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डिंग गु दा फांग

Dǐnggǔ dà fāng · 顶谷大方

डिंग गु दा फांग — लाओ झू दा फांग (老竹大方) नामक महान चाय के सबसे उत्तम ग्रेड हऽ, जवना के “चीन के सब चपटा ग्रीन टी के पूर्वज” (扁形茶鼻祖) मानल जाला। बौद्ध भिक्षु दा फांग मिंग राजवंश (明) में लाओझुलींग परबत के चोटी पर एकर रचना कइलें, ई चाय परसिद्ध लोंगजिंग के उपस्थिति से पहिले अस्तित्व में आ गइल आ कई सदी ले शाही कर चाय (贡茶) बनल…

डिंग गु दा फांग — लाओ झू दा फांग (老竹大方) नामक महान चाय के सबसे उत्तम ग्रेड हऽ, जवना के “चीन के सब चपटा ग्रीन टी के पूर्वज” (扁形茶鼻祖) मानल जाला। बौद्ध भिक्षु दा फांग मिंग राजवंश (明) में लाओझुलींग परबत के चोटी पर एकर रचना कइलें, ई चाय परसिद्ध लोंगजिंग के उपस्थिति से पहिले अस्तित्व में आ गइल आ कई सदी ले शाही कर चाय (贡茶) बनल रहल। भूना सिंघाड़ा के विशिष्ट खुशबू (板栗香), “बाँस के पत्ता नियर” चपटा आकृति, आ चिकना सतह के नीचे लुकाइल सोनहरी रोम — ई सब एकर पहचान हवें, भले ई चीन के सभसे कम परसिद्ध बाकिर ऐतिहासिक रूप से सभसे महत्वपूर्ण ग्रीन टी में से एक हवे।

1. वर्गीकरण आ उत्पत्ति:

  • प्रकार: ग्रीन टी (绿茶, lǜchá), बिना किण्वन के। ई चाओचिंग (炒青, chǎoqīng) श्रेणी में आवेला — तानल ग्रीन टी। उपश्रेणी — चपटा तानल ग्रीन टी (扁形炒青绿茶)।
  • वर्ग: चीन के परसिद्ध चाय (中国名茶)। 1986 में एकरा राजकीय कूटनीतिक चाय (国家外交部礼茶) में सामिल कइल गइल। भौगोलिक संकेत (地理标志) से संरक्षित। अनहुई कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर झान लुओजिउ (詹罗九) के परिभाषा अनुसार “सब चपटा ग्रीन टी के मूल जनक” (扁形茶鼻祖) ह।
  • उत्पत्ति: चीन, अनहुई प्रांत (安徽省, Ānhuī Shěng), हुआंगशान शहर (黄山市, Huángshān Shì), शेश्यान काउंटी (歙县, Shè Xiàn)। प्रमुख उत्पादन क्षेत्र: जुपु टाउनशिप (竹铺乡, Zhúpù Xiāng), सानयांग कस्बा (三阳镇, Sānyáng Zhèn), जिनचुआन टाउनशिप (金川乡, Jīnchuān Xiāng)। सबसे नीक चाय — लाओझुलींग परबत (老竹岭, Lǎozhú Lǐng), दाफांगशान परबत (大方山, Dàfāng Shān) आ फूचुआनशान परबत (福泉山, Fúquán Shān) से आवेला। ई क्षेत्र अनहुई आ झेजियांग प्रांत के सीमा पर प्राचीन “हुईहान गुदाओ” (徽杭古道) के सहारे बसल बा।
  • भौगोलिक निर्देशांक: लगभग 29°52′ उत्तरी अक्षांश, 118°52′ पूर्वी देशांतर।
  • बैकल्पिक नाँव: लाओ झू दा फांग (老竹大方, “पुरान बाँस के परबत से दा फांग”) — पूरा शृंखला खातिर आम नाँव; झुपू दा फांग (竹铺大方); झूई दा फांग (竹叶大方, “बाँस के पत्ता जइसन दा फांग”); टे से दा फांग (铁色大方, “लोहा रंग के दा फांग”); काओ फांग (拷方)। “डिंग गु दा फांग” (顶谷大方) — शृंखला के सभसे ऊँच ग्रेड ह।

2. इतिहास आ सांस्कृतिक महत्व:

  • इतिहास: दा फांग चाय के इतिहास 1000 साल से बेसी पुरान बा। सबसे पहिले एकर जिकिर “पाँच वंश सभ के पुरान इतिहास” (《旧五代史》) में मिलेला: “च्यानहुआ के पहिला बरिस [911 ई.] के बारहवाँ महिना में लियांगझे कर के रूप में 20,000 जिन (斤, jīn) दा फांग चाय अर्पण कइलस।” एही से पाँच वंश आ दस राजपाट (五代十国, 907–960) के जुग में इ चाय कर-चाय रहे। बाकिर आजुकाल के चपटा तानल दा फांग के तकनीक बौद्ध भिक्षु दा फांग (大方和尚) से जुड़ल बा, जे मिंग राजवंश (明, 1368–1644) में रहलें। “शे काउंटी के इतिहास” (《歙县志》) अनुसार: “लोंगचिंग बरिस [1567–1572] में भिक्षु दा फांग स्युनिंग (休宁) काउंटी के सोंलुओ परबत (松萝山) पर रहलें आ बड़ी कुशलता से चाय बनावलें, पूरा इलाका उनकर तरीका अपना लिहलस।” दा फांग एगो घुमंतू भिक्षु रहलें, जे सूझोउ से हुईझोउ आइलें, जहाँ उ चाय के तानब (炒青) के तकनीक बनवलें आ एकर परचार कइलें — बाद में ई सोंलुओ चा (松萝茶) आ लोंगजिंग के उत्पादन के आधार बनल। वानली काल (万历, 1573–1620) में हुईझोउ में तैनात अधिकारी लोंग इंग (龙膺) भिक्षु के काम खुद देखलें आ “मेंग शी” (《蒙史》) किताब में उनकर विधि के बरनन कइलें। लेखक ली वेईझेन (李维桢) “दा फांग के छबि के परसाल” (《大方象赞》) में भिक्षु के बरनन कइलें: “सुघर भौंह आ घन दाढ़ी-मूँछ वाला, जइसे देवता नियर उड़त।”

    चिंग राजवंश में दा फांग शाही कर चाय (贡茶) बन गइल। किंवदंती अनुसार, 1751 में सम्राट च्यानलोंग (乾隆) जियांगनान के यात्रा पर लाओझुलींग के मठ के चाय पियलें आ “कृपा करिके” एकर नाँव “दा फांग” दिहलें। 20वीं सदी में ई चाय गिरावट में रहल: हुआंगशान माओफेंग आ ताइपिंग होउकुई के उफान में इ कोर में चल गइल। बाकिर 1986 में डिंग गु दा फांग के चीन के विदेश मंत्रालय के राजकीय कूटनीतिक चाय (国家外交部礼茶) में सामिल कइल गइल, जवन एकर सभसे ऊँच दरजा के पुष्टि करेला।

  • नाँव:

    • “डिंग गु” (顶谷) — “चोटी के, ऊपरी खड्ड से” — सभसे ऊँच ग्रेड के ओर इशारा करेला, जवन परबत के चोटी के सभसे नीक बागान से चुनल जाला।
    • “दा फांग” (大方) — दोहरा अरथ: (1) रचनाकार भिक्षु के नाँव; (2) “उदार, दरियादिल” — स्वाद के बिसेसता। संभवतः दाफांगशान परबत (大方山) के नाँव से भी जुड़ाव हो सकेला।
    • “लाओ झू” (老竹) — “पुरान बाँस” — लाओझुलींग परबत के जगह-नाँव, जहाँ ऐतिहासिक बागान बाड़ें।
  • सांस्कृतिक महत्व: डिंग गु दा फांग आम लोग खातिर चीन के सभसे कम जानल-मानल, बाकिर चाय के इतिहास खातिर सभसे महत्वपूर्ण ग्रीन टी में से एक ह। अनहुई कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर झान लुओजिउ (詹罗九) परमानित कइलें कि दा फांग वास्तव में “सब चपटा ग्रीन टी सभ के पूर्वज” (扁形茶鼻祖) ह, आ परसिद्ध लोंगजिंग एकर “वंशज” ह, जवन चपटा तानब के तकनीक अपनवलस। “चीन के परसिद्ध चाय सभ के हस्तपुस्तिका” (《中国名茶志》) के लेखक वांग झेनहेंग (王镇恒) आ वांग गुआंगझी (王广智) पुष्टि कइलें: “लोंगजिंग संभवतः मिंग के अंत-चिंग के सुरुआत में पैदा भइल आ सभसे बेसी संभावना इहे बा कि इ दा फांग के तानब तकनीक लेके विकसित भइल।”

3. वानस्पतिक बरनन आ कच्चा माल:

  • किसिम / कल्टीवार: झुपू झोंग (竹铺种, Zhúpù Zhǒng) — Camellia sinensis var. sinensis के स्थानीय आबादी, जवन शेश्यान के ऊँच परबत सभ के अनुकूल बा। बसंत के कोंपल मार्च के बीच-अंत में जाग जालीं, कोंपल निकले के घनापन ढेर होला, अंकुर छोट-मोट आ मजबूत होलें, आ भरपूर उज्जर रोम होला। पत्ता हरियर, ठंडा सहन करेवाला होलें। उपज ढेर होला। झुपू झोंग के चाय में खास सिंघाड़ा के खुशबू (板栗香) आवेला।
  • तोराई: डिंग गु दा फांग गुयु (谷雨, ~20 अप्रैल) से पहिले तूरल जाला। मानक लाओ झू दा फांग — गुयु से लिशा (立夏, ~6 मई) के बीच। बसंत के तुराई सभसे नीक; गरमी आ पतझड़ के तुराई साधारन ग्रेड खातिर चल जाला।
  • तुराई के मानक: डिंग गु दा फांग — सुरुआती खुलास के दशा में एक कोंपल आ दू गो पत्ता (一芽二叶初展)। साधारण दा फांग — एक कोंपल आ दू-तीन पत्ता।
  • कच्चा माल के जरूरत: साबुत, बिना क्षति के अंकुर। सूखल मौसम में तुराई। कारखाना ले तेजी से पहुँचावल जाव।

4. टेरुआर आ खेती के बिसेसता:

  • शेश्यान के परबती इलाका: काउंटी के उत्तर-पूरबी हिस्सा, अनहुई-झेजियांग सीमा पर। तियानमुशान परबत श्रेणी (天目山脉) में आवेला। चिंगलियांगफेंग चोटी (清凉峰) — 1,787 मी. परबत खड़ा, खड्ड गहिर, ढेर झरना बाड़ें। चाय के झाड़ी चट्टानन के बीच, दरारन आ परबती घाटी में बढ़ेलीं।
  • उगाए के ऊँचाई: समुंद्र तल से 800–1,300+ मी.। सभसे नीक बागान (लाओझुलींग, फूचुआनशान) — 1,000–1,300 मी. के ऊँचाई पर।
  • जलवायु: सालाना औसत तापमान ~16°C। बरखा — ~1,800 मिमी/साल। नमी — 80%+। बड़े सबेरे के कुहासा प्राकृतिक छाँह बनावेला, जवन अमीनो अम्ल आ क्लोरोफिल के जमाव बढ़ावेला। जाड़ा ठंडा, गरमी मध्यम गरम। दिन-रात के तापमान में भारी अंतर।
  • माटी: ऊपरी परत — करिया बालूदार माटी (乌沙); बीच के — लाल-पियर माटी (红黄壤); अम्लीयता — हल्का अम्लीय। ग्रेनाइट के आधार, खनिज से भरपूर (मैंगनीज, पोटैशियम, जस्ता)। माटी भुरभुर, निकास वाला, जैविक पदार्थ ढेर।

5. उत्पादन के तकनीक:

दा फांग के तकनीक — क्लासिक चपटा तानब (扁形炒青) ह, जवन भिक्षु दा फांग से बिरासत में मिलल आ लोंगजिंग खातिर आदिरूप बनल। प्रमुख चरण:

  • तुराई (采摘 — cǎizhāi): हाथ से, बसंत के सुरुआत में।
  • मुरझाई (摊晾 — tān liáng): बाँस के थार पर 2–4 घंटा के छोट मियाद। कुछ नमी खतम होला, खुशबू बने लागेला।
  • “हरियाली के मारल” / स्थिरीकरण (杀青 — shāqīng): गरम कढ़ाई (铁锅) में ~150°C पर। इंजाइम सभ के निष्क्रिय कइल, ऑक्सीकरण रोकल। पत्ता जल्दी नरम होके लचकदार बन जालें। कारीगर नंग हाथ से काम करेला आ छू के तापमान नियंत्रित करेला।
  • चपटा आकृति देवल (做形 — zuò xíng): मुख्य चरण, जवन दा फांग के दोसर ग्रीन टी से अलग करेला। गरम पत्ता सभ के हथेली से कढ़ाई के देवाल पर साफ्ट-जोर से दबावल जाला, चौरस क के बराबर कइल जाला, जवना से बाँस के पत्ता नियर खास चपटा, हल्का लमछर आकृति बनेला। बहुते ऊँच कौशल चाहीं — जादे गरम कइला पर जल जाई, कम दबावे पर चपटा आकृति ना बनी।
  • सुखाई (烘干 — hōnggān): 60–90°C के नियंत्रित तापमान पर कई चरण में। पारंपरिक रूप से — लकड़ी के कोइला (炭焙) पर, जवना से हल्का “धुआँ-सुगंध” आ सकेला। डिंग गु दा फांग खातिर सुखाई खास नाजुक होला — सोनहरी रोम आ सिंघाड़ा के खुशबू बचावे खातिर।
  • छाँटाई (分级 — fēnjí): बाँस के छलनी से छानल, डंठल आ महीन अंश हटावल।

6. ऑर्गेनोलेप्टिक बिसेसता:

  • सूखल पत्ता के रूप-रंग: चपटा, लमछर पट्टी, चिकन, बराबर, बाँस के पत्ता के याद दियावेला। रंग — गहिर हरियर, हल्का पियलाहूँ झलक (翠绿微黄) के साथे। साधारण दा फांग में — गहिर हरियर से “लोहा” रंग (铁色) ले, एही से “ते से दा फांग” नाँव पड़ल। डिंग गु दा फांग के मुख्य बिसेसता: चिकन सतह के नीचे लुकाइल भरपूर सोनहरी रोम (金毫) — “कोंपल लुकावल बा, देखाई ना पड़े” (芽藏而不露)।
  • सूखल पत्ता के खुशबू: भूना सिंघाड़ा के खास खुशबू (板栗香, bǎnlì xiāng) — दा फांग के पक्का पहचान। ऊँच, टिकाऊ, हल्का फूल के अतिस्वर (ऑसमेन्थस, ऑर्किड) आ कबो-कबो कोइला के सुखाई से बहुते पातर धुआँ के नोट।
  • अरक के खुशबू: कोमल, सिंघाड़ा-फूलदार, बादामी नोट के साथे। ऊँच आ “लमहर” (香高气长)। सभसे नीक बैच में हल्का “बादाम” के झलक।
  • स्वाद: गाढ़, भरपूर, 醇厚爽口 — “गाढ़, कोमल आ ताजगी देवेवाला।” मिठास के सुरुआत, कोमल सुखद कसैलापन, हल्का नींबू जइसन खटास। बाद के स्वाद — लमहर, सिंघाड़ा-बादाम के छाया आ मीठ अंत के साथे। लोंगजिंग के तुलना में — ढेर “गाढ़” आ “गहिर”, मजबूत मिठास के साथे।
  • अरक के रंग: पारदर्शी, हल्का पियर, हरियराहूँ झलक (清澈微黄) के साथे। कइयो दफा भिंजावे पर सफाई बनल रहेला।
  • चाय के तली (भिंजावल पत्ता): साबुत, फूलल, कोमल पत्ता, आकार में एक समान, पियर-हरियर रंग (肥厚嫩匀)।

7. रासायनिक संघटन:

  • पॉलिफेनॉल (茶多酚): कैटेचिन के ढेर मात्रा, खासकर एपिगैलोकैटेचिन-3-गैलेट (EGCG) — बहुते शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट। बिना किण्वन के प्रसंस्करण कैटेचिन सभ के प्राकृतिक रूप में बचा लेला।
  • अमीनो अम्ल (氨基酸): L-थीनिन के बढ़ल मात्रा (ऊँच परबती टेरुआर आ ढेर कुहासा के कारण)। L-थीनिन मीठ स्वाद आ आराम देवे वाला असर देला।
  • एल्कलॉइड: कैफीन — मध्यम मात्रा, टैनिन के साथे जुड़ल रूप में, जवना से हल्का आ लमहर तरोताजा करे वाला असर होला।
  • विटामिन: C (ढेर — ग्रीन टी लाल चाय से बेसी विटामिन C बचावेले), B₁, B₂, E, K, PP।
  • खनिज: ग्रेनाइट माटी के कारण समृद्ध खनिज प्रोफाइल: जस्ता, मैंगनीज, पोटैशियम, फास्फोरस, कैल्शियम, लोहा।
  • क्लोरोफिल आ कैरोटिनॉइड: ढेर मात्रा — पत्ता के भरपूर हरियर रंग आ एंटीऑक्सीडेंट गुण देला।
  • उड़नशील खुशबूदार यौगिक: पाइराजीन आ मायार प्रतिक्रिया के उपज (तानब के दौरान बनेला) के संकुल, जवन खास सिंघाड़ा के खुशबू खातिर जिम्मेदार होला।

8. फायदेमंद गुण:

  • एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा: EGCG के ढेर मात्रा मुक्त मूलक सभ के बेअसर करे में मदद करेला, कोशिका सभ के ऑक्सीडेटिव तनाव से बचावेला।
  • कोमल तरोताजगी: टैनिन से जुड़ल कैफीन + L-थीनिन = बेचैनी बिना एक समान स्फूर्ति।
  • चयापचय के सहारा: दा फांग ऐतिहासिक रूप से “वजन घटावे के चाय” (减肥之王, “वजन घटावे के राजा”) के रूप में जानल जाला — कैटेचिन चयापचय तेज करेला आ वसा के ऑक्सीकरण बढ़ावेला। जापानी शोध देखवलें कि दा फांग मुक्त वसा अम्ल आ न्यूट्रल वसा के स्तर घटावे में ऊलॉन्ग आ टी गुआनयिन से बेहतर बा।
  • हृदय-रक्तनली तंत्र के सहारा: कैटेचिन रक्तनली सभ के लचक सुधारेला, कोलेस्ट्रॉल आ रक्तचाप के सामान्य करे में मदद करेला।
  • मानसिक सहारा: L-थीनिन ध्यान आ स्मरण शक्ति बढ़ावेला।
  • जीवाणुरोधी असर: पॉलिफेनॉल रोगकारी जीवाणु सभ के दबावेला, मुँह के सेहत के सहारा देला (फ्लोराइड के कारण दाँत के इनेमल मजबूत करेला)।

9. बनावे के तरीका:

  • पानी के तापमान: 80–85°C। ऊँच परबती कोमल ग्रीन टी खौलत पानी सहन ना करे — बहुते ढेर तापमान कड़वाहट आ “पकावल” स्वाद पैदा करी।
  • चाय के मात्रा: 150–200 मिली पानी खातिर 3–5 ग्राम।
  • बरतन: काँच के गिलास (玻璃杯) — चपटा चायदानी सभ के “नाच” देखे के मजा, जे धीरे-धीरे तली में बइठ जालीं। चीनी माटी के गाइवान — नियंत्रित अर्क खातिर। छोट आकार के चायदानी (300 मिली ले)।
  • बिधि:
    1. बरतन गरम करल: गरम पानी से खंगाल लीं।
    2. चाय डारल: 3–5 ग्राम।
    3. धोवाई: 5–10 सेकेंड के तेज भिंजाई — मरजी से; कई गुरु लोग पहिला खुशबू बचावे खातिर एकरा छोड़े के सलाह देला।
    4. पहिला भिंजाई: 1–2 मिनट। चपटा चायदानी सभ के खुलते देखब — एगो सौंदर्य के आनंद।
    5. दोबारा भिंजाई: 4–6 भिंजाई, हर बेर 30–60 सेकेंड समय बढ़ावत। दा फांग दोबारा भिंजाई में टिकेला, सिंघाड़ा के खुशबू आ मिठास बनवले रहेला।

10. भंडारण:

  • डिब्बा: हवाबंद, अपारदर्शी — जिप-लॉक वाला फॉयल पैकेट, टीन के डिब्बा, सिरेमिक बरतन।
  • दशा: सूखल, ठंडा, अँधेरहां जगह, बाहरी गंध से दूर। लमहर भंडारण खातिर — फ्रिज (0–5°C) बिलकुल हवाबंद पैकिंग में (ग्रीन टी खास तौर पर ऑक्सीकरण आ नमी के प्रति संवेदनशील होला)।
  • अवधि: सभसे नीक — 12 महीना ले। ताजा चाय (पहिला 3–6 महीना) — सभसे बढ़िया सिंघाड़ा के खुशबू। फ्रिज में रखले पर — 18 महीना ले।
  • चाय के दुश्मन: रोशनी, नमी, ऑक्सीजन, ढेर तापमान, बाहरी गंध। ग्रीन टी सब प्रकार में सभसे संवेदनशील होला।

11. कीमत आ नकली:

डिंग गु दा फांग — तुलनात्मक रूप से दुर्लभ चाय: सालाना उत्पादन लगभग 3 टन। कीमत: मानक लाओ झू दा फांग — 100–300 युआन/500 ग्रा; डिंग गु दा फांग (सभसे ऊँच ग्रेड) — 500–1,500 युआन/500 ग्रा; संग्रहणीय हाथ से बनल बैच — 2,000+ युआन ले।

नकली से कइसे बचीं:

  • लोंगजिंग से मत भ्रमित होखीं: दा फांग के चपटा आकृति देखे में लोंगजिंग नियर लागेला, बाकिर रंग गहिर (पियलाहूँ चमक वाला गहिर हरियर बनाम लोंगजिंग के चटक हल्का हरियर), खुशबू — सिंघाड़ा के (बनाम लोंगजिंग के दलहन/घास नियर), स्वाद — ढेर गाढ़ आ मीठ।
  • उत्पत्ति जाँचीं: असली दा फांग — शेश्यान काउंटी (歙县), झुपू, सानयांग, जिनचुआन टाउनशिप से। सिचुआन या दोसर प्रांत से आवे वाली “दा फांग” बेचल जाए वाली चाय प्रामाणिक ना ह।
  • सिंघाड़ा के खुशबू (板栗香) खोजीं: पक्का पहचान। जदि एकरा जगह “घास” या “मछरी” गंध होखे — चाय शेश्यान के नइखे या गलत तरीका से बनल बा।
  • सोनहरी रोम आँकीं: असली डिंग गु दा फांग में चिकन सतह के नीचे लुकाइल ढेर सोनहरी टिप (芽藏而不露) होला। नकली में रोम गायब रहेला।

12. दिलचस्प तथ्य:

  • लोंगजिंग के पूर्वज: प्रोफेसर झान लुओजिउ आ “चीन के परसिद्ध चाय सभ के हस्तपुस्तिका” के अनुसार, लोंगजिंग के चपटा तानब तकनीक दा फांग से लेहल गइल। भिक्षु दा फांग दुनिया के सभसे परसिद्ध ग्रीन टी के परोक्ष “बाबूजी” हवें।
  • 911 ई. — कर चाय के रूप में पहिला जिकिर: “पाँच वंश सभ के पुरान इतिहास” में दा फांग चाय लियांगझे के कर के रूप में आइल — 1,100 साल से बेसी पहिले।
  • राजकीय कूटनीतिक चाय (1986): डिंग गु दा फांग के चीन के ओर से विदेशी प्रतिनिधिमंडल सभ के देवे वाली चाय में सामिल कइल गइल — लोंगजिंग आ बिलुओचुन के बराबरी में।
  • “वजन घटावे के राजा”: जापानी शोध देखवलें कि दा फांग मुक्त वसा अम्ल के स्तर घटावे में ऊलॉन्ग आ टी गुआनयिन से बेहतर बा — एही से एकर उपनाम “减肥之王” (“वजन घटावे के राजा”) पड़ल।
  • साल में 3 टन: डिंग गु दा फांग के सालाना उत्पादन लगभग 3 टन ह। तुलना खातिर: लोंगजिंग के उत्पादन हजारों टन ह। इ चीन के सभसे दुर्लभ परसिद्ध ग्रीन टी सभ में से एक ह।
  • “徽茶遗珍” — “हुईझोउ के बिसरल खजाना”: आजुकाल के चाय विशेषज्ञ दा फांग के एही नाँव से बोलावेलें: एगो चाय जवन हजार साल के इतिहास वाली होखे पर आपन ढेर “परचारित” पड़ोसी — हुआंगशान माओफेंग आ ताइपिंग होउकुई — के छाया में चल गइल।

13. दोसर ग्रीन टी सभ से तुलना:

  • लोंगजिंग (龙井, Lóng Jǐng): दा फांग के “वंशज।” इहो चपटा तानल ह, बाकिर झेजियांग प्रांत से। रंग — चटक हरियर (बनाम दा फांग के गहिर हरियर)। खुशबू — दलहन, घासियाह (बनाम सिंघाड़ा)। स्वाद — ढेर “ताजा” आ “हल्का”; दा फांग — गाढ़, मीठ, बाद के स्वाद ढेर मजबूत। लोंगजिंग — “बहिरमुखी”, दा फांग — “अंतर्मुखी”।
  • हुआंगशान माओफेंग (黄山毛峰, Huángshān Máofēng): अनहुई प्रांत के “पड़ोसी।” चपटा ना, मरोरल; भरपूर उज्जर रोम। खुशबू — ऑर्किड नियर (बनाम सिंघाड़ा)। स्वाद — ढेर “फूलदार” आ “हवादार।” दुनो चाय हुआंगशान परबत से हईं, बाकिर शैली में बिलकुल अलग।
  • ताई पिंग होउ कुई (太平猴魁, Tàipíng Hóukuí): अनहुई के एगो अउरी “पड़ोसी।” असामान्य रूप से बड़-बड़, चपटा पत्ता “जाली नियर” निशान खातिर परसिद्ध। स्वाद — “ऑर्किड आ वैनिला”, शरीर — मध्यम। दा फांग — गाढ़, भरपूर, सिंघाड़ा-बादाम के गहिराई के साथे।
  • लिउआन गुआपियान (六安瓜片, Lù’ān Guāpiàn): खाली पत्ता (बिना कोंपल) से बनल अनोखा ग्रीन टी। आकृति — “कुम्हड़ा के बीया”। खुशबू — ताजा, घासियाह-फूलदार। स्वाद — ढेर “हरियर” आ “ताजगी भरल”, दा फांग से कम “गहिर।”

अंत में:

डिंग गु दा फांग — इ चाय-पुरखा ह: शांत, चुपचाप, कइयो के भुलाइल — आ एकरे बावजूद दुनिया के सभसे परसिद्ध चपटा ग्रीन टी परंपरा के मूल में खड़ा बा। भिक्षु दा फांग, “सुघर भौंह आ घन दाढ़ी-मूँछ वाला, जइसे देवता नियर उड़त,” आपन हाथ से ऊ तकनीक बनवलें जवन सदियन बाद दुनिया के लोंगजिंग दिहलस। बाकिर दा फांग खुद आपन परबतन पर रहि गइल — लाओझुलींग के खड्डन में, बाँस के बगीचा आ सबेरे के कुहासा के बीच, जहाँ आजु भी एकरा हाथ से बनावल जाला, साल में तीन टन।

सिंघाड़ा के खुशबू, गाढ़ मीठ स्वाद, चपटा चायदानी जिनहन में चिकन सतह के नीचे सोनहरी रोम लुकाइल बा — इहे सब डिंग गु दा फांग ह। इ चाय ओह लोग खातिर जे ग्रीन टी में फैशन ना, गहिराई खोजेलें; हल्कापन ना, चरित्र। “हुईझोउ के बिसरल खजाना” — 徽茶遗珍 — अपना घड़ी के इंतजार कर रहल बा। आ जे एकरा खोजिहें, ओकरा पूरा इनाम मिली।