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दान चोंग या शी श्यांग

Dān cóng yā shǐ xiāng · 单丛鸭屎香

दान चोंग या शी श्यांग के उत्पादन तकनीक में ऊलोंग चाय बनावे के परंपरागत तरीका आ चाओझोऊ क्षेत्र के बिसेस बिधि के मेल होला।

  • प्रकार: ऊलोंग (बिचला स्तर के किण्वन, 30-60%)। भुनाई के मात्रा बदल सके ला।
  • श्रेणी: उच्च कोटि के ऊलोंग चाय। ई दान चोंग (单丛, Dān Cóng) समूह के ह, जेकर मतलब “अकेल झाड़ी” भा “एकही झाड़ी से”।
  • उत्पत्ति: चीन, गुआंगदोंग (广东, Guǎngdōng) प्रान्त, चाओझोऊ (潮州, Cháozhōu) शहरी जिला, फेंगहुआंग परबत (凤凰山, Fènghuáng Shān), जेकरा फीनिक्स परबतो कहल जाला। ऊदून (乌崬) गाँव, ऊदून चोटी पर, सबसे परसिद्ध उपज के जगह ह।
  • भूगोलीय निर्देशांक: लगभग 23-24° उत्तरी अक्षांश, 116-117° पूर्वी देशांतर।

2. इतिहास आ सांस्कृतिक महत्व:

  • इतिहास: फेंगहुआंग परबत पर चाय के खेती के संस्कृति 900 बरिस से ढेर पुरान बा। दान चोंग चाय सभ, एगो अलग समूह के रूप में, लगभग 100-150 बरिस पहिले उभरल। या शी श्यांग सबसे पुरान आ परसिद्ध दान चोंग में से एगो ह।

  • नाम:

    • “दान चोंग” (单丛) – “अकेल झाड़ी” भा “एकही झाड़ी से”। इतिहास में, चाय के हर झाड़ी से अलग-अलग तूरल आ संसाधित कइल जात रहे, जेकरा चलते हर पौधा के ब्यक्तिगत बिसेसता बचल रहे। आजु एह नियम के कड़ाई से पालन हमेशा ना होला, बाकिर “दान चोंग” के मतलब आजु भी इहे बा कि चाय एगो खास किसिम/उपजाति के झाड़ी से, एकही छोट बगान के भीतर आवेला।
    • “या शी श्यांग” (鸭屎香) – “बत्तख के बिष्टा के खुसबू”। एह अनोखा नाम के उत्पत्ति के कई गो संस्करण बाड़ें:
      • किसान के कथा: सबसे परचलित कथा कहेला कि एगो किसान, जे ई मनमोहक खुसबू वाला चाय खोजले रहे, ओकर भेद बचावल चाहत रहे। जब पड़ोसी ओकरा से एह चाय के नाम पूछत रहें, उ जानबूझ के एकरा घिनौना नाम दे दिहलस ताकि ओह लोग के एकरा चाखे के मन ना करे।
      • माटी: एगो अउरी संस्करण एह नाम के संबंध ओह माटी के रंग आ संरचना से जोड़ेला जेह पर एह किसिम के पहिली झाड़ी उपजल – पीयर-भूअर, चिपचिपाहट वाली, बत्तख के बिष्टा नियर।
      • पतई के आकार: एगो अनुमान ई बा कि नाम पतई के आकार से जुड़ल बा, जवन सूखल रूप में बत्तख के बिष्टा के याद दियावे सकत रहे।
  • सांस्कृतिक महत्व: खराब सुनाई पड़े वाला नाम के बावजूद, या शी श्यांग सबसे आदरणीय आ महंग दान चोंग में से एगो ह। एकर बिसेस, चमकदार फूलदार खुसबू (जवन, जाहिर बा, बत्तख के बिष्टा के गंध से कवनो संबंध ना रखेले), भरपूर स्वाद आ कइयो बेर पानी चढ़ावल जाए के क्षमता खातिर एकर कदर कइल जाला।

3. बनस्पति बिबरण आ कच्चा माल:

  • उपजाति/किसिम: या शी श्यांग खाली चाय के नाम ना ह, बलुक फेंगहुआंग परबत प उपजे वाली चाय के झाड़ी सभ के एगो उपजातीय किसिम के नामो ह। सब दान चोंग नियर, या शी श्यांग कड़ाई से बनस्पति बिज्ञान के अरथ में कवनो किसिम ना ह, बलुक प्राकृतिक चयन आ अनोखा उपज के परिस्थिति से बनल एगो स्थानीय उपजाति ह। एह उपजाति के बिसेसता बा:
    • बड़हन पतई: या शी श्यांग के पतई आमतौर पर बड़, लमछर, साफ नस वाली होखेले।
    • गाढ़ पतई के बनावट: पतई के फलक गाढ़, चमड़ा नियर होखेला।
    • गहिरा हरियर पतई के रंग: पतई गहिरा हरियर रंग के होखेले, कबो-कबो नीला छवि लिहले।
    • बिसेस खुसबू: या शी श्यांग उपजाति में एगो तेज, बिसेस फूलदार खुसबू होखेला जे झाड़ी के बढ़ती के दौराने प्रकट हो जाला।
    • ढेर उपज: या शी श्यांग दान चोंग सभ में सबसे ढेर उपज देवे वाली उपजाति में से एगो ह।
  • तुराई: आमतौर पर बसंत में होला, बाकिर गर्मी आ पतझड़ में भी कइल जा सके ला। बसंत के या शी श्यांग सबसे कीमती मानल जाला।
  • तुराई के मानक: कली आ दू-तीन ऊपरी पतई तूरल जालीं, कबो-कबो चारो।
  • कच्चा माल के जरूरत: ऊँच। खाली सेहतमंद, बिना क्षतिग्रस्त पतई इस्तेमाल होखेली।

4. उपज-क्षेत्र (टेरुआर) आ उपज के बिसेसता:

  • फेंगहुआंग परबत (फीनिक्स परबत): गुआंगदोंग प्रान्त के उत्तर-पूरबी हिस्सा में स्थित परबती श्रेणी। परबत मुख्य रूप से ग्रेनाइट आ ज्वालामुखी चट्टान से बनल बाड़ें। मनोरम नजारा, साफ हवा आ भरपूर कुहासा खातिर बिसेस ह।
  • उपज के ऊँचाई: चाय के बगान समुद्र तल से 400 से 1500 मीटर के ऊँचाई प स्थित बाड़ें। ऊँच परबती चाय (1000 मीटर से ऊपर) के खास तवज्जो दिहल जाला, काहेंकि मानल जाला कि एहमें अउरी नफीस स्वाद आ खुसबू होखेला।
  • माटी: पहाड़ी माटी, अक्सर पथरीली, बढ़िया जल निकासी वाली, खनिज पदार्थ से भरपूर। जेह माटी पर या शी श्यांग उपजेला ओकर रंग अक्सर पीयराहूँ-भूअर होला।
  • जलवायु: उप-उष्णकटिबंधीय मानसूनी, गरम, नम जाड़ा आ गरम, बरखा वाला गर्मी। औसत सालाना तापमान लगभग 21°C। ढेर नमी आ बार-बार कुहासा चाय उपज खातिर आदर्श दसा बनावेला।
  • बिसेसता: फेंगहुआंग परबत प कइयो चाय के झाड़ी बहुते पुरान, कई सौ बरिस के उमिर के बाड़ीं। इनके “लाओ चोंग” (老枞) – “पुरान झाड़ी” कहल जाला। मानल जाला कि अइसन झाड़ी के चाय में अउरी गहिरा आ जटिल स्वाद होला। साथे-साथ, उपज के एगो खास बात इहो बा कि खाद आ कीटनाशक के बहुत कम इस्तेमाल भा पूरा तौर पर अनुपस्थित रहेला।

5. उत्पादन के तकनीक:

दान चोंग या शी श्यांग के उत्पादन तकनीक में ऊलोंग चाय बनावे के परंपरागत तरीका आ चाओझोऊ क्षेत्र के बिसेस बिधि के मेल होला।

  • तुराई (采摘 - cǎi zhāi): ऊपर बरनन कइल गइल बा।
  • मुरझावल (萎凋 - wěidiāo): तूरल पतई सभ के खुला आसमान (धूप भा छाँह में मुरझावल) भा घर के भीतर कई घंटा खातिर पसरा दिहल जाला। मकसद – पतई से कुछ नमी हटाके ओकरा नरम बनावल आ किण्वन के प्रक्रिया सुरू करावल।
  • झटकारल/हिलावल (摇青 - yáo qīng): पतई सभ के बाँस के ट्रे पर सावधानी से झटकारल आ पलटल जाला। ई चरण कई बेर कइल जाला आ बीच-बीच में पतई के “आराम” देवे खातिर रुकल जाला। या शी श्यांग खातिर आमतौर पर एकरा सावधानी से कइल जाला ताकि पतई के सलामती बचल रहे आ फूलदार खुसबू बिकसित हो सके।
  • किण्वन (发酵 - fājiào): ऑक्सीकरण के प्रक्रिया, जे पतई हिलावे आ “आराम” देवे के दौरान होला। या शी श्यांग के किण्वन के मात्रा आमतौर पर बिचला (30-60%) होला, लेकिन उत्पादक आ चाहल स्वाद प्रोफाइल के अनुसार बदल सकेला।
  • ‘हरियरी के हत्या’ (杀青 - shā qīng): किण्वन के रोके खातिर बहुते तेज आँच पर भूनल। या शी श्यांग खातिर एह चरण पर अक्सर बहुत तेज तापमान के इस्तेमाल ना होला ताकि फूलदार सुगंध बचल रहे।
  • बटोरल/मरोरल (揉捻 - róuniǎn): पतई सभ के लमछर-बटल रूप दिहल जाला। बटोरे के काम हाथ से भा मसीन से हो सकेला। या शी श्यांग खातिर, आमतौर पर लमछर बटाई कइल जाला जे पतई के आकार के उभारेला।
  • सुखावल (烘干 - hōnggān): चाय के नमी हटावे खातिर सुखावल जाला। चाहल स्वाद प्रोफाइल के अनुसार, एह चरण पर हलुक भा अधिका तीव्र भुनाई कइल जा सकेला।
  • छँटाई (分级 - fēnjí): तइयार चाय के आकार आ गुणवत्ता के अनुसार छाँटल जाला।

6. इंद्री-बोध (ऑर्गेनोलेप्टिक) बिसेसता:

  • सूखल पतई के बाहरी रूप: तुलनात्मक रूप से बड़, लमछर-बटल पतई, गहिरा भूअर, भुअर रंग के साथ ललछाहूँ आभा। डंठल रह सकेला। कबो-कबो सोनहरा रोम से ढँकल टिप्स देखाई पड़ेला, बाकिर उतना भरपूर मात्रा में ना जेतना सफेद चाय में।
  • सूखल पतई के खुसबू: बहुते चमकदार, तीव्र, फूलदार, अइसन बिसेस गंध के साथ जेकरा दूसर दान चोंग से भरम होना मुस्किल बा। नाम के बावजूद, खुसबू में कवनो अप्रिय गंध नइखे। एकरे बजाय, फूलदार गंध प्रमुख होला, जेकरा अक्सर गार्डेनिया, चमेली, घाटी के कुमुदिनी, चम्पा से जोड़ल जाला, साथे में क्रीम बिस्कुट, कंडेंस्ड दूध, उष्णकटिबंधी फल के संकेतो मिलेला। भुनाई के बारीकी भी हो सकेला।
  • अरक के खुसबू: भरपूर, लपेट लेवे वाला, मीठ, जेह में फूलदार गंध प्रमुख होला, फल, शहद के संकेत, कबो-कबो हलुक खटास।
  • स्वाद: भरपूर, गाढ़, मक्खन नियर चिकनाहट वाला, हलुक मिठास के साथ, हलुक कसैलापन आ ताजगी देवे वाली खटास के साथ। स्वाद के गुलदस्ता में फूलदार गंध प्रमुख होला, फल (आड़ू, लीची, आम), शहद, क्रीम के बारीक संकेत के साथ, आ लमहर, मीठ बाद-स्वाद।
  • अरक के रंग: सुनहरा-पीयर से लेके अम्बर-नारंगी, पारदर्शी, साफ। अरक के रंग किण्वन आ भुनाई के मात्रा पर निर्भर करेला।
  • चाय के तली (पानी चढ़ल पतई): साबुत, लचकदार पतई, जे पानी चढ़ला के बाद खुल गइल बाड़ी, लालिमा लिहले किनारा के साथ भूअर-हरियर रंग के।

7. रासायनिक संरचना:

दान चोंग या शी श्यांग इन चीजन से भरपूर होला:

  • पॉलीफेनॉल (केटेचिन): एंटीऑक्सीडेंट।
  • एमिनो एसिड: एह में एल-थेनीन सामिल बा।
  • एल्कलॉइड: कैफीन, थियोब्रोमीन, थियोफिलिन।
  • वाष्पशील तेल: खासकर फूलदार खुसबू वाला, एह के मात्रा ढेर।
  • बिटामिन: सी, बी समूह, ई, के।
  • खनिज: पोटैशियम, फ्लोरीन, मैग्नीशियम, मैंगनीज, लोहा।

8. फायदेमंद गुन:

  • टॉनिक असर: स्फूर्ति देला, थकान हटावेला, काम करे के क्षमता बढ़ावेला, एकाग्रता में सुधार करेला।
  • एंटीऑक्सीडेंट काम: कोशिका सभ के मुक्त कण से क्षति से बचावेला, बुढ़ापा के प्रक्रिया धीमा करेला।
  • पाचन में सुधार: पाचन के उत्तेजित करेला, भोजन के अवशोषण में मदद करेला।
  • गरमाहट देवे वाला असर: जाड़ा के मौसम में बढ़िया से शरीर गरम करेला।
  • हृदय-रक्तवाहिका तंत्र: “खराब” कोलेस्ट्रॉल के स्तर घटावे में, रक्तवाहिनी के देवाल के मजबूत करे में सहायक हो सकेला।
  • आराम देवे वाला असर: टॉनिक असर के बावजूद, चाय में मौजूद खुसबू आ एल-थेनीन आराम आ तनाव दूर करे में मदद करेला।
  • मूड अच्छा करे: समरसता, खुसी आ आनंद के अनुभव करावेला।

9. पानी चढ़ावल (बनावल):

  • पानी के तापमान: 90-95°C (अधिकतर किसिम खातिर)। हलुक भुनल आ ढेर हरियर विकल्प खातिर 85-90°C पानी इस्तेमाल कइल जा सकेला।

  • चाय के मात्रा: 150-200 मिली पानी खातिर 5-7 ग्राम।

  • बर्तन: गैवान (ढक्कन वाला परम्परागत चीनी कप) भा ईसिंग माटी के मिट्टी के चायदानी आदर्श होला। चीनी मिट्टी के बर्तन भी इस्तेमाल कइल जा सकेला।

  • प्रक्रिया:

    1. बर्तन गरम कईल: गैवान भा चायदानी के उबलत पानी से खंगाल लीं।
    2. चाय धोवल (जल्दी से पानी गिरा दीं): चाय गैवान में डालीं, थोड़ा गरम पानी घोलीं आ तुरंत पानी गिरा दीं।
    3. पहिला पानी चढ़ावल: चाय प गरम पानी (90-95°C) घोलीं आ कुछ सेकंड से 1 मिनट (पहिला उड़ेल) ले पानी में रहे दीं। पहिला पानी चढ़ावे के समय बहुत कम, मने 5-15 सेकंडो, रह सकेला, खासकर अगर चाय बढ़िया गुणवत्ता के होखे।
    4. अरक प्याला में बाँटीं: गैवान भा चायदानी से पूरा अरक चाहाय (न्याय-पात्र) में छान लीं, फेर प्याला में बाँट दीं।
    5. बार-बार पानी चढ़ावल: दान चोंग या शी श्यांग प कइयो बेर (7-10 बेर, कबो-कबो ढेरो) पानी चढ़ावल जा सकेला, हर अगिला उड़ेल के साथ पानी में रहे के समय 10-30 सेकंड धीरे-धीरे बढ़ावत जाईं। हर बेर पानी चढ़ावे से चाय के स्वाद आ खुसबू बदलत जाई, नया पहलू खुलत जाई।

जरूरी बारीकी:

  • ढेर देर ना रखीं: बहुत देर ले पानी में रहे देवे से चाय के स्वाद कसैला आ करवा हो सकेला।
  • चाय के सुनीं: आपन अनुभव के हिसाब से समय तय करीं आ चाहल अरक के ताकत के अनुसार पानी में रहे के समय में फेरबदल करीं।
  • चाय के देखीं: अरक के रंग, खुसबू, चाय के पतई के खुलल रूप पर धियान दीं।

10. भंडारण:

दान चोंग या शी श्यांग के सूखा, अँधेरा, ठंढा जगह पर, हवाबंद डिब्बा (माटी, चीनी मिट्टी, काँच भा टीन के डिब्बा) में, बाहरी गंध से दूर राखे के चाहीं। 11. दाम आ नकली चीज:

दान चोंग या शी श्यांग महंग, उच्च कोटि के चाय में गिनल जाला। एकर दाम बहुत बड़ा दायरा में बदल सकेला, प्रति 100 ग्राम कई दर्जन डॉलर से लेके कई सौ डॉलर, आ कबो-कबो ओकरा ले ढेरो, एह बात पर निर्भर करेला:

  • झाड़ी के उमिर: पुरान झाड़ी के चाय (“लाओ चोंग”) के दाम बहुत ढेर।
  • उपज के ऊँचाई: ऊँच परबती चाय (1000 मीटर से ऊपर) अधिका महंग।
  • कच्चा माल के गुणवत्ता: का चुनिंदा कली आ जवान पतई इस्तेमाल भइल बा भा पाकल कच्चा माल।
  • उत्पादक के कारीगरी: चाय बनावे वाला मास्टर के अनुभव आ प्रतिष्ठा दाम पर काफी असर डालेला।
  • भुनाई के मात्रा आ गुणवत्ता: अनुभवी कारीगर द्वारा कोयला प हाथ से भुनल चाय के कीमत काफी बढ़ जाला।
  • दुर्लभता: सीमित उत्पादन मात्रा आ ऊँच माँग एकरा महंग बनावेला।
  • माँग: दान चोंग सभ के ऊँच माँगो दाम प्रभावित करेला।

ऊँच दाम आ लोकप्रियता के चलते, बाजार में दुर्भाग्य से ढेर नकली आ नकल मौजूद बाड़ी स। नकली से कइसे बचीं:

  • खाली बिस्वास जोग बिक्रेता से खरीदीं: बढ़िया प्रतिष्ठा वाला बिसेस चाय के दोकान खोजीं, जे आपन गाहकन के कदर करेलीं आ चाय के उत्पत्ति, तुराई के बरिस, उत्पादक के बारे में बिस्वास जोग जानकारी दे सकेलीं। ओह लोग के एकर असलियत आ गुणवत्ता के गारंटी भी देवे के चाहीं।
  • बहुत कम दाम से सावधान रहीं: संदेहास्पद रूप से कम दाम लगभग हमेशा नकली होखे के पक्का संकेत ह। असली दान चोंग या शी श्यांग सस्ता ना हो सके। याद राखीं, चमत्कार ना होखे।
  • बाहरी रूप के धियान से जाँचीं: पतई के आकार, रंग, सलामती पर धियान दीं। ऊपर दिहल बिबरण से मेल खाए के चाहीं। बहुत ढेर टूटल पतई, धूर, बाहरी मिलावट नीच गुणवत्ता भा नकली होखे के संकेत ह।
  • खुसबू के आँकलन करीं: सूखल चाय में बहुते भरपूर, जटिल खुसबू होखे के चाहीं जेह में बिसेस फूलदार गंध (गार्डेनिया, चमेली, घाटी के कुमुदिनी), क्रीम बिस्कुट, कंडेंस्ड दूध, उष्णकटिबंधी फल के संकेत। कमजोर, नीरस, बासी भा बाहरी गंध वाला चाय से बचीं। बेईमान बिक्रेता कबो-कबो जवन कृत्रिम खुसबू लगावेलें, ऊ आमतौर पर बहुत तेज, अप्राकृतिक गंध से पहिचानल जा सकेला।
  • अरक आ चाय के तली के जाँचीं: अरक के रंग सुनहरा-पीयर से अम्बर-नारंगी, पारदर्शी होखे के चाहीं। चाय के तली में साबुत, लचकदार पतई होखे के चाहीं।
  • पुरान झाड़ी (“लाओ चोंग”) भा ऊदून गाँव के या शी श्यांग खरीदत घरी बिसेस सावधान रहीं: सीमित उत्पादन आ ऊँच माँग के चलते, एह श्रेणी के चाय सबसे ढेर नकली बनावल जाला।

12. रोचक तथ्य:

  • “बत्तख के बिष्टा” – छल के चाल: जइसन कहानी ह, जे किसान पहिले एह किसिम के खोज कइले रहे, उ जान-बूझ के खराब गंध के अफवाह फइलावत रहे ताकि प्रतिद्वंद्वी डर जाइँ आ चाय के भेद बचल रहे।
  • ढेर उपज: या शी श्यांग दान चोंग सभ में सबसे ढेर उपज देवे वाली किसिम में से ह, जेकरा चलते ई दूसर दुर्लभ किसिम सभ के तुलना में अपेक्षाकृत अधिका सुलभ बा।
  • चाय-गिरगिट: या शी श्यांग के खुसबू फसल के साल, उपज के जगह आ प्रसंस्करण तकनीक के अनुसार बदल सकेला, बाकिर फूलदार गंध (खासकर गार्डेनिया) एकर स्थायी बिसेसता बनल रहेला।

13. दूसर दान चोंग से तुलना:

  • मी लान श्यांग (蜜兰香 - “शहद आर्किड के खुसबू”): एकरा या शी श्यांग के “रिस्तेदार” मानल जाला, काहेंकि दुनो किसिम एकही क्षेत्र से आवेलीं आ इनकर बिसेसता मिलत-जुलत बा। मी लान श्यांग में आमतौर पर खुसबू में शहद के गंध अधिका प्रमुख होला, जबकि या शी श्यांग में फूलदार (गार्डेनिया, चमेली) प्रमुख होला।
  • झी लान श्यांग (芝兰香 - “झी लान आर्किड के खुसबू”): एकर खुसबू अउरी नफीस आ बढ़िया फूलदार होला, जेह में आर्किड के गंध प्रमुख होला। या शी श्यांग के खुसबू अधिका चमकदार आ भरपूर होला, जेह में बिबिधता अधिका होला।
  • शी रेन श्यांग (杏仁香 - “बादाम के खुसबू”): एह दान चोंग में बिसेस बादाम के खुसबू होला, जे एकरा या शी श्यांग से अलग पहिचान देला।
  • रोऊ गुई श्यांग (肉桂香 - “दालचीनी के खुसबू”): एकर दालचीनी के तेज खुसबू होला, जवन एकरा या शी श्यांग से एकदम अलग बनावेला।

14. वैकल्पिक नाम आ समनाम:

कबो-कबो ई दावा भी मिलेला कि “दा ऊ ये” (大乌叶) या शी श्यांग के वैकल्पिक नाम ह, बाकिर ई पूरा तरह से सही नइखे

  • दा ऊ ये (大乌叶, Dà Wū Yè): एकर अनुवाद “बड़हन करिया पतई” होला। ई चाय के झाड़ी के एगो अलग किसिम ह, जवन दान चोंग में आवेला, लेकिन या शी श्यांग के समानार्थी ना ह। एह में पतई अउरी बड़ होला आ स्वाद-खुसबू के प्रोफाइल कुछ अलग होला। हालाँकि, कुछ उत्पादक “या शी श्यांग” नाम से चाय बनावे खातिर दा ऊ ये के पतई इस्तेमाल कर सकेलें, जेकरा से भरम पैदा होला

निष्कर्ष में:

दान चोंग या शी श्यांग एगो अनोखा आ मनमोहक ऊलोंग ह, जवन आपन अरुचिकर नाम के बावजूद दुनिया भर के चाय पारखी लोग के दिल जीत लेले। एकर चमकदार, बहुआयामी फूलदार खुसबू जेह में गार्डेनिया, चमेली आ क्रीम बिस्कुट के गंध, फल आ शहद के संकेत के साथ भरपूर, गाढ़ स्वाद, आ लमहर, मीठ बाद-स्वाद एकरा ऊलोंग सभ के बीच एगो सच्चा रतन बनावेला। ई चाय खाली पेय पदार्थ ना ह, बलुक कला के एगो सच्चा कृति ह, जे प्रकृति के साथ तालमेल में रचल गइल बा आ सदियन पुरान परंपरा से निखारल गइल बा। असली दान चोंग या शी श्यांग के स्वाद चाखल माने फीनिक्स परबत के अद्भुत दुनिया के दर्शन, प्राचीन चाय के झाड़ी सभ के ऊर्जा आ ताकत के एहसास, आ सच्चा चाय के उत्कृष्टता के आनंद उठावल। ई चाय खास अवसर, आराम से, गहिराई से सोच-समझ के चाय पीए खातिर बा, जब नफीस स्वाद आ खुसबू के दुनिया में डूब के समरसता के एहसास करे आ अविस्मरणीय छाप छोड़े के मन करे।