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एमेइ शुए या
Éméi xuě yá · 峨眉雪芽
एमेइ शुए या (峨眉雪芽, Éméi xuě yá) एगो प्राचीन हरित चाय बा जे पवित्र एमेइ पर्वत से आवेला, जवन चीन के चार गो महान बौद्ध पर्वतन में से एक बा आ यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल बा। एकर नाँव प्रकृति से उपजल बा: हर बसंत में, जब सिचुआन के मैदानन में खेत हरियर हो जालें, एमेइशान के पहाड़ी चाय बगइचन में बरफ अबहियो पड़ल रहेला – आ ओकरा…
एमेइ शुए या (峨眉雪芽, Éméi xuě yá) एगो प्राचीन हरित चाय बा जे पवित्र एमेइ पर्वत से आवेला, जवन चीन के चार गो महान बौद्ध पर्वतन में से एक बा आ यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल बा। एकर नाँव प्रकृति से उपजल बा: हर बसंत में, जब सिचुआन के मैदानन में खेत हरियर हो जालें, एमेइशान के पहाड़ी चाय बगइचन में बरफ अबहियो पड़ल रहेला – आ ओकरा के फोर के सबसे कोमल कलियाँ निकलेलीं, “बरफ के अंकुर” (雪芽, xuě yá)। बौद्ध आ ताओवादी मठन के साधू लोग पिघलत बरफ पर चलत ए चाय के डेढ़ हजार बरिस से बटोरत आवत बा।
1. वर्गीकरण एवं उत्पत्ति:
- प्रकार: हरित चाय (अकिण्वित)। प्रसंस्करण – चाओकिंग (炒青, chǎoqīng, कड़ाही में भुनल) जेकरा बाद ऊँच तापमान पर सुगंध खोले के अंतिम प्रक्रिया (提香, tíxiāng) कइल जाला।
- श्रेणी: चीन के एगो ऐतिहासिक प्रसिद्ध चाय, तांग आ सोंग राजवंश (唐宋十大名茶) के “दस प्रसिद्ध चाय” में शामिल। चीन के “प्रसिद्ध माल चिह्न” (中国驰名商标, 2012)। “सिचुआन के दस प्रसिद्ध चाय” (四川十大名茶) में से एक।
- उत्पत्ति: चीन, सिचुआन प्रांत (四川, Sìchuān), लेशान शहर (乐山, Lèshān), एमेइशान पर्वत (峨眉山, Éméishān)। उत्पादन के मुख्य क्षेत्र – यूनेस्को के विश्व प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर स्थल के 154 वर्ग किमी के संरक्षित क्षेत्र के भीतर: चिचेंगफेंग (赤城峰), बाईयानफेंग (白岩峰), युन्युफेंग (玉女峰), तियानचीफेंग (天池峰), जिंगयुएफेंग (竞月峰) चोटी, आ वाननियानसी मठ (万年寺) के क्षेत्र।
- भूगोलीय निर्देशांक: लगभग 29°32′–29°36′ उत्तर अक्षांश, 103°20′–103°26′ पूर्व देशांतर। मुख्य चोटी – वानफोडिंग (万佛顶, 3099 मीटर)। चाय बगइचा – 800-1500 मीटर के ऊँचाई पर।
2. इतिहास आ सांस्कृतिक महत्व:
इतिहास. एमेइशान के चाय के इतिहास 3000 बरिस से बेसी पुरान बा – इहाँ 1000 बरिस से बेसी पुरान जंगली प्राचीन चाय के पेड़ पावल जालें। जिन राजवंश (晋, 265-420) के इतिहासकार चांग क्यू (常璩, Cháng Qú) “हुआयांग गुओ ज़ी” (华阳国志) में लिखले रहलें कि “नानआन (आज के लेशान) आ वुयान प्रसिद्ध चाय उपजावेलें… दक्खिन ओर एमेइ पर्वत बा”। सुई-तांग काल (隋唐, छठवीं-सातवीं सदी के अंत) में एमेइशान के बौद्ध साधू (चाशेंग, 茶僧, “चाय के साधू”) ए चाय के “एमेइ शुए मिंग” (峨眉雪茗, “एमेइ के बरफीला चाय भेंट”) नाम देहले।
तांग राजवंश (唐) में, श्यानचिंग (显庆, 656-661) के शासनकाल में, एमेइ शुए या के आधिकारिक रूप से गोंगचा (贡茶, राजदरबार में भेंट) के सूची में शामिल कइल गइल। विद्वान ली शान (李善, Lǐ Shàn) “झाओमिंग वेनश्युआन” (昭明文选注) के टिप्पणी में लिखले: “एमेइ पर्वत पर बहुत सारी औषधीय जड़ी-बूटी बा, लेकिन चाय खास तौर पर बढ़िया बा – पूरा चीन में बेजोड़। हेइशुईसी मठ (黑水寺) के लगे खड़ी चट्टानन पर चाय रोपल जाला; एकर स्वाद सुंदर बा, आ लगातार दू साल तक सफेद फुआर वाला कोंपल आ तीसरा साल हरियर कोंपल निकलेला, एही तरह हमेशा बदलत रहेला”। चाय के ज्ञानी लू यू (陆羽, Lù Yǔ) आपन “चा जिंग” (茶经, “चाय के ग्रंथ”) में एमेइ के चाय के शामिल कइलें। तांग काल के कवि-साधू जिया दाओ (贾岛, Jiǎ Dǎo) एकर गुणगान एह पंक्ति से कइलें: “या शिन चोउ शुए मिंग” (芽新抽雪茗 – “नवका कोंपल टूटत बाड़ी – बरफीला चाय”)।
ए चाय के आज के नाँव महान कवि लू यू (陆游, Lù Yóu, 1125-1210) से मिलल। 1170 में लू यू के जियाझोऊ (आज के लेशान) में पद मिलल, झोंगफेंगसी (中峰寺) के मठाधीश बिएफेंग (别峰) से मित्रता कइलें आ ओ स्थानीय चाय से प्रेम करे लगलें। 1181 में, चोंगझोऊ स्थानांतरण के पहिले विदा लेत घरी, लू यू के अपना साधू मित्र से एगो टोकरी ताजा बनल चाय मिलल, आ गद्गद हो के लिखलें: “शुए या जिन ज़ी एमेइ दे, बू जियान होंग नांग गुझू चुन” (雪芽近自峨眉得,不减红囊顾渚春 – “बरफ के कोंपल – एमेइ से अभी-अभी पावल, लाल झोला में बंद गुझू के बसंत से कम नइखे”)। एही पंक्ति से “एमेइ शुए या” नाँव हमेशा खातिर मिल गइल।
सोंग काल के साहित्यकार सू दोंपो (苏东坡, Sū Dōngpō) भी एमेइ चाय के समर्पित प्रशंसक रहलें। मिंग राजवंश (明) में सम्राट होंगवु (洪武, Zhū Yuánzhāng) आ वानली (万历) एमेइशान के मठन के चाय बगइचा भेंट कइले आ आदेश देहले कि “चानचा (禅茶, ‘ध्यान चाय’) उपजावल जाव आ गोंगचा बनावल जाव”। भेंट के परंपरा चिंग (清) राजवंश के अंत तक जारी रहल।
2012 में “एमेइ शुए या” के “चीन के प्रसिद्ध माल चिह्न” (中国驰名商标) के दर्जा मिलल। ओही साल, नउवाँ अंतर्राष्ट्रीय विश्व चाय संघ प्रतियोगिता में ए चाय दू बेर “सर्वश्रेष्ठ चाय खातिर विश्व पुरस्कार” (世界佳茗大奖) जितलस। 2013 में चेंगडू में फॉर्च्यून ग्लोबल फोरम के रात्रिभोज खातिर एमेइ शुए या के आधिकारिक चाय के रूप में चुनल गइल।
नाँव। एमेइ (峨眉) – “सुंदर भौंह” – पर्वत के काव्यात्मक नाँव, जवना के मेड़ के आकृति औरत के भौंह के मोड़ जइसन लागेला। शुए (雪) – “बरफ”। या (芽) – “कली, अंकुर”। पूरा अरथ: “सुंदर भौंह पर्वत के बरफीला अंकुर” – एगो छवि जवन पिघलत बरफ के बीच से पहिला बसंती कोंपल चुनले के रिवाज से पैदा भइल।
सांस्कृतिक महत्व। एमेइ शुए या पर्वत के आध्यात्मिक जीवन से अलग नइखे। एमेइशान के बौद्ध मठ डेढ़ हजार साल से “नोंग चान” (农禅, nóngchán – “खेती के ध्यान”) के हिस्सा के रूप में चाय बगइचा के खेती करत आइल बा। हर साल मार्च में साधू “गोंगफो फाहुई” (供佛法会, “बुद्ध के चाय अर्पित करे के समारोह”) करत रहले: सबसे नीक चाय, रेशमी थैली में बंद, दरबार भेजे से पहिले वेदी पर चढ़ावल जात रहे। चुनइया लोग के बौद्ध गाथा: “यू शोउ शियानशियान, चान शिन जिंगजिंग, कियानचेंग सोंग सोंग, चाई गोंग फो कियान” (玉手纤纤,禅心净净,虔诚颂诵,采供佛前 – “कोमल मणि हाथ, शुद्ध ध्यान मन, श्रद्धामय प्रार्थना के साथ – बुद्ध के समक्ष भेंट चुनत बानी जा”)।
3. वानस्पतिक विवरण एवं कच्चा माल:
- प्रजाति: Camellia sinensis var. sinensis.
- किस्म/खेती: स्थानीय स्थानिक किस्म – “ज्यूहुआ चाशू” (菊花茶树, júhuā cháshù – “गुलदाउदी चाय के पेड़”), जवन ऊँच पहाड़ी जलवायु के अनुकूल बा। कोंपल कोमल, बहुतायत सफेद फुआर वाला, अधिक पाला सहनशीलता आ साधारण हरित चाय के तुलना में पॉलीफेनॉल आ अमीनो एसिड के बेसी मात्रा वाला होला।
- तुड़ाई: बसंत, कड़ाई से चिंगमिंग (清明, ~5 अप्रैल) के आसपास ± 20 दिन। तुड़ाई सचमुच बरफ के नीचे से होला – ऊँच पहाड़ी बगइचन (1000 मीटर से ऊपर) में ए समय बिना पिघलल बरफ के चादर पड़ल रहेला। तुड़ाई के तरीका बेहद नाजुक होला: “चुटकी बजावे के तरीका” (弹指法, tánzhǐ fǎ), “हलुका उठावे के तरीका” (轻提法, qīngtí fǎ), “तोड़ के अलग करे के तरीका” (掰式法, bāishì fǎ) – कली आ डंठल के पूर्णता बचावे खातिर मोटा चुटकी आ तेजी से तोड़ल सख्त मना बा।
- तुड़ाई के मानक: अकेली कली (独芽, dúyá) – सबसे ऊँच श्रेणी “चानशिन” (禅心, “ध्यान के हृदय”) खातिर; एगो कली आ एगो पतई (一芽一叶) – श्रेणी “रुईशिन” (睿心) खातिर; एगो कली आ दू गो पतई (一芽二叶) – श्रेणी “हुईशिन” (慧欣) खातिर।
- कच्चा माल खातिर जरूरत: पूरा, बेजोड़ अंकुर। ओस के पूरा तरह सूखला के बादे तुड़ाई मान्य, बरसात में तुड़ाई वर्जित। बरतन – बाँस के टोकरी, पातर परत।
4. टेरोइर (क्षेत्रीय वातावरण) एवं उगाही के विशेषता:
- भूभाग: एमेइशान पर्वत – सिचुआन बेसिन से चिंगहाई-तिब्बत पठार के संक्रमण के हिस्सा हवे। खड़ा ढाल, गहिरा घाटी, प्राचीन जंगल के बीच सीढ़ीनुमा चाय बगइचा।
- उगाही के ऊँचाई: समुद्र तल से 800-1500 मीटर। मुख्य क्षेत्र – चिचेंग (赤城), बाईयान (白岩), युन्यू (玉女), तियानची (天池), जिंगयुए (竞月) चोटी आ वाननियानसी मठ के आसपास।
- जलवायु: एमेइशान “हुआशी युपिंग” (华西雨屏, “पश्चिमी चीन के बरसाती पर्दा”) नामक अनोखा सूक्ष्म जलवायु घटना के क्षेत्र में स्थित बा, जहाँ 154 वर्ग किमी के संरक्षित क्षेत्र में तीन गो प्राकृतिक “विधा” बदलत रहेली: कोहरा आ पाला (雾凇, wùsōng, ~140 दिन/साल), बरफीला बरखा (雨凇, yǔsōng, ~130 दिन/साल) आ बरफीला साफ आसमान (雪霁, xuějì, ~130 दिन/साल)। दैनिक तापमान के अंतर: ऊँच पहाड़ी बगइचन में 16-18 °C, मध्यम पहाड़ी बगइचन में 12 °C। ई अंतर अमीनो एसिड के टूट के धीमा कर देला आ पतई के सुगंधित पदार्थन से समृद्ध कर देला।
- माटी: गहिर, भुरभुर, जीवांश से भरपूर पहाड़ी-जंगली माटी (腐殖质, fǔzhízhì – “ह्यूमस परत”)। अम्लीय प्रतिक्रिया (pH 4.5-5.5)। सदियों पुरान पेड़न (楠, 樟, 柏, 杉 – नानमू, कपूर लॉरेल, सरू, क्रिप्टोमेरिया) के जंगली पतई गलला से जैविक पदार्थ के मात्रा ऊँच बा।
- पारिस्थितिकी: चाय बगइचा यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल के भीतर, अछूत जंगल के बीच स्थित बा, जहाँ 2300+ प्रजाति के जंगली जीव (बड़का आ छोट पांडा सहित) आ हजारों प्रजाति के पौधा बा, जवना में अवशेषी वृक्ष फर्न आ डेविडिया शामिल बा। 1980 में देंग शियाओपिंग (邓小平) के आदेश से रासायनिक खाद आ कीटनाशक पर प्रतिबंध लगावल गइल। 6000 मू (400 हेक्टेयर) से बेसी चाय बगइचा के अंतर्राष्ट्रीय जैविक प्रमाणीकरण मिलल बा।
5. उत्पादन के तकनीक:
एमेइ शुए या बौद्ध चाय गुरु लोग के पीढ़ी-दर-पीढ़ी सौंपल पारंपरिक तकनीक से हाथे बनेला। तैयार चाय के आकृति – चपटा, चिकन, सीधा, नोकीला (扁、平、滑、直、尖 – biǎn, píng, huá, zhí, jiān), सुई भा “बुद्ध के आँख” (佛眼, fóyǎn) नियर होला।
- फैलावल (摊晾, tānliáng): ताजा चुनल कली के पातर एकसमान परत में बाँस के ट्रे पर सतही नमी उड़ावे खातिर फैलावल जाला। समय – लगभग 30 मिनट।
- हरियाली निपटावे/“हरी मारल” (杀青, shāqīng): पतई के लगभग 180 °C तापमान के गरम कड़ाही में डालल जाला। कारीगर हाथ से कोंपल के पलटेला आ उछालेला (搂翻, lǒufān), बिना जरले तेजी से नमी हटावे आ ऑक्सीडेज के निष्क्रिय करे के लक्ष्य राखेला। समय – जब तक चाय के सुगंध ना आवे आ पतई नरम ना पड़ जाए।
- ठंडा करल (摊凉, tānliáng): पतई के कड़ाही से निकाल के ठंडा होखे खातिर फैलावल जाला – लगभग 5 मिनट। एहसे अत्यधिक तापीय प्रभाव बचल जाला।
- आकृति देब आ समतल करब (理条整形, lǐtiáo zhěngxíng): कड़ाही के तापमान कम कइल जाला। पतई के पोंछ के बराबर क के ओकरा खास चपटा सुई नियर आकृति दिहल जाला। परंपरागत रूप से चिकनाई खातिर कीट मोम (虫蜡, chónglà) के प्राकृतिक निशान के इस्तेमाल होला – ई एगो प्राचीन तरीका बा जे “दरपन” नियर सतह देवेला।
- सुगंध खोलल (提香, tíxiāng): लगभग 380 °C पर तेजी से पलटत अल्पकालिक उच्च तापमान प्रसंस्करण। लक्ष्य – सुगंधित पदार्थन के स्थिर क के “बहरा निकालल”, ताकि चाय के तेज, शुद्ध सुगंध मिल सके। कारीगर के ठीक समय के नियंत्रण करे के पड़ेला ताकि जरले के सुगंध ना आवे।
6. इंद्रियगत विशेषता:
- सूखल पतई के बाहरी रूप: चपटा, सीधा, चिकन, नोकीला “सुई” (扁平滑直尖)। रंग – हलका से पन्ना हरियर (翠绿) तक। ऊँच श्रेणी में भरपूर सफेद फुआर (白毫) होला। बेहतरीन नमूना के आकृति “बुद्ध के आँख” (佛眼) नियर लागेला।
- सूखल पतई के सुगंध: शुद्ध, ताजा, ऊँच। मुख्य संकेत – आर्किड (兰花, lánhuā) आ शहद (蜜香, mì xiāng), हलका फूल के सुगंध से सजल।
- चाय के पानी के सुगंध: सुरुचिपूर्ण, आर्किड नियर, साफ फूल आ फल के रंगत के साथ। प्याला ठंडा होखे पर सुगंध तेज हो जाला आ लहर-लहर खुलेला।
- स्वाद: ताजा, स्फूर्तिदायक (鲜爽, xiānshuǎng), शुद्ध आ चिकनाहट वाला (清醇甘滑, qīng chún gān huá)। हलका सुरुआती कड़वाहट जल्दिये देर तक रहे वाला लवटत मिठास हुईगान (回甘) में बदल जाला। स्वाद “रसीला”, भरपूर, खनिजपन के एहसास वाला होला। कसैलापन – बहुत कम।
- चाय के पानी के रंग: हलका हरियर से कोमल मणि-हरियर (翠绿明亮), पारदर्शी, “चमकीला” चमक वाला।
- चाय के पेंदी (भीजल पतई): कोमल हरियर, एकसमान, कोमल। कोंपल पूरा तरह खुल जालीं आ एकसमान तुड़ाई के मानक देखावेली। खास श्रेणी – अकेली कली, लघु हरियर “पाँख” नियर।
7. रासायनिक संरचना:
- पॉलीफेनॉल (茶多酚): ऊँच पहाड़ी टेरोइर, तीव्र UV विकिरण आ तापमान के भारी अंतर के कारण मात्रा साधारण मैदानी हरित चाय से काफी बेसी होला। मुख्य घटक – EGCG।
- अमीनो एसिड (氨基酸): बेसी मात्रा (हरित चाय खातिर औसत से ऊपर), खासकर एल-थिएनाइन – भरपूर कोहरा, फैलल रोशनी आ ठंड रात के परिणाम जे थिएनाइन के टूट धीमा कर देला। अमीनो एसिड के ऊँच स्तर स्वाद के ताजगी, मिठास आ “रसीलापन” खातिर जिम्मेदार होला।
- एल्केलॉइड: कैफीन – मध्यम मात्रा; थियोब्रोमीन आ थियोफिलीन – अल्प मात्रा में।
- विटामिन: C (एस्कॉर्बिक एसिड – ऊँच स्तर), B₂, E, K, फोलिक एसिड। विटामिन C ऊँच पहाड़ी चाय में प्रसंस्करण के कम तापमान के कारण बेहतर बचल रहेला।
- खनिज: पोटैशियम, मैग्नीशियम, मैंगनीज, जस्ता, फॉस्फोरस, फ्लोरीन।
- वाष्पशील तेल: लिनालूल, जेरेनिऑल, नेरोल, बेंजिल अल्कोहल – आर्किड-फूल के सुगंध बनावेला। उच्च तापमान वाला तिशियांग (提香) चरण सुगंध के स्थिर क देला।
- विशेषता: “लिन्चा गोंगशुन” (林茶共生, línchá gòngshēng – “जंगल आ चाय के सहजीविता”) पारिस्थितिकी तंत्र के कारण, पतई आसपास के औषधीय पौधन से फाइटोनसाइड आ सूक्ष्म तत्वन से समृद्ध हो जाला – एमेइ टेरोइर के एगो अनोखा गुण।
8. स्वास्थ्य लाभ:
- प्रतिऑक्सीकारक प्रभाव: कैटेचिन (EGCG) आ विटामिन C के ऊँच मात्रा मुक्त कण के जबरदस्त बेअसर करे के काम करेला। एमेइशान के बौद्ध आ ताओवादी साधू पारंपरिक रूप से चाय के “排毒养颜” (páidú yǎngyán – “शरीर के शुद्धि आ सौंदर्य बनावे”) के साधन मानत रहले।
- टॉनिकीकरण आ एकाग्रता: कैफीन आ एल-थिएनाइन के मिश्रण मानसिक रूप से हलका जागरूकता – “मन के निर्मलता” (清心明目, qīngxīn míngmù) ले आवेला, जवन सदियन से साधू लोग ध्यान खातिर महत्व देहल।
- पाचन के समर्थन: पॉलीफेनॉल पाचक एंजाइम के स्राव के उत्तेजित करेला; हलका टैनिन कसैला प्रभाव देला।
- हृदय-संवहन तंत्र: कैटेचिन कोलेस्ट्रॉल के सामान्य करे आ शिरा के टोन बनावे में मदद करेला।
- दाँत मजबूत करे: फ्लोरीन आ कैटेचिन दाँत खराब करे वाला बैक्टीरिया के दबावेला। पारंपरिक सलाह: खाना के बाद चाय के पानी से गरारा।
- प्रतिरक्षा नियमन: पॉलीफेनॉल आ विटामिन C शरीर के रक्षात्मक काम के बढ़ावेला।
- चयापचय: हरित चाय ऊष्माजनन आ वसा ऑक्सीकरण बढ़ावेला। एमेइशान के साधू ए प्रभाव के “जिउ फू चिन शेन” (久服轻身 – “लंबा सेवन से – शरीर हल्का”) कहलें।
- रोगाणुरोधी गुण: कैटेचिन में बैक्टीरिया के बढ़े रोके के गतिविधि होला।
9. चाय बनावे के तरीका:
- पानी के तापमान: 85-90 °C। सबसे ऊँच श्रेणी “चानशिन” (禅心, अकेली कली) खातिर – 80-85 °C।
- चाय के मात्रा: 3-5 ग्राम प्रति 150 मिली (गिलास); 5-7 ग्राम प्रति गाइवान 100-120 मिली (गोंगफू शैली)।
- बरतन: शीशा के गिलास (玻璃杯) – कली के “नाच” देखे खातिर आदर्श: ऊँच श्रेणी के चाय बनावे पर कली सीधा लटक के झूमेला, अइसन दृश्य बनावेला जे “छोट बाँस के कोंपल” नियर लागेला। चीनी मिट्टी के गाइवान (盖碗) – निष्कर्षण पर नियंत्रण आ सुगंध के पूरा खुलासा खातिर।
- प्रक्रिया (गोंगफू शैली):
- गाइवान आ प्याला के खौलत पानी से गरम क के पानी फेंक दीं।
- 5-7 ग्राम चाय डालीं। गरम देवाल से सूखल पतई के सुगंध लेब।
- पहिला बूंद: 85 °C के पानी के नोकीला धार से डालीं (定点高冲, dìngdiǎn gāochōng)। 10-15 सेकेंड खातिर छोड़ दीं। ढक्कन के हलका खोल के “काँच” भाप बाहर निकले दीं (开盖透气, kāigài tòuqì) – एहसे ‘भाप में पकल’ सुगंध आवे से बचाव होला।
- दूसरा आ बाद के बूंद: तापमान 80 °C तक कम क दीं, 5-10 सेकेंड खातिर रखीं।
- बूंद के संख्या: 6-10 (ऊँच श्रेणी खातिर)।
- गिलास (बेइपाओ): 3-5 ग्राम प्रति 200 मिली। एक तिहाई पानी डालीं – रुकीं – बाकी भर दीं। चाय/पानी के अनुपात – 1:50।
- जरूरी: बहुत देर तक ना रखीं – जादे समय छोड़े पर आर्किड के सुगंध कड़वाहट में बदल जाला। कम खनिज वाला कोमल पानी मिठास उभारेला।
10. भंडारण:
- तापमान: 0-5 °C (रेफ्रिजरेटर), हवाबंद पैकेट में सख्ती से। ठंडा जगह (10 °C तक) भी चल सकेला।
- बरतन: वैक्यूम फॉइल पैकेट, धातु के डिब्बा, अपारदर्शी चीनी मिट्टी के बरतन।
- चाय के दुश्मन: रोशनी, नमी, बाहरी गंध, ऑक्सीजन, गरमी।
- समय सीमा: उत्पादन के पहिला 6-12 महीना में सबसे अभिव्यंजक। भरपूर फुआर वाला एमेइ के ऊँच पहाड़ी चाय खास तौर पर ऑक्सीकरण के प्रति संवेदनशील होला – बहुत देर तक ना रखीं।
11. कीमत आ नकली:
- कीमत श्रेणी: प्रीमियम वर्ग। “शुएजी” (雪霁, “बरफीला सफाई”, सबसे ऊँच जैविक श्रेणी) आ “चानशिन” (禅心, “ध्यान के हृदय”, अकेली कली) श्रृंखला – 1000 युआन/जिन (500 ग्राम) से। मध्यम श्रेणी “रुईशिन” (睿心) आ “हुईशिन” (慧欣) – 400-800 युआन/जिन।
- कीमत के कारक: उगाही के ऊँचाई (जेतना ऊँच = ओतने महँग), कच्चा माल के श्रेणी, हाथ के तुड़ाई, जैविक प्रमाणीकरण, मुख्य क्षेत्र (यूनेस्को संरक्षित क्षेत्र के भीतर) से जुड़ाव।
- नकली से कइसे बचीं:
- “एमेइ शुए या” ब्रांड (峨眉雪芽茶业集团, Éméi Xuěyá Cháyè Jítuán) के अधिकृत विक्रेता से खरीदीं।
- आकृति जाँचीं: असली एमेइ शुए या – चपटा, चिकन, नोकीला “सुई” जवना के सतह दरपन नियर आ ऊँच श्रेणी में भरपूर फुआर वाला।
- सुगंध के मूल्यांकन करीं: असली चाय में “अधिक गरम” भा घास जइसन संकेत बिना शुद्ध आर्किड सुगंध होला।
- चाय के पानी पारदर्शी, कोमल हरियर, बिना धुँधलापन के होखे के चाहीं।
- संदेहास्पद रूप से कम कीमत – एमेइशान क्षेत्र से बाहर मैदानी बागान के कच्चा माल से बदली के संकेत।
12. रोचक तथ्य:
- एमेइ शुए या उन गिनल-चुनल चाय में से बा जवन सचमुच बरफ के नीचे से तोड़ल जाला। ऊँच पहाड़ी बगइचन (1000 मीटर से ऊपर) में अप्रैल के सुरुआत में बरफ पूरा ना पिघलल होखे, आ साधू सफेद चादर पर चलत पहिला कोंपल टूरत बाड़ें। ई सालाना “ताशुए झाईचा” (踏雪摘茶, “बरफ पर चाय चुनल”) – चीन के सबसे फोटोजेनिक चाय दृश्य में से एक।
- ली शान तांग काल में “झाओमिंग वेनश्युआन” के टिप्पणी में एगो रहस्यमय घटना के वर्णन कइलें: हेइशुईसी मठ (黑水寺) के चाय के कली लगातार दू साल सफेद फुआर वाली आ तीसरा साल हरियर होखत, आ ई नियमित रूप से बदलत रहत। ए घटना के स्वरूप आजो बिना ब्याख्या बा।
- सू दोंपो (苏东坡) एक बेर हांगझोऊ में राज्य परीक्षा के दौरान सहकर्मी लोग खातिर हुईक्वान झरना के पानी पर एमेइ चाय बनवले आ लिखलें: “फेन वू यू वान पेंग एमेइ” (分无玉碗捧峨眉 – “अफसोस, एमेइ पेश करे खातिर मणि प्याला नइखे”)।
- एमेइशान के पारिस्थितिकी तंत्र में अवशेषी पौधा (वृक्ष फर्न, डेविडिया) आ दुर्लभ जानवर (बड़का पांडा, सुनहरा बंदर) शामिल बा। चाय बगइचा सचमुच ए अवशेषी जंगल के साथ सहजीविता में बा – “लिन्चा गोंगशुन” (林茶共生), जवन चाय के एगो अनोखा “जंगली” खनिज रंगत देला।
- 2013 में एमेइ शुए या आ एकर लाल “जुड़वा” जिन ए होंग (金峨红, “सुनहरा लाल एमेइ”) के चेंगडू में फॉर्च्यून ग्लोबल फोरम – दुनिया के सबसे बड़ व्यापारिक मंच में से एक – के दावत खातिर आधिकारिक चाय चुनल गइल।
13. एमेइ शुए या के प्रकार:
आधुनिक श्रृंखला में दू गो मुख्य श्रेणी शामिल बा:
जैविक श्रृंखला (有机茶系列, yǒujī chá xìliè):
- शुएजी (雪霁, Xuějì – “बरफीला सफाई”): सबसे ऊँच श्रेणी। बड़, गूदेदार अकेली कली। अंतर्राष्ट्रीय मानकन के अनुसार पूर्ण जैविक उत्पादन।
- जिसोंग (霁凇, Jìsōng – “बरफीला पाला”): मध्यम श्रेणी। एगो कली आ एगो पतई।
- युसोंग (雨凇, Yǔsōng – “बरसाती पाला”): आधार श्रेणी। बेसी परिपक्व कच्चा माल, सुलभ कीमत।
“दुर्लभ हरित चाय” श्रृंखला (珍稀绿茶系列, zhēnxī lǜchá xìliè):
- चानशिन (禅心, Chánxīn – “ध्यान के हृदय”): खास श्रेणी – विशेष रूप से अकेली कली (独芽)। जोरदार “जंगली” पारिस्थितिकी पर बल।
- रुईशिन (睿心, Ruìxīn – “बुद्धिमान हृदय”): पहिला श्रेणी। एगो कली आ एगो पतई।
- हुईशिन (慧欣, Huìxīn – “बुद्धि के आनंद”): दूसरा श्रेणी। एगो कली आ दू पतई।
एकरे अलावा लाल चाय जिन ए होंग (金峨红) आ चमेली वाला ए श्यांग शुए (峨香雪) के भी उत्पादन होला – शास्त्रीय हरित चाय के दायरा से बाहर के विस्तार।
निष्कर्ष में:
एमेइ शुए या – बरफ आ बसंत के संधि पर पैदा भइल चाय, ओह जंगल में जहाँ पांडा घूमेला आ साधू प्रार्थना करेला। डेढ़ हजार बरिस से – सुई आ तांग के पहिला चाय साधू से लेके आधुनिक जैविक प्रमाणपत्र तक – ई आपन चरित्र पर अडिग बा: कोमल, आर्किड जइसन पारदर्शी, शब्द के सबसे सटीक अरथ में “बरफीला” – शुद्ध आ ताजा, जइसे बर्फानी तूफान के बाद पहाड़ी हवा। जब लू यू एकर तुलना पौराणिक गुझू ज़िसुन से कइलें आ निष्कर्ष निकाललें कि एमेइ “कम नइखे”, त ऊ चापलूसी ना कइलें – ऊ तथ्य बतवलें। ई चाय ओह लोग खातिर नीक बा जे हरित चाय में ताकत आ गाढ़ापन ना, बलुक स्पष्टता, ताजगी आ शांत गहिराई खोजेला – उहे “बरफीला सबेरे के सन्नाटा”, जवन के एमेइशान से बाहर कतहू नकल ना हो सके।