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गुलाओचा

Gǔláochá · 古劳茶

गुलाओचा (古劳茶, gǔláochá) — गुआंगडोंग क एक ऐतिहासिक नामी हरियर चाय ह, जेकर जनम सिझिआंग (西江, ‘पच्छिमी नदी’) के तीरे ज़ुजिआंग डेल्टा मे हेशान (鹤山市) सहर के गुलाओ कस्बा (古劳镇) मे भइल। एह चाय खातिर कहल जाला: ‘हेशान जिला अबहीं ना रहे — बाकिर गुलाओ के चाय पहिलहीं रहे’ (未有鹤山县,先有古劳茶) — कारण चाय इहाँ सुंग-युआन काल मे आइल आ हेशान…

गुलाओचा (古劳茶, gǔláochá) — गुआंगडोंग क एक ऐतिहासिक नामी हरियर चाय ह, जेकर जनम सिझिआंग (西江, ‘पच्छिमी नदी’) के तीरे ज़ुजिआंग डेल्टा मे हेशान (鹤山市) सहर के गुलाओ कस्बा (古劳镇) मे भइल। एह चाय खातिर कहल जाला: ‘हेशान जिला अबहीं ना रहे — बाकिर गुलाओ के चाय पहिलहीं रहे’ (未有鹤山县,先有古劳茶) — कारण चाय इहाँ सुंग-युआन काल मे आइल आ हेशान जिला त 1732 मे बनल। एकर सभसे ऊँच लाइन — ‘गुलाओ इनचेन’ (古劳银针, ‘गुलाओ के चाँदी के सुई’), जेकरा ‘चुइयान इनचेन’ (翠岩银针, ‘पन्ना-चट्टानी चाँदी के सुई’) भी कहल जाला — के तुलना क़िंग जिला के इतिहास मे उइशान के चाय से भइल: ‘गुलाओचा के सवाद उइशान बरोबर बा, बाकिर ओहमे सुगंध जोड़ल बा’ (古劳茶味匹武夷而带芳)। इ चाय अपन अनोखा ‘आगि-फूल के सुगंध’ (火花香, huǒhuā xiāng) खातिर मशहूर बा — जे 300°C+ पर अंतिम बहुते ऊँच तापमान के भुंजाई के परिणाम ह — आ चखैत के काव्यमय सूत्र: ‘पहिला भराई — आगि के ताप, / दूसर — शक्कर के सुगंध, / तीसर — आत्मा आराम में, / चउथी — सवाद अबहुँ निर्मल’ (头泡火气味,二泡糖香生,三泡神怡然,再泡味尚醇)। 2015 में एकरा पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के भौगोलिक संकेत उत्पाद के दर्जा मिलल।

1. वर्गीकरण आ उत्पत्ति:

  • प्रकार: हरियर चाय (绿茶, lǜchá), गैर-किण्वित। तली-भुंजल हरियर चाय (炒青绿茶, chǎoqīng lǜchá) के अंतर्गत आवेला जेकर खास बिसेसता बा 300°C से ढेर पर अंतिम अति-उच्च ताप भुंजाई (高火滚炒)। सभसे ऊँच लाइन ‘इनचेन’ सुई नियर आकार के होला; लाइन ‘गुलाओचा’ (劈蕊) पट्टी नियर होला।

  • श्रेणी: गुआंगडोंग के ऐतिहासिक नामी चाय (广东历史名茶)। पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के भौगोलिक संकेत संरक्षित उत्पाद (国家地理标志保护产品, 2015)। अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (非物质文化遗产) — उत्पादन तकनीक। हेशान के तीन गो मशहूर चाय में से एक (बाइशुइदाई चा आ माअर्शान चा के संगे)। लिंगनान चाय संस्कृति के प्रतिनिधि (岭南茶文化)।

  • उत्पत्ति: चीन, गुआंगडोंग प्रांत (广东省, Guǎngdōng Shěng), जिआंगमेन शहर (江门市, Jiāngmén Shì), शहरी क्षेत्र हेशान (鹤山市, Hèshān Shì), कस्बा गुलाओ (古劳镇, Gǔláo Zhèn)। चाय बगान कस्बा के उत्तर-पच्छिम ओर निचला पहाड़ी (200–500 मी) पर स्थित बा: लिशुइ (丽水), चाशान (茶山), माइशुइ (麦水), सिआलू (下陆)। पच्छिम में — दायुनू पहाड़ (大云雾山), दक्खिन में — गुडोउ पहाड़ (古兜山)।

  • भूगोलीय निर्देशांक: लगभग 22°46′ उत्तरी अक्षांश, 112°52′ पूर्वी देशांतर।

2. इतिहास आ सांस्कृतिक महत्त्व:

  • इतिहास: गुलाओचा — गुआंगडोंग के सभसे पुरान चाय में से एक बा, जेकर इतिहास 700+ बरिस पुरान बा (कुछ हिसाब से 1600 बरिस तक)।

    उत्पत्ति के कथा। कथा के मुताबिक, तांग कवि चाओ सुंग (曹松, Cáo Sōng, नउवीं सदी), जे सिचिआओशान पहाड़ (西樵山) पर रहत रहले, झेजिआंग से मशहूर चाय गुझु ज़िसुन (顾渚紫笋) के बीया ले अइलें आ पहाड़ पर रोप देले। सिचिआओशान से नदी पार बसल गुलाओ कस्बा एह परंपरा के आगे बढ़वलस आ सुंग-युआन काल (XIII–XIV सदी) तक इहाँ चाय किसानी मजबूती से जम गइल। दोसर कथा कहले: सुंग काल में फूजियान से एगो आदमी-औरत लिशुइ के शियान्तोउ (丽水石岩头) गाँव के एगो पाथर के गुफा में बस गइलें आ चाय उगावे लगले; मुआला के बाद उनकर पूजा ‘पाथर दादा आ पाथर दादी’ (石公石婆) के रूप में होखे लागल। बंसज सभ पहाड़ी ढाल के बसा दिहले, अउरी पहाड़ के नाँव ‘कुइगेन्शान’ (葵根山) से बदल के ‘चाशान’ (茶山, ‘चाय पहाड़’) कर दिहले।

    उत्कर्ष (क़िंग, XVIII–XIX सदी)। कांग्शी-योंगझेंग-च्यानलोंग (1662–1795) काल में पूरबी आ उत्तरी गुआंगडोंग से हक्का (客家) प्रवासी लोग हेशान के पहाड़ पर उमड़ि पड़ल आ चाय बगान तेजी से बढ़ि गइल। इतिहास ‘हेशान सिआन्झी’ (《鹤山县志》, 1827) में पूरा उत्कर्ष के तस्वीर दर्ज बा: ‘एकहू पहाड़ बिना चाय के ना रहे, चाय बाजार 60 से ढेर जगह’ (无山不产茶,茶市达60余处)। चाशान आ दायान्शान पहाड़ पर ‘जहाँ देखीं बस चाय के गाछ, तोड़इया लोग के आवाजाही बेरोकटोक’ (一望皆茶树,来往采茶者不绝)। दाओगुआंग (道光, 1820–1850) काल तक हेशान के चाय बगान क्षेत्र 80,000 म्यू (~5,300 हेक्टेयर) तक पहुँच गइल, सालाना उत्पादन 80,000 डान, निर्यात 30,000 डान। चाय कैंटन ‘हुआंगुआन’ (洋行) के जरिए यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया आ दक्खिन-पूरब एशिया बेचल जात रहे। हेशान के अनौपचारिक खिताब ‘गुआंगडोंग के पहिला चाय जिला’ (广东茶业第一县) मिलल — चरम पर प्रांतीय चाय निर्यात में एकर हिस्सा 80% तक पहुँच गइल।

    संकट आ लगभग बिलुप्ती। सिआन्फेंग-तोंगझी (1851–1874) काल में हेशान इलाका ‘होंगबिन विद्रोह’ (洪兵起义) आ अंतर-गोत्री टकराव (土客械斗) के मैदान बनि गइल जे 10 बरिस से बेसी चलल। चाय बगान या त जरा दिहल गइल या छूट गइल; क्षेत्र 80,000 से घट के 28,000 म्यू रहि गइल। पहिला बिस्व जुद्ध के बाद बिदेसी हुआचिआओ सभ तथाकथित ‘जिन्शान-झुआंग’ (金山庄, ‘सोना-पहाड़ी जोत’) में निवेश कइलें, जेकरा से निर्यात अस्थाई रूप से 55,000 डान/साल तक पहुँच गइल, बाकिर गुणवत्ता गिरि गइल। 1937 तक चाशान पर खाली 448 म्यू बचल, XXI सदी के सुरुआत में लगभग 100 म्यू रहि गइल। ‘गुलाओ के चाँदी के सुई’ लगभग गायब हो गइल: स्थानीय चाय उत्पादक के गवाही — ‘इनचेन ओह घरी बनेला जब चाय प्रेमी गहिरा पहाड़ में चढ़ि जाला, खुदे जंगली झाड़ी खोजेला, खुदे प्रसंस्करण करेला आ खुदे पियेला’।

    पुनरुद्धार (XXI सदी)। 2000 के दशक से हेशान प्रशासन चाय उद्योग के पुनरुद्धार कार्यक्रम चलवलस। 2015 में ‘गुलाओचा’ के भौगोलिक संकेत उत्पाद के दर्जा मिलल। ‘गुलाओ चाशान शेंगताई युआन’ (古劳茶山生态园) — 800 म्यू के इकोलॉजिकल चाय बगान 1 करोड़ युआन निवेश से बनल। नया किसिम (युन्नान दाये झोंग, जिन मुदान आदि) लगावल गइल बा, बाकिर ‘आगि-फूल के सुगंध’ के तकनीक कायम बा।

  • नाँव:

    • ‘गुलाओ’ (古劳) — कस्बा के नाँव। एगो मत के अनुसार, स्थाननाम कैंटोनी बोली के स्थानीय नाँव से आइल; दोसर मत के अनुसार, गु (古) गोत्र से जुड़ल बा।
    • ‘चा’ (茶) — चाय।
    • लाइन सभ के ऐतिहासिक नाँव: ‘चुइयान’ (翠岩, ‘पन्ना चट्टान’), ‘लोंग्या’ (龙芽, ‘ड्रैगन के कल्ली’), ‘सुएगू’ (雪谷, ‘बर्फीली घाटी’), ‘बाइलू’ (白露, ‘उज्जर ओस’), ‘इनचेन’ (银针, ‘चाँदी के सुई’)। उपनाँव — ‘हुओहुआ सिआंगचा’ (火花香茶, ‘आगि-फूल सुगंध वाली चाय’)।
  • सांस्कृतिक महत्त्व: गुलाओचा — गुआंगडोंग के हक्का (客家) चाय संस्कृति के प्रतीक बा। हक्का एक प्रवासी जात ह, जे अपना छूटल जमीन खातिर बेचैनी बोके घूमेला; आ गुलाओ के चाय, जइसन कि स्थानीय लोग कहेला, ‘हक्का लोग नियर उहे गहिरा आ दूरगामी मातृभूमि के तड़प से भरल बा।’ युआन जमाना के विद्वान येल्यू चुचाइ (耶律楚材, 1190–1244), चंगेज खान के नामी सलाहकार, लिंगनान चाय पर एगो चार पंक्ति के छंद लिखले: ‘कुलीन ब्यक्ति लिंगनान के चाय उपहार दिहलस, / चखलीं-उड़त फूल, बरफ से ढकल गाड़ी, / तीन कप जैतून टुकड़ा — कोमल अंकुर से बनल, / हरियर झंडा, एगो पत्ती — ताजा पिसल कल्ली से’ (高人惠我岭南茶,烂尝飞花雪没车,玉屑三瓯烹嫩蕊,青旗一叶碾新芽)। क़िंग जमाना में लोकगीत गावल जात: ‘बढ़िया से जिये के चाहत ह त लिशुइ मे बियाह कर’ (真好采,嫁丽水) — चाय गाँव के समृद्धि के इशारा।

3. बनस्पति बरनन आ कच्चा माल:

  • किसिम / कल्टीवार: पारंपरिक किसिम — स्थानीय आबादी Camellia sinensis var. sinensis, दू किसिम में बाँटल:

    • चिंगरुइ (青蕊, ‘हरियर कोर’) — प्रकार ‘हरियर कल्ली’ (青芽型)। एकर चाय के सुगंध ऊँच, शुद्ध होला। एही चिंगरुइ से ‘गुलाओ के चाँदी के सुई’ बनेला।
    • होंगरुइ (红蕊, ‘लाल कोर’) — प्रकार ‘लाल कल्ली’ (红芽型)। सुगंध कम; बड़ा पैमाना के लाइन खातिर इस्तेमाल होला। आधुनिक बगान में अउरी लगावल बा: युन्नान दाये झोंग (云南大叶种), जिन मुदान (金牡丹) आ अउरी बाहरी किसिम।
  • तुड़ाई: मौसम के हिसाब से सख्त बँटवारा:

    • चुइयान (翠岩, ‘पन्ना चट्टान’) / लोंग्या (龙芽) — सभसे पहिले तुड़ाई: ‘शे’ तिहवार (社前, ~बसंत बिसुव) से पहिले। सभसे ऊँच गुणवत्ता।
    • सुएगू (雪谷, ‘बर्फीली घाटी’), या ‘सुएगू या’ (雪谷芽) — ‘इनचेन’ के सभसे ऊँच ग्रेड, तुड़ाई चुन्फेन (春分, ~21 मार्च) के आसपास। मानक: एगो कल्ली जवने से पत्ता हालहीं खुले सुरू होखे, लंबाई 1.5–2.0 सेमी, कल्ली पीयर-हरियर, रोम ढेर।
    • हेइरुइ (黑蕊, ‘करियाहूँ कोर’), या ‘दोउची ली’ (豆豉粒, ‘दोउची के दाना’) — ‘इनचेन’ के साधारण ग्रेड, तुड़ाई चिंगमिंग के आसपास। मानक: एगो कल्ली दू गो पत्ती।
    • पिरुइ (劈蕊, ‘फटल कोर’) — बड़ा पैमाना के ‘गुलाओचा’। मानक: एगो कल्ली दू-तीन गो पत्ती।
    • बाइलू (白露) — पतझड़ तुड़ाई बाइलू (~8 सितंबर) के आसपास। बाकी सब महीना — ‘इनचेन’।

4. टेरवार आ उगावे के बिसेसता:

  • जलवायु: उपोष्णकटिबंधीय मानसूनी, सिझिआंग के नजदीकी से संशोधित। सालाना औसत तापमान — 21.8°C। पालामुक्त समय — लगभग साल भर। सालाना बारिस — ~1800 मिमी। सिझिआंग के सतह से उठल भाप लगातार धुंध आ ढेर उमस (80%+) बनावेला, जे निचला पहाड़ी (200–500 मी) पर ‘निचाई में ऊँच पहाड़ी जलवायु’ (丘陵上的高山气候环境) के परभाव पैदा करेला।

  • उगावे के ऊँचाई: 200–500 मी। सभसे ऊँच जगह — ‘गाओआओदिंग’ (高凹顶), ~500 मी। निरपेक्ष मान में निचाई बा, बाकिर लगातार धुंध आ नदी के भाप ऊँचाई के कमी पूरा करेला।

  • माटी: अम्लीय पीयर माटी (酸性黄壤), गहिर आ उपजाऊ, कार्बनिक पदार्थ आ खनिज से भरपूर। शियान्तोउ (石岩头) के माटी खास किमती बा — पथरीली (石岩), जे चाय के तथाकथित ‘यान्युन’ (岩韵, ‘चट्टानी धुन’) — खनिजी अंडरटोन देवेला, जेकर तुलना उइशान उलोंग से कइल जा सकेला।

  • बगान के बिसेसता: पारंपरिक छतिया खेती — चाय के लाइन के बीच ‘इंशू’ (楹树, फलीदार) गाछ लगल रहेला, जेकरा से बिखरल छाँह बनेला। माटी घास से ढँकल रहेला (草覆保湿) जे उमस बनवले रहेला।

5. उत्पादन तकनीक:

गुलाओचा शास्त्रीय तली-भुंजल तकनीक से बनेला आ एकर अंतिम चरण अद्वितीय बा — ‘ऊँच-आगि बेलन-भुंजाई’ (高火滚炒, gāohuǒ gǔnchǎo) 300°C+ पर, जेकरा से बिसेस ‘आगि-फूल के सुगंध’ (火花香) बनेला।

  • फइलावल (摊青 — tān qīng): 4–6 घंटा। हाल्का सुखाई।

  • ‘हरियरियाहट मारल’ (杀青 — shāqīng): 180–200°C पर कढ़ाई में ‘उछाल भुंजाई’ (扬炒, yáng chǎo) तरीका से भुंजल। एंजाइम जल्दी बेकाम हो जाला।

  • मरोड़ल (搓揉 — cuōróu): हल्का हाथ से पट्टी के रूप में मरोड़ल।

  • ‘सिआओचाओ’ — गरम रूप निर्धारण (烚炒 — xiā chǎo): ~60°C पर भुंजाई, रूप पक्का करे खातिर। दुबारा मरोड़-रूपवाई (二次揉捻塑形)।

  • सुखाई (焙干 — bèi gān): धीमी-धीम मद्धिम आगि (文火) पर सुखाई जब तक उमस <5% ना हो जाय।

  • ऊँच-आगि बेलन-भुंजाई (高火滚炒): अंतिम निर्णायक चरण जे गुलाओचा के ‘आगि-फूल’ पहचान तय करेला। चाय के तपत बेलनाकार बरतन में 300°C आ ओकरा से ढेर तापमान पर डाल के जल्दी-जल्दी बेलल जाला जब तक बिसेस कारमेल-कड़कड़-फूल के सुगंध ना आ जाय। तइयारी के कसौटी: ‘पत्ता अंगुरी से रगड़े पर चूर्ण बनि जाय’ — ठीक ओही तरह जइसन प्राचीन ग्रंथ ‘तोंगजुन लू’ (《桐君录》) में लिखल बा: ‘[चाय] के लेके चूरा बना के पीये खातिर’ (取为屑茶饮)। पूरा प्रक्रिया हाथ से होला आ 1 जिन तइयार चाय बनावे में ~5 घंटा लागेला।

  • ‘तीन सुखाई — तीन गरमाई’ विधि (三烘三提): सुगंध के अधिकतम स्थायित्व खातिर सुखाई आ ‘सुगंध उठाई’ के तिबारा चक्र। ठंढा कप में सुगंध 30 मिनट से ढेर बनल रहेला।

6. संवेदी बिसेसता:

  • सूखल पत्ता के रूप-रंग: लाइन के हिसाब से। इनचेन (雀舌茶): सीधा, ठोस ‘सुई’, चाँदी-स्लेटी रंग में ढेर रोम। दोउची ली: गोल-गोल, काँटिया नियर दाना, गहिर हरियर में हल्का रोम। पिरुइ: ठोस पट्टी, रंग हरियर-भूरा।

  • सूखल पत्ता के सुगंध: ‘आगि-फूल’ (火花香) — कारमेल मिठास, ऑर्किड फूल के सुर आ चेस्टनट के गरमाहट के अनोखा मेल। ठंढा कप में सुगंध 30 मिनट से ढेर टिकेला।

  • रस के सुगंध: ऊँच, शुद्ध, स्थाई। ‘पहिला भराई — आगि के गरमी, दूसर — शक्कर के सुगंध, तीसर — आत्मा आराम में, चउथी — सवाद अबहुँ निर्मल’ (头泡火气味,二泡糖香生,三泡神怡然,再泡味尚醇)।

  • सवाद: कोमल, मीठ, बिना तीखा कड़वाहट (醇和回甘)। शरीर मझोला। मिठाई के लउटान लमहर आ बढ़त। बेहतरीन बैच में — खनिजी ‘चट्टानी’ अंडरटोन (岩韵), उइशान उलोंग के याद दियावे — शियान्तोउ के पथरीली माटी के निशानी।

  • रस के रंग: हरियर, चटक आ पारदर्शी (绿而明亮) — ‘इनचेन’ खातिर।

  • चाय तली: कोमल-हरियर, साबुत, एक समान।

7. रासायनिक संघटन:

  • पॉलीफेनोल: 25–30%. एंटीऑक्सीडेंट क्षमता देवेला।
  • एमिनो एसिड: 6–9% — असाधारण ऊँच, एकरे चलते शहद मिठास आ सवाद के ‘रसियापन’।
  • कैफीन: संतुलित मात्रा।
  • विटामिन: विटामिन सी, बी ग्रुप के विटामिन।
  • खनिज: K, Mg, Zn, Mn। शियान्तोउ के माटी पथरीली सबस्ट्रेट से सूक्ष्म तत्व से भरपूर बा।

8. फायदेमंद गुन:

  • एंटीऑक्सीडेंट परभाव: पॉलीफेनोल 25–30%।
  • टॉनिक प्रभाव: कैफीन + L-थियानाइन — हल्की-फुल्की ताजगी।
  • ताजगी आ गरमी कम करे के गुन: गुआंगडोंग के गरम आ उमस भरल जलवायु में बिसेस किमती।
  • पाचन में सहायक: परंपरा से गुलाओचा चिकनाइल कैंटोनी भोजन के बाद पाचन सुधारे खातिर पियल जाला।
  • हृदय-रक्तवहन तंत्र खातिर: पॉलीफेनोल लिपिड चयापचय सामान्य करे में मदद करेला।

9. बनावे के तरीका:

  • पानी के तापमान: 80–85°C। सभसे ऊँच ग्रेड ‘इनचेन’ खातिर — 85°C (जेकरा से ‘आगि-फूल’ सुगंध खुले प बेसी कड़वाहट ना होखे)।
  • चाय के मात्रा: 3 ग्राम 150 मिली पर।
  • बर्तन: काँच के गिलास (‘चाँदी सुई’ देखे खातिर) या चीनी मट्टी के गाइवान।
  • प्रक्रिया:
    1. बर्तन गरम करीं।
    2. चाय डारीं।
    3. पानी के 1/3 मात्रा ‘धोआई’ (润茶, 30 सेकंड) खातिर डारीं, छानि लीं।
    4. पानी 7/10 मात्रा तक भरीं। 1–2 मिनट खड़ा रहे दीं।
    5. ऊँच दर्जा 3 भराई सहेला, हर भराई में +10 सेकंड।
    6. सुगंध के ‘चार अवस्था’ पर गौर करीं: आगि → शक्कर → आराम → शुद्धता।

10. भंडारण:

  • वायुरोधी पैकिंग, रोशनी, उमस आ गंध से बचावल।
  • सबसे बेहतर — फ्रिज में 0–5°C पर।
  • खोले के बाद — अधिकतम ताजगी खातिर 1 महीना भीतर इस्तेमाल।
  • 60°C पर रस सभसे ढेर ताजगी (鲜爽) दिखावेला।

11. कीमत आ नकली:

  • कीमत के स्तर: गुआंगडोंग के हरियर चाय के ऊपरी हिस्सा। लिशुइ के सभसे ऊँच ग्रेड ‘चुइयान इनचेन’ (翠岩银针, ‘पन्ना-चट्टानी चाँदी के सुई’) — 880 युआन प्रति 50 ग्राम (.) से। पहिला दर्जा ‘दोउची ली’ — ~260 युआन प्रति 100 ग्राम। बड़ा पैमाना के ‘पिरुइ’ — किफायती।
  • नकली से कइसे बचीं:
    • ‘गुलाओ चाशान शेंगताई युआन’ (古劳茶山生态园) या अधिकृत बिक्रेता से खरीदीं।
    • भौगोलिक संकेत चिह्न के जाँच करीं।
    • असली ‘इनचेन’ — चाँदी-स्लेटी, ढेर रोम वाला, सीधा सुई नियर। नकली अक्सर धुँधला आ टेढ़-मेढ़ होला।
    • मुख्य कसौटी: ‘आगि-फूल’ सुगंध — कारमेल-ऑर्किडीय, टिकाऊ। एकर नकल कृत्रिम सुगंध से ना हो सके।

12. रोचक तथ्य:

  • ‘जिला ना रहे — चाय रहे’। लोकोक्ति ‘未有鹤山县,先有古劳茶’ एगो इतिहासी विरोधाभास दर्ज करेला: गुलाओ के चाय 1732 (योंगझेंग दसवाँ) में हेशान जिला बने से बहुत पहिले मौजूद रहे। ओकरा पहिले गुलाओ सिन्हुइ (新会) जिला के हिस्सा रहे।

  • येल्यू चुचाइ आ लिंगनान चाय। चंगेज खान के महान सलाहकार, मंगोल विद्वान येल्यू चुचाइ (耶律楚材, 1190–1244) लिंगनान चाय पर चार पंक्ति के छंद लिखले — गुआंगडोंग चाय के सभसे प्राचीन काव्यमय साक्ष्य में से एक।

  • क़िंग इतिहास बनाम उइशान। ‘हेशान सिआन्झी’ (乾隆版《鹤山县志》) में दर्ज बा: ‘古劳茶味匹武夷而带芳’ — ‘गुलाओचा के सवाद उइशान बरोबर बा, बाकिर ओहमे सुगंध जोड़ल बा’ — एगो अनोखा मामिला जब प्रादेसिक इतिहास स्थानीय हरियर चाय के पौराणिक उइशान उलोंग के बराबरी पर राख दिहलस।

  • 300°C आ ‘तोंगजुन लू’। 300°C+ पर अंतिम भुंजाई — तापमान जेह पर चाय सचमुच ‘रगड़े पर चूर्ण बनि जाला’। ई तकनीक प्राचीन ग्रंथ ‘तोंगजुन लू’ (《桐君录》, III–V सदी) से आइल: ‘取为屑茶饮’ — ‘[चाय] के लेके चूरा बना के पिये खातिर’।

  • गुआंगडोंग के 80% निर्यात। उत्कर्ष के शिखर (1820–1850) में हेशान प्रदेश गुआंगडोंग के कुल चाय निर्यात के 80% तक उत्पादन करत रहे — एगो जिला खातिर अभूतपूर्व एकाग्रता। चाय कैंटन ‘हुआंगुआन’ (洋行) से यूरोप, अमेरिका आ ऑस्ट्रेलिया बिकात रहे।

  • लगभग बिलुप्त चाय। XXI सदी के सुरुआत में चाशान — गुलाओचा के ऐतिहासिक ‘जनमभूमि’ — पर चाय बगान खाली ~100 म्यू बचल बा (शिखर पर 80,000 म्यू)। पुरान गाछ चिंगरुइ किसिम के असली ‘इनचेन’ व्यावसायिक रूप से लगभग ना बनेला: ‘चाय प्रेमी गहिरा पहाड़ में चढ़ि जाला, जंगली झाड़ी खोजेला, खुदे बनावेला आ खुदे पियेला’ — स्थानीय चाय उत्पादक लाओ जिनमिंग (劳锦明) के गवाही, जे दसक से चाशान पर काम करत बाड़े।

13. गुआंगडोंग के दोसर हरियर चाय से तुलना:

  • मातु ल्यू चा (马图绿茶): इहू गुआंगडोंग के, पहाड़ी। गुलाओचा — अनोखा ‘भाप-सुखाई’ तरीका, बेसी ‘प्राचीन’।

  • इंदे ल्यू चा (英德绿茶): इंदे। बड़का-पत्ता, var. assamica। गुलाओचा — छोटका-पत्ता, var. sinensis, एकदम अलग प्रोफाइल।

  • कानहे चा (康禾茶): इहू गुआंगडोंग के, ऐतिहासिक चाय। दुनो — दुर्लभ गुआंगडोंगी हरियर, बाकिर अलग-अलग जिला आ टेरवार।

13. गुआंगडोंग के दोसर चाय से तुलना:

  • मातु ल्यू चा (马图绿茶): इहू गुआंगडोंग से, ऊँच पहाड़ी। गुलाओचा — निचाई (22 मी), 300°C पर अति-उच्च ताप भुंजाई वाला।

  • इंदे ल्यू चा (英德绿茶): गुआंगडोंग। बड़का-पत्ता (var. assamica)। गुलाओचा — छोटका-पत्ता (var. sinensis), बाकिर ‘आगि’ तकनीक के साथ, जे उलोंग के करीब बा।

  • कानहे चा (康禾茶): गुआंगडोंग। हक्का ‘ऊँच-आगि’ चाय। ‘आगि’ के समान दर्शन, बाकिर गुलाओचा अउरी चरम (300°C बनाम कानहे में ~200°C)।

आखिरी बात:

गुलाओचा — एगो अइसन चाय जेकर भाग्य कवनो उपन्यास लायक बा: सुंग काल के उत्कर्ष से लेके 80,000 म्यू क़िंग बगान आ यूरोप निर्यात — फिर XX सदी के लगभग पूरा बिलुप्ती आ XXI सदी के डरपोक पुनरुद्धार। एकर ‘आगि-फूल के सुगंध’ — 300°C पर अति-उच्च ताप भुंजाई के परिणाम — चीनी हरियर चाय में कहीं बेजोड़ बा आ ई ओकरा भुंजल उलोंग से ढेर जोड़ेला। सूत्र ‘पहिला भराई — आगि, दूसर — शक्कर, तीसर — आराम, चउथी — शुद्धता’ — ई बिपनन ना ह, बलुक एगो सटीक संवेदी नक्शा ह, जे सदियन से परखल गइल बा। चाय उ लोग खातिर, जे कप में खाली सवाद ना, बलुक इतिहास भी कदर करेला — कड़ुआ, जइसन गुलाओचा के पहिला घूँट, आ मीठ, जइसन एकर बाद के सवाद।