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जिउहुआ फूचा
Jiǔhuá fúchá · 九华佛茶
जिउहुआ फूचा (九华佛茶, Jiǔhuá fúchá — "नव रंग के पहाड़ के बौद्ध चाय") — एगो ऐतिहासिक हरियर चाय ह, जवन पवित्र परबत जिउहुआशान (九华山) से आवेला — ई चीन के चारि गो बड़हन बौद्ध परबतन में से एक ह, जहाँ बोधिसत्त्व दीज़ांग (地藏菩萨, Dìzàng Púsà, संस्कृत: क्षितिगर्भ) के निवास मानल जाला। एह चाय के इतिहास कोरियाई भिक्षु ज़िन्दीज़ांग…
जिउहुआ फूचा (九华佛茶, Jiǔhuá fúchá — “नव रंग के पहाड़ के बौद्ध चाय”) — एगो ऐतिहासिक हरियर चाय ह, जवन पवित्र परबत जिउहुआशान (九华山) से आवेला — ई चीन के चारि गो बड़हन बौद्ध परबतन में से एक ह, जहाँ बोधिसत्त्व दीज़ांग (地藏菩萨, Dìzàng Púsà, संस्कृत: क्षितिगर्भ) के निवास मानल जाला। एह चाय के इतिहास कोरियाई भिक्षु ज़िन्दीज़ांग (金地藏, Jīn Dìzàng) से जुड़ल बा — जिनका के किम क्योगाक (金乔觉, Jīn Qiáojué) भी कहल जाला, जे सिल्ला राज्य के राजकुमार रहले — जे तांग बंस के काईयुआन काल (开元, 713–741) में कोरिया से चाय के बीया ले अइले आरू ओकरा के जिउहुआशान के ढाल पर रोप देहले। चाय के मूल नाँव “ज़िन्दीचा” (金地茶, “सोनहा धरती के चाय”) रहे। दक्खिनी सोंग काल में महान विद्वान झोऊ बीदी (周必大, Zhōu Bìdà) अपनी “नव रंग के परबत के बिबरन” (九华山录, Jiǔhuáshān Lù) में एह चाय के सबसे ऊँच दर्जा दिहले: “स्वाद में बेईयुआन से कम नइखे” (味敌北苑) — मतलब सोंग बंस के राजदरबार के समर्पित चाय के बराबरी।
1. बरगीकरन आरू उत्पत्ति:
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किसिम: हरियर चाय (बिना किणवन के)। दू गो रूप में बनल: चपटा (扁直形, biǎnzhí xíng — “बुद्ध के हाथ नियर चपटा-सीध”) आरू सर्पिल (卷曲形, juǎnqū xíng)। बनावे के तरीका — तलाइल आरू सुखाइल।
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श्रेणी: आन्हुई के ऐतिहासिक नामी चाय (安徽历史名茶)। पंजीकृत प्रमाणन चिह्न (证明商标, 2003)। प्रकार “हुआंगशीशी माओ फेंग” (黄石溪毛峰) के 1915 के पनामा-प्रशांत प्रदर्शनी में सोना के मेडल मिलल रहे।
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उत्पत्ति: चीन, आन्हुई प्रदेश (安徽, Ānhuī), चीझोऊ सहर (池州市, Chízhōu Shì), चिंगयांग जिला (青阳县, Qīngyáng Xiàn)। उत्पादन क्षेत्र — जिउहुआशान परबत आरू जिउहुआशान के पूरा परबत श्रेणी, जेह में चिंगयांग आरू शीताई (石台县) जिला के लगे के इलाका भी सामिल बा। टेरुआर के केन्द्र: शियामिन्युआन (下闵园), डागूलिंग (大古岭), हुआंगशीशी (黄石溪) आरू म्याओच्यान (庙前)। खास तौर प दू गो शैली के स्कूल उभरल बा: हुआंगशीशी माओ फेंग (黄石溪毛峰) — “चेस्टनट किसिम” (栗香型) आरू मिन्युआन माओ फेंग (闵园毛峰) — “ऑर्किड किसिम” (兰花香型)।
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भूगोलीय निर्देशांक: लगभग 30°29′ उत्तर अक्षांस, 117°48′ पूरब देशांतर।
2. इतिहास आरू सांस्कृतिक महत्व:
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इतिहास: जिउहुआशान पर चाय उपजाए के सुरुआत एगो किंबदंती पात्र — ज़िन्दीज़ांग (金地藏) से जुड़ल बा, जे सिल्ला राज्य (新罗, आधुनिक कोरिया) के राजकुमार किम क्योगाक (金乔觉, 696–794) रहले। कहानी के मोताबिक, तांग बंस के काईयुआन काल (开元, 713–741) में जवान किम क्योगाक बौद्ध धर्म पढ़े खातिर चीन आइले, जिउहुआशान परबत पर बस गइले आरू आपन साथे ले आइल चाय के बीया रोप देहले। “ज़िन्दीचा” (金地茶, “सोनहा धरती के चाय”) नाँव वाली ई चाय मठ के जिनगी के हिस्सा बन गइल।
सोंग बंस में जिउहुआशान के चाय साहित्यिक परसिद्धि पा गइल: विद्वान आरू प्रशासक झोऊ बीदी (周必大, 1126–1204) “नव रंग के परबत के बिबरन” (九华山录) में लिखले बाड़न कि इहाँ के चाय “स्वाद में बेईयुआन से कम नइखे” (味敌北苑, wèi dí Běiyuàn)। “बेईयुआन” (北苑) फूज्यान प्रदेश में सोंग बंस के राजदरबार खातिर बनल सबसे बढ़िया समर्पित चाय के बगइचा रहे। इ तुलना सबसे ऊँच तारीफ ह — माने जिउहुआशान के चाय राजदरबार के चाय के बराबरी में खड़ा बा।
मिंग आरू चिंग बंस में इ चाय पूरा देस में नाम कमा लेहलस। महान फार्माकोलॉजिस्ट ली शीझेन (李时珍, Lǐ Shízhēn, 1518–1593) “बेनचाओ गांगमू” (本草纲目, “औषधीय पदार्थन के संग्रह”) में लिखले बाड़न: “चीझोऊ के जिउहुआशान — चाय उपजावे वाला नामी इलाका” (池州之九华产茶有名)।
20वीं सदी में: 1915 में हुआंगशीशी माओ फेंग (黄石溪毛峰) के पनामा प्रदर्शनी में सोना के मेडल मिलल। 1983–1986 में ऐतिहासिक नाँव “दोंगयाई च्यूएशे” (东崖雀舌, “पूरबी चट्टान के चिरई के जीभ”) आरू “ज़िन्दीचा” (金地茶) के फेर से जियावल गइल। 2003 में प्रमाणन चिह्न “九华佛茶” पंजीकृत भइल, जे पूरा परबत के सब चायन के एकही नाँव में बान्ह दिहलस।
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नाँव:
- “जिउहुआ” (九华) — “नव रंग” (या “नव भब्यता”): परबत के काव्यात्मक नाँव ह, जे महान तांग कवि ली बो (李白, Lǐ Bái) देहले रहले, जब उ नव गो परबत चोटी के कमल के फूल नियर देख के प्रेरित भइले।
- “फू” (佛) — “बुद्ध”: इ बौद्ध उत्पत्ति आरू मठ के संस्कृति के इशारा करेला।
- “चा” (茶) — “चाय”।
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सांस्कृतिक महत्व: जिउहुआ फूचा — चीन के चारि बड़हन बौद्ध परबत (四大佛教名山) में से एक से अटूट रूप से जुड़ल चाय ह — जहाँ करोड़न आस्थावान लोग तीरथ करेला। बोधिसत्त्व दीज़ांग (क्षितिगर्भ) — पाताल लोक के संरक्षक आरू मृत लोगन के रखवार — जिउहुआशान परबत के “मालिक” मानल जाला, आरू एह परबत के चाय के खास आध्यात्मिक दर्जा हासिल बा। कोरियाई राजकुमार-भिक्षु किम क्योगाक के जिउहुआशान में चाय उपजावे के सुरुआत से जुड़ल कहानी कोरिया-चीन बौद्ध सांस्कृतिक आदान-प्रदान के अनोखा उदाहरण ह।
3. बनस्पति बिबरन आरू कच्चा माल:
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किसिम / कल्टीवार: स्थानीय मूल प्रजाति Camellia sinensis var. sinensis के झुंड — जिउहुआशान युआनशेंग च्युन्तीझोंग (九华山原生群体种) — “जिउहुआशान के मूल आबादी”। झाड़ ऊँच परबती जलवायु में ढल गइल बा; कली आरू नोकदार पत्ता गुदगुदा, ढेर रोआँ वाला (芽叶肥厚多毫) बा।
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तोड़ाई: सुरुआती बसन्त के। सबसे ऊँच दर्जा खातिर — एक ठो कली आरू एक ठो पत्ता जवन अभी-अभी खुले लागल बा (一芽一叶初展, ≥80%)। पहिला दर्जा खातिर — एक कली आरू एक पत्ता (60–80%)। दूसरा खातिर — एक कली आरू दू गो छोट पत्ता (60–80%)। तीसरा खातिर — एक कली आरू दू-तीन गो छोट पत्ता (40–60%)।
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कच्चा माल के जरूरत: कोमल, गुदगुदा, एक्के नियर नोकदार टहनी। ऊँच दर्जा खातिर — “जोड़ा पत्ता” (对夹叶, duìjiā yè — बिना कली के पत्ता) ना होखे के चाहीं। प्रसंस्करण — तोड़ाई के दिने।
4. टेरुआर आरू उपजावे के बिसेसता:
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पवित्र परबत: जिउहुआशान — दक्खिन आन्हुई में 1000 मीटर से ऊँच मुख्य चोटी वाला परबत समूह ह। जमीन के बनावट — खड़ा ढाल, गहिरा खड्ड, ढेर झरना-पोखर। नजारा — “परबती बौद्ध” टेरुआर के उत्कृष्ट उदाहरण।
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जलवायु: गरम आरू नम, ढेर बरखा आरू अकसर बादर। दिन-रात के तापमान में काफी अन्तर। कीड़ा-मकोड़ा आरू कारखाना प्रदूषण — लगभग ना के बराबर। चाय के बगइचा — असल में “प्राकृतिक जैविक” (天然有机)।
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माटी: ग्रेनाइट आरू स्लेट चट्टान (花岗岩或页岩风化母质) पर बनल। खट्टी, उपजाऊ, हवादार। घन जंगल (林木葱茏, “जंगल के हरियर मंडप”) आरू परबती फूल (杂花生树) एक ठो अनोखा पारिस्थितिकी तंत्र बनावेला।
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उपराई: चाय के बगइचा अलग-अलग ऊँचाई पर बा — 400 से 1000+ मीटर ले। सबसे बढ़िया गुन — हुआंगशीशी, डागूलिंग आरू मिन्युआन के ऊँच परबती बगइचा से।
5. उत्पादन तकनीक:
जिउहुआ फूचा के तकनीक में आठ गो चरण बा। खास बिसेसता — दू बेर मशीन से सीध करे के आकार देवल (理条机分二次理条) आरू एकरा बाद हाथ से “चिपटावल” (手工压扁)।
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तोड़ाई (鲜叶采摘 — xiānyè cǎizhāi): बसंत में हाथ से “एक कली — एक-दू गो पत्ता सुरुआती अवस्था में” मानक के अंकुर तोड़ल।
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फइलावल (摊青 — tān qīng): थोड़ा सूखावे खातिर छोटहन बिछावल।
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निस्थिरीकरण (杀青 — shāqīng): 150–160°C पर — हल्का-फुल्का भूनल, जेह से कोमलता आरू रोआँ बचल रहे।
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ठंडा करल (摊凉 — tānliáng): नमी के दोबारा बाँटल।
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आकार देवल (做形 — zuòxíng): मशीन से दू बेर सीध कइल (理条机分二次理条) + हाथ से “चिपटावल” (手工压扁)। एही चरण में चपटा रूप “बुद्ध के हाथ” (佛手状, fóshǒu zhuàng) के बिसेस आकृति पावेला।
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पहिला सुखाई (毛火 — máohuǒ): 120–130°C पर — जल्दी से पानी सुखावल।
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अंतिम सुखाई (足火 — zúhuǒ): 100–120°C पर — स्थाई अवस्था ले आवल। खुसबू निकालल (提香) — जबले अंकुर के डंठल मोड़े पर टूट ना जाए (茶条折梗即断)।
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बीनल आरू पैकिंग (拣剔→包装 — jiǎntī → bāozhuāng): आखरी में हाथ से छाँटल।
6. स्वाद-गंध के बिसेसता:
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सूखल पत्ता के रूप: चपटा रूप — सीधा, एक्के नियर चाय के टुकड़ा, “बुद्ध के हाथ” (扁直呈佛手状) नियर लउकेला। रंग — पन्ना हरियर हल्का पियराहूँ आभा लिए (翠绿带黄)। सर्पिल रूप — गाढ़ हरियर रंग के कसल घुमावदार (墨绿)।
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सूखल पत्ता के खुसबू: ऑर्किड के नोट (兰花香, lánhuā xiāng), फलदार (果香, guǒxiāng), चेस्टनट (栗香, lìxiāng)। दू गो शैलीगत दिसा: हुआंगशीशी — चेस्टनट किसिम (栗香型); मिन्युआन — ऑर्किड किसिम (兰花香型)।
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जोर के खुसबू: ऊँच आरू टिकाऊ (香高味醇)। पहिला बूंद में ऑर्किड-फलदार, बाद में चेस्टनट के नोट।
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स्वाद: ताजा आरू रसीला (鲜爽, xiānshuǎng), भरपूर आरू गाढ़ (醇厚, chúnhòu), साफ लउटत मिठास लिए (回甘, huígān)। पियले के बाद के स्वाद — लमहर, साफ।
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जोर के रंग: पन्ना हरियर, चमकीला आरू पारदर्शी (碧绿明亮)।
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चाय के तली: कोमल, एक्के नियर हरियर रंग के अंकुर।
7. रासायनिक संगठन:
ऊँच परबती उत्पत्ति, ग्रेनाइट माटी आरू पारिस्थितिक सफाई एह प्रोफाइल के तय करेला:
- पॉलीफेनॉल (कैटेचिन): मात्रा खासी। ई एंटीऑक्सीडेंट क्षमता देला।
- अमीनो एसिड (जेह में L-थियानाइन): बेसी मात्रा — परबत के बिखरल रोशनी आरू उपजाऊ माटी के परिणाम।
- अल्कलॉइड: कैफीन — माझिल मात्रा।
- विटामिन: विटामिन C, कैरोटीनॉइड।
- खनिज: पोटैशियम, मैग्नीशियम, जस्ता, मैंगनीज — ग्रेनाइट आरू स्लेट माटी से तय प्रोफाइल।
8. फायदेमंद गुन:
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तरोताजा करे के असर (提神): कैफीन आरू L-थियानाइन।
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ठंडा करे आरू बिस शुद्ध करे के काम (清热解毒): परम्परागत गुन।
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पाचन सुधार (消食): एंजाइम के उद्दीपन।
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पेशाब लावे के असर (利尿): थियोब्रोमाइन आरू थियोफिलिन।
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एंटीऑक्सीडेंट असर: कैटेचिन।
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धियान दीं: बतावल गुन आम जानकारी पर आधारित ह आरू चिकित्सीय सलाह ना ह।
9. बनावे के तरीका:
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पानी के तापमान: 80–85°C।
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चाय के मात्रा: 2 ग्राम प्रति 100 मिली पानी।
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बरतन: सफेद चीनी माटी के गाइवान या काँच के गिलास।
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प्रक्रिया:
- बरतन गरम करीं, पानी ढरका दीं।
- चाय डालीं।
- पहिला बूंद — 15 सेकेंड।
- बाद के बूंद — 10 सेकेंड बढ़ावत जाईं। चाय 4–5 बूंद ले टिकेला।
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टिप्पणी: बौद्ध परम्परा के अनुसार स्वाद तीन चरण में लेहल जाला: खुसबू नाक लगा के लेहीं (闻香 — ऑर्किड आरू फल), रंग देखीं (观色 — पन्ना चमक), छोट-छोट घूँट में स्वाद लेहीं (品味 — ताजगी आरू लउटत मिठास)।
10. रख-रखाव:
- हवाबंद डब्बा में, अन्हरिया आरू ठंढा जगह रखीं।
- सबसे बढ़िया — 0–5°C पर फ्रिज में।
- रखे के अवधि — 12 महीना ले।
- खोले के बाद — 1–2 महीना के भीतर इस्तेमाल कर लीं।
11. कीमत आरू नकली से बचाव:
जिउहुआ फूचा — पापुलर चाय ह जवन जिउहुआशान के तीरथ पर्यटन से जुड़ल बढ़त माँग के कारण ह। कीमत दर्जा, खास सूखम इलाका (हुआंगशीशी, मिन्युआन — बेसी कीमत) आरू तोड़ाई के समय पर निर्भर करेला।
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नकली से कइसे बचीं:
- प्रमाणन चिह्न “九华佛茶” वाला बिस्वसनी बिक्रेता से खरीदीं।
- दू गो शैली के पहिचान करीं: हुआंगशीशी (चेस्टनट किसिम) आरू मिन्युआन (ऑर्किड किसिम) — दुनु असली बा।
- आकार परखीं: चपटा वाला — “बुद्ध के हाथ” — सीधा आरू समतल; सर्पिल वाला — कसल आरू गाढ़ हरियर।
- खुसबू परखीं: ऑर्किड आरू/या चेस्टनट — खास नोट बा। दुनु के ना होखल — संदेह।
- उत्पत्ति पर धियान दीं: असली जिउहुआ फूचा — खाली जिउहुआशान क्षेत्र आरू लगे के इलाका से।
12. रोचक तथ्य:
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जिउहुआशान पर चाय उपजावे के संस्थापक — किम क्योगाक (金乔觉), कोरियाई सिल्ला राज के राजकुमार — चीन के चाय के इतिहास में सबसे अनोखा पात्रन में से एक ह। उ 8वीं सदी में बौद्ध धर्म पढ़े चीन आइले, जिउहुआशान पर 75 साल बितवलस, मरे के बाद बोधिसत्त्व दीज़ांग के अवतार मानल गइले आरू जिउहुआशान के चीन के चारि बड़हन बौद्ध परबतन में बदल दिहले। जवन चाय उ कोरिया से ले अइले आरू परबत पर रोप देहले — ऊ कोरिया-चीन सांस्कृतिक आदान-प्रदान के जिउत धरोहर ह।
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झोऊ बीदी के मूल्यांकन “味敌北苑” — “स्वाद में बेईयुआन से कम नइखे” — ई सोंग काल के सबसे ऊँच चाय पुरस्कार के बराबर ह। बेईयुआन (北苑) फूज्यान में राजदरबार के चाय बगइचा रहे, जे सोंग दरबार खातिर सबसे बढ़िया “गोंगचा” उपजावत रहे। जिउहुआशान के परबती चाय के राजदरबार के चाय के बराबरी में रखल — माने एकर निरपेक्ष उत्तमता के मंजूरी।
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ली शीझेन (李时珍, 1518–1593) — “बेनचाओ गांगमू” के लेखक, चीन के सबसे बड़हन औषधीय ग्रंथ — जिउहुआशान के “नामी चाय उपजावे वाला इलाका” के रूप में अलग से चिन्हित कइले बाड़न।
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दू गो शैली — हुआंगशीशी (चेस्टनट) आरू मिन्युआन (ऑर्किड) — एक्के कच्चा माल से एक्के परबत पर बनल बा, लेकिन खास ढाल के सूखम जलवायु आरू तकनीक के बारीकी में अन्तर बा। इ “एके परबत के भीतर” शैलीगत बिबिधता के दुलर्भ उदाहरण ह।
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जिउहुआशान के चाय बगइचा — असल में “प्राकृतिक जैविक”: कारखाना प्रदूषण, कीड़ा-मकोड़ा आरू कीटनाशक के जरूरत के पूरा अभाव। बौद्ध परबत चाय उपजावे खातिर आदर्श पारिस्थितिक दसा बना देले बा।
13. दोसर “बौद्ध” आरू आन्हुई के हरियर चायन से तुलना:
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जिंग शान चा (径山茶): झेजियांग से। इहो चान मठ के “बौद्ध चाय” ह, चाय अनुष्ठान के इतिहास से जुड़ल। जिंगशान — “जापानी चाय अनुष्ठान के जनमभूमि”; जिउहुआशान — “बोधिसत्त्व दीज़ांग के चाय”। शैली में: जिंगशान — बेसी घुमावदार आरू चेस्टनट-ऑर्किड; जिउहुआ — बेसी चपटा, “बुद्ध के हाथ” के रूप में।
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हुआंगशान माओ फेंग (黄山毛峰): दक्खिन आन्हुई के साथी। गरम करे-सुखावे के तरीका वाला “चिरई के जीभ” ऑर्किड खुसबू लिए। माओ फेंग — बेसी बाजारू सफल आरू “सुरुचिपूर्ण”; जिउहुआ — बेसी “आध्यात्मिक”, बौद्ध आभा वाला।
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योंगशी हुओ चिंग (涌溪火青): जिंगश्यान जिला से, इहो आन्हुई। खूबानी के जोर वाला मोती चाय। एकदम अलग शैली: हुओ चिंग — गोल दाना, 20 घंटा के सुखाई; जिउहुआ — चपटा “बुद्ध के हाथ”, मानक गरम सुखाई।
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एमेइशान झूयेचिंग (峨眉竹叶青): एमेइ परबत से — इहो बौद्ध तीरथ (बोधिसत्त्व पूस्यान)। दुनु — “बौद्ध परबती चाय”, लेकिन अलग-अलग प्रदेश आरू अलग शैली: झूयेचिंग — चपटा “बाँस के पत्ता”; जिउहुआ — चपटा “बुद्ध के हाथ”।
अंत में:
जिउहुआ फूचा — अइसन चाय ह जेह में बौद्ध पवित्रता, कोरिया-चीन के इतिहास आरू आन्हुई के कारीगरी नव रंग के परबत के ढाल पर एकरूप हो गइल बा। कोरियाई राजकुमार-भिक्षु, जे हजार साल से बेसी पहिले चाय के बीया ले अइले; सोंग बंस के विद्वान, जे परबती चाय के राजदरबार के चाय के बराबरी में रखले; “बुद्ध के हाथ” के आकृति के चपटा चायपत्ती, जे सबसे साफ पन्ना जोर में ऑर्किड-चेस्टनट के खुसबू खोलेला — ई सब जिउहुआ फूचा के चीन के सबसे आध्यात्मिक रूप से भरपूर चायन में से एक बनावेला। इ ध्यान आरू चिन्तन के चाय ह — उ लोग खातिर जे प्याला में खाली स्वाद ना, बलुक सन्नाटा भी खोजेला।