाय परंपरा याओ आ मियाओ (苗族) जीवन से अभिन्न रूप से जुड़ल बा — चाय रीति-रिवाज, त्यौहार आ रोजमर्रा के आतिथ्य में शामिल बा। 2018 से सालाना नान्डान चाय संस्कृति आ पर्यटन महोत्सव (南丹茶文化旅游节) आयोजित होला, जेह में चखना, चाय तोड़े आ प्रसंस्करण के कार्यशाला, चाय धूप बनावे के प्रतियोगिता (制香), कारवां मार्ग आ “चाय के पेड़ गोद लिहल” (认养茶树) कार्यक्रम के प्रचार शामिल बा।

3. वानस्पतिक विवरण आ कच्चा माल:

  • किसिम / कल्टीवार: मुख्य रूप से स्थानीय Camellia sinensis जनसंख्या (群体种, qúntǐzhǒng) जे सदियन के प्राकृतिकीकरण से उत्तर-पश्चिम गुआंगशी के पहाड़ी स्थिति में ढल गइल बाड़ी। विशिष्ट हरियर चाय खातिर उच्च अमीनो अम्ल वाला चुनिंदा कल्टीवार भी इस्तेमाल होखेला; लाल चाय खातिर गहिर किण्वन सुनिश्चित करे खातिर पर्याप्त पॉलीफेनॉल वाला बैच चुनल जाला।
  • तुड़ाई: बसंत (मार्च–अप्रैल) — मुख्य मौसम। गर्मी आ शुरुआती पतझड़ — अतिरिक्त तुड़ाई। अपेक्षाकृत दक्खिनी स्थिति (≈ 25° N) आ हल्का जलवायु के कारण बसंत तुड़ाई उत्तरी गुआंगशी के तुलना में 1–2 हफ्ता पहिले शुरू हो जाला।
  • तुड़ाई मानक: “सुनहरा कलिका” (金芽红茶) खातिर — एकल कलिका या एक आधा खुलल पत्ता वाली कलिका। “सुनहरा सर्पिल” (金螺红茶) खातिर — एक कलिका आ एक-दू गो पत्ता। “पारंपरिक सियाओचोंग” (传统小种红茶) खातिर — एक कलिका आ दू-तीन गो पत्ता, थोड़ा परिपक्व कच्चा माल जवन हल्का धुँआदारपन के अनुमति देवेला।
  • कच्चा माल के आवश्यकता: पूरा, ताजा पत्ता बिना यांत्रिक नोकसान आ बेमारी के चिह्न के। कच्चा माल हानिरहित (无公害) आ “हरियर” (绿色食品A级) प्रमाणित बा। प्रमाणित बागान के कुल रकबा 3820 म्यू (≈ 255 हेक्टेयर) बा।

4. भू-भाग आ खेती के विशेषता:

  • खेती के ऊँचाई: समुद्र तल से लगभग 700–900 मीटर; मुख्य बागान ≈ 800 मीटर पर केंद्रित बाड़ें।
  • भू-आकृति: उत्तर-पश्चिम गुआंगशी के पहाड़ी-पहाड़ी परिदृश्य। नान्डान काउंटी युन्नान-गुइचो पठार आ गुआंगशी पहाड़ के जोड़ पर स्थित बा, जवन सूक्ष्म-जलवायु के जटिल पच्चीकारी बनावेला। चाय बागान नदी घाटी आ कोमल ढालन पर हवा से सुरक्षित बाड़ें।
  • जलवायु: उपोष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु जेह में ऊर्ध्वाधर क्षेत्रीयता साफ झलकेला। दिन-रात के तापमान में बड़हन अंतर (दैनिक आयाम 8–12°C), बार-बार कोहरा आ बादल छाए रहे के विशेषता बा। औसत सालाना तापमान — लगभग 17–19°C; औसत सालाना बरखा — 1300–1500 मिमी। बिखरल रोशनी आ उच्च नमी अमीनो अम्ल के संचय आ सूक्ष्म सुगंधित यौगिक बने में मददगार होला।
  • माटी: पहाड़ी पीयर आ लाल माटी, हल्का अम्लीय (pH 4.5–6.0), जैविक पदार्थ के अच्छा मात्रा के साथ। मूल चट्टान — बलुआ पत्थर आ स्लेट, जवन बढ़िया जल निकासी आ खनिज संतृप्ति सुनिश्चित करेला। माटी के पथरीलापन चाय में विशिष्ट खनिज “चट्टानी” सुर ले आवेला, जवन ब्रांड नाँव “यान्चि” — “लाल चट्टान” में झलकेला।
  • कृषि तकनीक: पर्यावरण-अनुकूल पद्धति: हाथ से तुड़ाई, रासायनिक सुरक्षा के सीमित इस्तेमाल, जैविक खाद पर जोर। “कंपनी + सहकारी + आधार + किसान परिवार” मॉडल स्थानीय आबादी के चाय उत्पादन श्रृंखला में शामिल करेला आ स्थिर गुणवत्ता नियंत्रण देवेला।

5. उत्पादन तकनीक:

ल्यूलोंग होंगचा क्लासिक गोंगफू होंगचा तकनीक से बनेला; “पारंपरिक सियाओचोंग” श्रृंखला खातिर हल्का धुँआदार धूनी के तत्व लागू होखेला। बनावे के तकनीक हेची शहर के अमूर्त सांस्कृतिक विरासत रजिस्टर में दर्ज बा।

  • तुड़ाई (采摘, cǎizhāi): विशिष्ट ग्रेड के मानक अनुसार कोमल कच्चा माल के हाथ से चुनाव।
  • मुरझाई (萎凋, wěidiāo): पत्ता के नमी 30–40% कम कइल। बाँस के छलनी पर प्राकृतिक मुरझाई या मिलाजुला तरीका (हवा + हल्का गरमी) इस्तेमाल होखेला। बाद के किण्वन के सटीक सेटिंग खातिर स्फीति खतम होखे के डिग्री नियंत्रित कइल जाला।
  • मरोड़ (揉捻, róuniǎn): पत्ता के आकार; “सुनहरा सर्पिल” खातिर — विशिष्ट सर्पिलाकार मरोड़; “सुनहरा कलिका” खातिर — कलिका के रोवें बचावे पर जोर देत जादे सावधान मरोड़।
  • किण्वन / ऑक्सीकरण (发酵, fājiào): 25–30°C तापमान आ उच्च नमी पर नियंत्रित ऑक्सीकरण। समय अलग-अलग तय कइल जाला: “सुनहरा कलिका” खातिर — छोट समय, “पारंपरिक सियाओचोंग” खातिर — गहिर किण्वन, बाद में हल्का धुँआदार गरमी।
  • सुखाई / गरमाई (烘干, hōnggān / 干燥, gānzào): प्रोफाइल के स्थिरीकरण। अधिकतर श्रृंखला खातिर — शुद्ध गरम हवा; “पारंपरिक सियाओचोंग” खातिर — अंतिम चरण में शंकुधारी लकड़ी के धुँआ के न्यूनतम संपर्क, जवन बिना तीखापन के हल्का धुँआदार सुर देवेला।
  • वर्गीकरण (分级, fēnjí): आकार के अनुसार बाँटल। सुनहरा टिप्स (金毫) के उच्च अनुपात वाला बैच अलग से चुनल जाला।

6. स्वाद-गंध विशेषता:

  • सूखा पत्ता के रूप-रंग: धागा नियर, साफ-सुथरा मरोड़ (条索, tiáosuǒ); “सुनहरा सर्पिल” खातिर — सुरुचिपूर्ण सर्पिल। रंग — गहिरा चेस्टनट से करिया तक। सुनहरा टिप्स (金毫) साफ देखाई देला, खासकर “सुनहरा कलिका” के बैच में।
  • सूखा पत्ता के सुगंध: गरम, शहद के आधार आ सूखा फल के साफ सुर के साथ। “पारंपरिक सियाओचोंग” में — हल्का, नाजुक धुँआदारपन (轻烟香), बिना दखल के।
  • अर्क के सुगंध: कई परत वाला: शुरुआती लहर — शहद आ सूखा फल (खूबानी, किसमिस); बिचला — कैरामल रंगत वाला डबलरोटी के पपड़ी; अंतिम — हल्का लकड़ी के सुर। धुँआदार श्रृंखला में पतला चीड़-राल के स्पर्श जुड़ जाला।
  • स्वाद: गाढ़, गोलाकार, शुद्ध प्राकृतिक मिठास के साथ। कसैलापन मध्यम आ “मखमली” होला, बिना कड़वाहट के। बाद के स्वाद — गरमाहट वाला, लंबा, शहद आ भुनल चेस्टनट के बारीकी के साथ। “सुनहरा कलिका” — सबसे कोमल आ मीठ; “पारंपरिक सियाओचोंग” — सबसे “चरित्रवान”, खनिज गहिराई आ धुँआदार बाद के स्वाद के साथ।
  • अर्क के रंग: लाल-अम्बर (红琥珀色), चमकीला आ पारदर्शी। “सुनहरा कलिका” में — हल्का, नारंगी-सुनहरा।
  • चाय के पत्ता (भीगल पत्ता): पत्ता लचीला आ एकसमान खुलेला; ताँबा-भूरा से लाल-चेस्टनट तक के रंग। पत्ता के पूर्णता बचल रहेला, जवन गुणवत्तापूर्ण हाथ से तुड़ाई आ सावधान प्रसंस्करण के सबूत ह।

7. रासायनिक संरचना:

  • पॉलीफेनॉल: कैटेचिन के ऑक्सीकरण उत्पाद — थियाफ्लेविन (अर्क के चमक आ “जीवंतता” बनावेला) आ थियारूबिगिन (रंग के गहिराई आ स्वाद के “शरीर”)। कुल पॉलीफेनॉल मात्रा — दक्खिन चीन के पहाड़ी लाल चाय खातिर सामान्य (≈ 22–26%)।
  • अमीनो अम्ल: एल-थिएनिन सहित — कोमलता, मिठास आ “शहद” जइसन बाद के स्वाद देवेला। बार-बार कोहरा वाला ऊँच पहाड़ी स्थिति अमीनो अम्ल के अधिका संचय में मददगार होला।
  • अल्कलॉइड: कैफीन (सामान्यतः 2.5–3.5%), थियोब्रोमिन आ थियोफिलिन अल्प मात्रा में।
  • विटामिन आ खनिज: बी-समूह विटामिन; पोटैशियम, मैग्नीशियम, मैंगनीज, जस्ता। नान्डान के पहाड़ी माटी पत्ता के सूक्ष्म तत्वन से समृद्ध करेला।
  • वाष्पशील सुगंधित यौगिक: टेरपीन (लिनालूल, जेरानिओल), एल्डिहाइड आ माइलार अभिक्रिया उत्पादन के जटिल मिश्रण। धुँआदार श्रृंखला खातिर ग्वायाकोल आ सिरिंगोल — शंकुधारी लकड़ी जले के उत्पाद — के उपस्थिति विशेषता ह।
  • पेक्टिन पदार्थ: स्थानीय पहाड़ी जनसंख्या खातिर सामान्य मध्यम-बढ़ल मात्रा; अर्क के “गोल” बनावट देवेला।

8. लाभकारी गुण:

  • कोमल ताज़गी: एल-थिएनिन के साथ कैफीन बिना घबराहट के एकसमान स्फूर्ति आ एकाग्रता देवेला, कॉफी से हल्का असर।
  • एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव: थियाफ्लेविन आ थियारूबिगिन में स्पष्ट एंटीऑक्सीडेंट क्षमता होला; लाल चाय के नियमित सेवन ऑक्सीडेटिव तनाव धीमा करे से जुड़ल बा।
  • पाचन समर्थन: टैनिन वाला गरम लाल चाय पाचन प्रक्रिया के कोमल उत्तेजना देवेला; खासकर भारी या चिकनाई वाला भोजन के बाद आरामदायक।
  • हृदय-रक्तवाहिका तंत्र: लाल चाय के पॉलीफेनॉल नियमित मध्यम सेवन पर रक्तवाहिनी के लचीलापन बनावे आ कोलेस्ट्रॉल स्तर सामान्य करे में मददगार।
  • गरमाहट प्रभाव: शहद जइसन रूपरेखा वाला पूर्ण-शरीर अर्क ठंड आ थकान के एहसास कम करेला — पतझड़-जाड़ा के मौसम खातिर आदर्श पेय।
  • संज्ञानात्मक कार्य: एल-थिएनिन मस्तिष्क के अल्फा-तरंग उत्पन्न करे में मदद करेला, “शांत सतर्कता” के स्थिति बनावेला — रचनात्मक आ बौद्धिक काम खातिर सर्वोत्तम।

नोट: बतावल गुण लाल चाय के जैवसक्रिय घटकन के सामान्य आँकड़ा पर आधारित बाड़ें आ चिकित्सकीय सलाह के जगह ना लेत।

9. बनावे के तरीका:

  • पानी के तापमान: 90–95°C।
  • चाय के मात्रा: 4–6 ग्राम प्रति 100–120 मिली।
  • बर्तन: गाइवान (盖碗) — सुगंध प्रोफाइल खोले खातिर सबसे उपयुक्त; चीनी मिट्टी या काँच के चायदानी; गोल स्वाद खातिर यिशिंग चायदानी।
  • प्रक्रिया:
    1. बर्तन के गरम पानी से गरम करीं आ पानी फेंक दीं।
    2. चाय डालीं; गरम पत्ता के सुगंध लीं।
    3. धुलाई आमतौर पर जरूरी ना ह, लेकिन कस के मरोड़ल पत्ता खातिर (1–2 सेकंड) संभव बा।
    4. पहिला डालाई: 8–12 सेकंड।
    5. 2–4वीं डालाई: 10–15 सेकंड।
    6. एकरे बाद समय 5–10 सेकंड बढ़ाईं; उच्च गुणवत्ता वाला ल्यूलोंग होंगचा 6–8 डालाई तक चलेला।
    7. धुँआदार सुर वाला “पारंपरिक सियाओचोंग” खासकर थोड़ा ऊँच तापमान (95°C) आ थोड़ा बढ़ल समय पर बढ़िया लागेला — एकरा से एकर विशिष्ट धुँआदार-मीठ रूपरेखा पूरा तरह से खुलेला।

10. भंडारण:

  • वायुरोधी बर्तन (टीन के डिब्बा, वैक्यूम पैकेट), बाहरी गंध, सीधा रोशनी आ नमी से सुरक्षा।
  • सबसे उत्तम: 15–25°C, सूखा अँधेरिया जगह।
  • ल्यूलोंग के लाल चाय ताजा (उत्पादन के 6–18 महीना भीतर) पीयल बढ़िया होला, लेकिन गुणवत्ता वाला बैच सही भंडारण पर 2–3 साल तक “गोल” हो सकेला, अतिरिक्त गहिराई आ “मखमलीपन” पा सकेला।
  • धुँआदार श्रृंखला “पारंपरिक सियाओचोंग” थोड़ा लंबा भंडारण के अनुमति देला: धुँआदार सुर समय के साथ नरम हो के स्वाद में एकीकृत हो जाला।

11. कीमत आ नकली:

  • कीमत सीमा: सुलभ — मध्यम खंड। ल्यूलोंग होंगचा दक्खिन गुआंगशी के लाल चाय में “कीमत — गुणवत्ता” अनुपात के हिसाब से सबसे आकर्षक में से एक बा। “सुनहरा कलिका” — श्रृंखला में सबसे महँग; “पारंपरिक सियाओचोंग” — थोड़ा सस्ता।
  • लागत कारक: तुड़ाई मानक (एकल-कलिका बनाम कलिका पत्ता सहित); मौसम (बसंत के ऊँच दाम); ग्रेड आ ब्रांड “यान्चि” के विशिष्ट श्रृंखला।
  • नकली से कइसे बचीं:
    1. “ल्यूलोंग चाय उद्योग” कंपनी के अधिकृत विक्रेता से या प्रमाणित क्षेत्रीय चैनल से खरीदीं।
    2. पत्ता के मूल्यांकन करीं: एकसमान मरोड़, धूल आ बाहरी चीज के अनुपस्थिति; “सुनहरा कलिका” खातिर सुनहरा रोवें के मौजूदगी।
    3. सुगंध जाँचीं: शुद्ध, बिना “जरल” खुरदरापन या फफूँद के सुर के।
    4. अर्क: लाल-अम्बर, चमकीला, पारदर्शी; धुँधलापन खतरनाक संकेत ह।
    5. बतावल ग्रेड खातिर संदेहास्पद रूप से कम कीमत पर शंका करीं।

12. रोचक तथ्य:

  • “ल्यूलोंग” (六龙, “छह ड्रैगन”) नाँव चीनी चाय के दुनिया के सबसे काव्यात्मक नाँवन में से एगो ह: ई “परिवर्तन के किताब” के प्राचीन प्रतीक के संदर्भ देला, जवन शक्ति आ स्वर्गीय सामंजस्य के प्रतीक ह।
  • नान्डान काउंटी सफ़ेद पैंट वाला याओ (白裤瑶) के जन्मस्थान ह, जे चीन के सबसे कम अध्ययनित आ विशिष्ट जातीय समूह में से एगो ह। इनकर पारंपरिक संस्कृति, जेह में ताँबा के ढोल (铜鼓), बुनाई आ रीति-रिवाज शामिल बा, चाय रस्म से गहिराह जुड़ल बा। नान्डान के यात्रा चाय आ नृवंशविज्ञान पर्यटन के मेल करे के मौका देला।
  • ल्यूलोंग चाय नान्डान के आठ गो उत्पादन में से एगो ह जेकरा राष्ट्रीय भौगोलिक संकेत मिलल बा, साथे में नान्डान याओ मुर्गी (南丹瑶鸡), नान्डान ब्लूबेरी आ अउरी विशेषता।
  • छठवाँ नान्डान चाय संस्कृति महोत्सव (2023) में “चाय के पेड़ गोद लिहल” (认养茶树) कार्यक्रम शुरू भइल: केहू भी बागान में कौनों एगो खास चाय के पेड़ के संरक्षण में ले सकेला आ नामित उपज पा सकेला।
  • लाल चाय “ल्यूलोंग यान्चि” अपेक्षाकृत युवा उत्पाद ह, लेकिन छोट समय में एकर राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारन के प्रभावशाली संग्रह जमा हो गइल, जवन स्थानीय कच्चा माल के उच्च गुणवत्ता आ उत्पादकन के कौशल के गवाही देला। “ल्यूलोंग चाय उद्योग” कंपनी सक्रिय रूप से चाय पर्यटन विकसित करत बा, मेहमानन के बागान भ्रमण जहाँ खुद तुड़ाई संभव बा, प्रसंस्करण कार्यशाला, चखना आ याओ संस्कृति से परिचय के पेशकश करत बा।

13. किसिम आ ग्रेड:

ल्यूलोंग चाय कई गो श्रृंखला में जारी होला, जवन अलग-अलग श्रेणी आ ग्रेड के कभर करेला:

हरियर चाय (मुख्य ऐतिहासिक उत्पाद):

  • ल्यूलोंग बाईहाओ (六龙白毫) — सफ़ेद रोवेंदार हरियर चाय, कोमल रोवें से ढंकल; ताजा, कोमल रूपरेखा।
  • ल्यूलोंग युन्जियान (六龙云尖) — “बादल के नोक”; ढेर सघन मरोड़, चमकीला वनस्पति सुगंध।
  • ल्यूलोंग त्सुईपियान (六龙翠片) — “जेड के पंखुड़ी”; चपटा मरोड़ल हरियर चाय जेह में चेस्टनट के सुर बा।
  • चोंगहुआ यू या (中华玉芽) — “स्वर्ग के जेड कलिका”; विशिष्ट एकल-कलिका हरियर चाय।

लाल चाय (ब्रांड “यान्चि”, 岩赤):

  • जिन या होंगचा (金芽红茶, “सुनहरा कलिका”) — एकल-कलिका या “कलिका + एक पत्ता”; सबसे कोमल आ मीठ, ढेर सुनहरा रोवें के साथ।
  • जिन लो होंगचा (金螺红茶, “सुनहरा सर्पिल”) — सर्पिलाकार मरोड़, एक कलिका आ एक-दू गो पत्ता; मिठास आ गाढ़ापन के संतुलन।
  • चुआनतोंग सियाओचोंग होंगचा (传统小种红茶, “पारंपरिक सियाओचोंग”) — ढेर परिपक्व कच्चा माल, हल्का धुँआदारपन, श्रृंखला में सबसे “चरित्रवान” आ पूर्ण-शरीर।

डार्क चाय:

  • लाओ चांगचांग हेइचा (老厂长黑茶, “पुरान निदेशक के हेइचा”) — उत्तर-किण्वित चाय; अलग श्रृंखला जे लाल श्रेणी में ना आवेला।

हर श्रृंखला के भीतर गुणवत्ता स्तर तुड़ाई मानक (单芽, 一芽一叶, 一芽二叶), टिप्स के अनुपात, मरोड़ के एकरूपता आ तुड़ाई के मौसम के अनुसार अलग-अलग होला।

अंत में:

ल्यूलोंग होंगचा एगो अइसन लाल चाय ह जवना के नाँव ड्रैगन जइसन आ चरित्र पहाड़ी ह, जवन गुआंगशी आ गुइचो के सुरम्य संगम पर, सफ़ेद पैंट वाला याओ आ ताँबा के ढोल के इलाका में पैदा भइल ह। एकर पीठ पीछे आठ सौ साल के चाय उत्पादन के इतिहास आ एगो युवा, महत्वाकांक्षी ब्रांडिंग कार्यक्रम बा जे असली गुणवत्ता से समर्थित ह: शुद्ध मिठास, शहद-फल के गुलदस्ता आ उत्तर-पश्चिम गुआंगशी के पहाड़ी माटी से मिलल ऊ खास “चट्टानी” खनिज छटा।

ल्यूलोंग होंगचा दक्खिन-पश्चिम चीन के लाल चाय से परिचय खातिर एगो बढ़िया विकल्प ह: कीमत में सुलभ, सुगंधित, सबसे कोमल “सुनहरा कलिका” से ले के हल्का धुँआदार “पारंपरिक सियाओचोंग” तक के ग्रेड के दिलचस्प पटल के साथ। “यान्चि” श्रृंखला हर मूड खातिर चाय चुनावे के मौका देला — सुरुचिपूर्ण सुबह के “सुनहरा कलिका” से ले के शाम के आरामदायक धुँआदार “सियाओचोंग” तक। आ जे लोग हर प्याला में सिर्फ स्वाद ना, बल्कि इतिहास के भी महत्व देवेला, उनकर खातिर ल्यूलोंग एगो दुर्लभ मेल पेश करेला: प्राचीन चाय परंपरा आ स्वर्ग के सबसे रंगीन कोना में से एगो के जीवित जातीय-सांस्कृतिक विरासत।