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दा शू चा

Dà shù chá · 大树茶

दा शू चा के उत्पादन तकनीक बिसेस प्रकार के चाय (शेंग पुएर, शू पुएर, लाल, सफेद वगैरह) पर निर्भर करेला। सामान्य सिद्धांत:

  • प्रकार:बिबिध प्रकार के चाय से संबंधित हो सकेला: प्रायः ई शेंग पुएर, शू पुएर, लाल चाय होला, कम अक्सर सफेद, हरियर भा उलोंग। प्रकार प्रसंस्करण तकनीक से तय होला, पेड़ के उमिर से ना।
  • श्रेणी: उच्च गुणवत्ता वाली, विशिष्ट चाय। कच्चा माल (पेड़न के उमिर) के खासियत आउर चाय के विशेषता पर एकर परभाव के कारण एकरा अलग श्रेणी में राखल जाला।
  • उत्पत्ति: ऐतिहासिक रूप से आउर आजकल बेसी हद तक – युन्नान प्रांत (云南, Yúnnán), चीन। इहे सबसे ढेर प्राचीन आउर पुरान चाय के पेड़ बचल बा। हाल के बरिसन में पुरान पेड़न से कच्चा माल दोसर जगहन प भी इकट्ठा कइल जाला, जइसे फुजियान प्रांत (福建, Fújiàn) में, लेकिन ई कम पारंपरिक ह आउर अइसन चाय कम पावल जालीं।
  • भूगोलीय निर्देशांक: कच्चा माल के संग्रह के विशिष्ट जगह पर निर्भर। युन्नान में पुरान चाय के पेड़ सिशुआंगबाना (西双版纳, Xīshuāngbǎnnà), पुएर (普洱, Pǔ’ěr), लिंकांग (临沧, Líncāng) अउर बाकी जिला में पावल जालें।

2. इतिहास आउर सांस्कृतिक महत्व:

  • इतिहास: युन्नान प्रांत में चाय के पेड़ हजारन बरिस से उगत रहल बा। स्थानीय जनजाति प्राचीन काल से जंगली चाय के पेड़न के पतई तोड़ के खाए आउर दवाई के रूप में इस्तेमाल करत रहलीं। समय के साथ चाय के खेती होखे लागल, लेकिन जंगली आउर पुरान पेड़न से कच्चा माल जमा करे के परंपरा बचल रहल। हाल के दसक में पुएर आउर बाकी युन्नानी चायन के लोकप्रियता बढ़ला के साथ पुरान पेड़न के चाय (दा शू) के खास महत्व मिलल आउर ई अलग श्रेणी बन गइल।

  • नाँव:

    • “दा” (大) - बड़हन, विशाल।
    • “शू” (树) - पेड़।
    • “चा” (茶) - चाय।
  • सांस्कृतिक महत्व: दा शू चा खाली चाय नइखे, ई प्रकृति, इतिहास आउर परंपरा से जुड़ाव ह। एकर कदर एकर “मूल अवस्था”, “जंगलीपन”, “प्राकृतिकता” खातिर कइल जाला। मानल जाला कि पुरान पेड़, जे बिना मनुष्य के तेज दखल के प्राकृतिक हालत में उगत बा, अपना पतई में खास ऊर्जा आउर ताकत जमा करेला आउर चाय तक पहुँचावेला। ढेर पारखी दा शू चा के जरिये कुछ प्राचीन, असली चीज के छूवे, सदियन पहिले जइसन असली चाय के स्वाद आउर सुगंध महसूस करे के मोका मानेलें।

3. वानस्पतिक बिबरन आउर कच्चा माल:

  • किसिम: दा शू चा के उत्पादन खातिर प्रायः बड़हन पत्ता वाली किसिम युन्नान दा ये झोंग (云南大叶种, Yúnnán Dàyèzhǒng) आउर एकर उप-किसिम इस्तेमाल होला, जे प्रजाति Camellia sinensis var. assamica से संबंधित बा। हाल के बरिसन में पुरान पेड़ से कच्चा माल बाकी जगहन (जइसे, फुजियान में) भी इकट्ठा होला, लेकिन ओह जगह ई प्रायः असमिका ना होके Camellia sinensis var. sinensis होला।
  • पेड़ के उमिर: दा शू श्रेणी में प्रायः 50-60 से 100 बरिस के उमिर के चाय के पेड़ गिनल जालें। एकरे से कम उमिर के पौधा के “श्याओ शू” (小树, Xiǎo Shù) – “छोट पेड़/झाड़ी” श्रेणी में राखल जाला, आउर एकरे से पुरान के “गू शू” (古树, Gǔ Shù) – “प्राचीन पेड़” (100 बरिस से अधिका)। पेड़ के उमिर पतई के रासायनिक संरचना के परभावित करेला, आउर एही से चाय के स्वाद, सुगंध आउर परभाव प भी। पेड़ जेतना पुरान होला, चाय ओतेने बेसी जटिल, गहिर आउर संतुलित बनल रहेला।
    • महत्वपूर्ण: चाय के पेड़ के उमिर सटीक रूप से तय करल बहुते कठिन बा, एही से अक्सर अनुमान लगावल जाला। कुछ बेईमान बिक्रेता पेड़ के उमिर बढ़ा चढ़ा के बता सकेलें ताकि चाय के दाम बढ़ावल जा सके।
  • तुड़ाई: मुख्य रूप से बसंत में होला, लेकिन गर्मी आउर पतझर में भी कइल जा सकेला। सबसे किमती बसंत के दा शू चा मानल जाला।
  • तुड़ाई के मानक: उत्पादक आउर चाय के प्रकार पर निर्भर करेला। कली आउर एक-दू गो ऊपरी नया पत्ता जोड़ा तक तोड़ सकतारें, भा बेसी पाकल पतई भी। विशिष्ट चाय खातिर खाली सबसे कोमल कच्चा माल इस्तेमाल होला।
  • कच्चा माल खातिर जरूरत: ऊँच। खाली स्वस्थ, बेजोड़ पत्ता आउर कली इस्तेमाल होला, जे चुनिंदा पेड़न से तोड़ल जाला। तुड़ाई बड़ी सावधानी से हाथ से कइल जाला।

4. टेरुआर आउर खेती के खासियत:

  • युन्नान प्रांत: अपना पहाड़ी भू-आकृति, उपोष्णकटिबंधीय आउर उष्णकटिबंधीय जलवायु, उपजाऊ माटी आउर चाय के पौधन के बिबिधता खातिर जानल जाला।
  • फुजियान प्रांत: अपना उलोंगन खातिर जानल जाला, लेकिन हाल के दिन में इहाँ भी जंगली आउर पुरान पेड़न से कच्चा माल के संग्रह के दिशा बिकसित हो रहल बा।
  • ऊँचाई: पुरान चाय के पेड़ समुद्र स्तर से 1000 से 2300 मीटर आउर एकरे से ऊपर के ऊँचाई पर उगत बा।
  • माटी: बिबिध, खनिज पदार्थन से भरपूर।
  • जलवायु: आद्र, भरपूर बरखा, बार-बार कुहासा आउर दिन-रात के तापमान में भारी अंतर वाला।
  • पारिस्थितिकी: पुरान चाय के पेड़ प्रायः उद्योगिक केन्द्रन से दूर, पारिस्थितिक रूप से साफ इलाका में उगत बा।
  • जैव बिबिधता: पुरान चाय के पेड़ अक्सर बाकी पौधन के बीचा-बीची उगत बा, आउर संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र बनावेला। ई पत्तन के रासायनिक संरचना के परभावित करेला आउर चाय के अनोखा स्वाद-सुगंध विशेषता देला।
  • खासियत: दा शू चा के मुख्य खासियत चाय के पेड़न के उमिर आउर उनकर प्राकृतिक उपज के हालात बा। मानल जाला कि पुरान पेड़न के जड़ गहिराई तक धरती में जाला, ढेर खनिज आउर पोषक तत्व सोख लेला, जेकरा से चाय बेसी भरपूर आउर फायदेमंद बनेला। एकरे अलावा, बिना खाद आउर कीटनाशक के प्राकृतिक बासस्थान चाय के खास “जंगलीपन” आउर “शुद्धता” देला।

5. उत्पादन तकनीक:

दा शू चा के उत्पादन तकनीक बिसेस प्रकार के चाय (शेंग पुएर, शू पुएर, लाल, सफेद वगैरह) पर निर्भर करेला। सामान्य सिद्धांत:

  • न्यूनतम दखल: मुख्य लक्ष्य – प्रकृति से मिलल चाय के पत्ता के प्राकृतिक गुण के अधिकतम बचाए रखल।
  • पारंपरिक तरीका: अक्सर समय-परीक्षित पारंपरिक प्रसंस्करण बिधि इस्तेमाल होला।
  • हाथ के काम: उत्पादन के ढेर चरण, खास क के तुड़ाई आउर छँटनी, हाथे से कइल जाला।

6. ऑर्गेनोलेप्टिक विशेषता:

दा शू चा के ऑर्गेनोलेप्टिक विशेषता बहुत हद तक बिसेस प्रकार के चाय (शेंग पुएर, शू पुएर, लाल, सफेद वगैरह), पेड़न के उमिर, टेरुआर, तुड़ाई के मौसम आउर प्रसंस्करण तकनीक पर निर्भर करेला। फिर भी कुछ साझा लच्छन बतावल जा सकेला:

  • बाहरी रूप: चाय के प्रकार पर निर्भर। शेंग पुएर खातिर बड़हन, गूदेदार पत्ता, अक्सर रोवाँदार होला। शू पुएर खातिर गहिर भूअर पत्ता होला। लाल चाय खातिर मरोरल पत्ता, अक्सर सुनहरी टिप्स वाला।
  • सुगंध: प्रायः जवान झाड़ी के चाय के तुलना में बेसी गहिर, जटिल आउर टिकाऊ होला। सुगंध में सूखा फल, फूल, शहद, अखरोट, लकड़ी, मसाला, माटी, पुरान किताब, कपूर वगैरह के नोट हो सकेला। चाय के प्रकार आउर उमिर के अनुसार सुगंध बदल जाला।
  • स्वाद: भरपूर, संतृप्त, बहुआयामी, संतुलित। अक्सर मिठास, हल्का कसैलापन भा तीतापन, लमहर, ढक लेवे वाला बाद-स्वाद मौजूद रहेला। चाय के प्रकार आउर उमिर के अनुसार स्वाद भी बदल जाला। खास लच्छन तथाकथित स्वाद के “जंगलीपन” होला, जेकरा शब्दन में बरनन करल मुश्किल बा, लेकिन जे पुरान पेड़ के चाय के बगानी चाय से अलग करेला।
  • रस के रंग: चाय के प्रकार पर निर्भर। शेंग पुएर में – हल्का पीयर से एम्बर-भूअर, शू पुएर में – गहिर भूअर, लगभग करिया, लाल चाय में – एम्बर-लाल।
  • चाय के पेंदी: चाय के प्रकार पर निर्भर। प्रायः पूरा, लचीला पत्ता होला।

7. रासायनिक संरचना:

दा शू चा प्रायः जवान झाड़ी के चाय के तुलना में बेसी धनी रासायनिक संरचना से अलग होला:

  • पॉलीफेनोल: पॉलीफेनोल के ऊँच मात्रा, जेह में कैटेचिन, थियाफ्लाविन, थियारूबिगिन शामिल बा।
  • एमिनो एसिड: एमिनो एसिड से भरपूर, खास क के L-थियानिन।
  • एल्केलॉइड: कैफीन, थियोब्रोमिन, थियोफिलिन।
  • ईथर के तेल: जटिल संरचना वाला ईथर के तेल, जे बहुआयामी सुगंध के कारण बनेला।
  • विटामिन: C, ग्रुप B, E, K।
  • खनिज: पोटैशियम, फ्लोरीन, मैग्नीशियम, मैंगनीज, लोहा, सेलेनियम वगैरह।

8. फायदेमंद गुण:

दा शू चा के फायदेमंद गुण चाय के प्रकार (शेंग, शू, लाल, सफेद वगैरह) से तय होला आउर मानल जाला कि पेड़ के उमिर आउर प्राकृतिक उगाई के हालत से ई बढ़ जालें। सामान्य फायदेमंद गुण:

  • शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट परभाव: कोशिका के मुक्त कण से होखे वाली क्षति से बचावेला, बुढ़ापा के प्रक्रिया धीमा करेला, ढेर बेमारियन के खतरा घटावेला।
  • टॉनिक परभाव: स्फूर्ति देला, एकाग्रता बढ़ावेला, थकान दूर करेला, लेकिन कॉफी के तुलना में नरमी से काम करेला।
  • पाचन में सुधार: पाचन के उत्तेजित करेला, भोजन के पचावे में सहायक।
  • हृदय-संवहनी तंत्र: दिल आउर नस पर सकारात्मक परभाव डाल सकेला।
  • विषहरण: शरीर से बिष बाहर निकाले में सहायक।
  • प्रतिरक्षा मजबूत: शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ावेला।
  • खास ऊर्जा: ढेर पारखी पुरान पेड़ के चाय के शरीर आउर चेतना पर खास, शक्तिशाली परभाव के नोट करेलें, तथाकथित “चा ची” (茶氣 – “चाय के ची”)।

9. बनावे के बिधी:

दा शू चा बनावे के तरीका बिसेस प्रकार के चाय पर निर्भर करेला। सामान्य सलाह:

  • पानी के तापमान: शेंग पुएर खातिर – 85-95°C, शू पुएर खातिर – 95-100°C, लाल चाय खातिर – 90-95°C, सफेद चाय खातिर – 70-85°C।
  • चाय के मात्रा: 150-200 मि.ली. पानी खातिर 5-7 ग्राम।
  • बर्तन: गायवान, इशिंग माटी के चायदानी, चीनी माटी के बर्तन।
  • प्रक्रिया: बर्तन गरम करल, चाय धोवल (पुएर खातिर), छोट-छोट डाल के बनावल आउर धीरे-धीरे भीगे के समय बढ़ावल।
  • डाल के संख्या: चाय के प्रकार आउर कच्चा माल के गुणवत्ता पर निर्भर। नीमन दा शू चाय कई बेर (7-10 आउर ढेर) बनावल सह सकेला।

10. भंडारण:

भंडारण के हालात चाय के प्रकार पर निर्भर। शेंग पुएर, जइसे कि कुछ अउरी पुरान पेड़ के चाय, लमहर समय के भंडारण आउर पाके खातिर बनल होला। इनकर भंडारण सूखा, अन्हार, हवादार जगह, “साँस लेवे वाला” बर्तन (माटी, सिरेमिक, कागज) में कइल जाला। शू पुएर, लाल आउर सफेद चाय के बंद बर्तन में, सूखा, ठंढा, अन्हार जगह राखल जाला।

11. दाम आउर नकल:

दा शू चा महँग, विशिष्ट चाय के श्रेणी में आवेला। ऊँच दाम के कारण:

  • पेड़ के उमिर: पुरान पेड़ से कच्चा माल के कदर बहुत बेसी कइल जाला।
  • सीमित मात्रा: पुरान चाय के पेड़ ढेर नइखे।
  • संग्रह के कठिनाई: पुरान पेड़, खासकर जंगली, से कच्चा माल जमा करल कष्टकर आउर अक्सर खतरनाक होला।
  • कच्चा माल के ऊँच गुणवत्ता: पुरान पेड़ बेसी संतृप्त स्वाद, सुगंध आउर शक्तिशाली परभाव वाली चाय देला।
  • ऊँच माँग: दा शू चा के माँग लगातार बढ़त बा।

ऊँच दाम आउर लोकप्रियता के कारण, बाजार में दुर्भाग्य से, ढेर नकल आउर नकली सामान मौजूद बा।

नकल से कइसे बचीं:

  • खाली भरोसेमंद बिक्रेता से खरीदीं: बेदाग प्रतिष्ठा वाला विशेष चाय के दूकान खोजीं, जे अपना ग्राहकन के कदर करेलें आउर चाय के उत्पत्ति, पेड़ के उमिर, उत्पादक के बारे में भरोसेमंद जानकारी दे सकेलें।
  • बहुते कम दाम से सावधान रहीं: संदेहास्पद रूप से कम दाम लगभग हमेशा नकल के पक्का निशानी होला। असली दा शू चा सस्ता ना हो सके।
  • बाहरी रूप ध्यान से देखीं: पत्ता पूरा होखे के चाहीं, बिसेस प्रकार के चाय के बरनन से मेल खाए के चाहीं। टूटल पत्ता, धूरि, पराया कण के ढेर मात्रा कम गुणवत्ता के निशानी ह।
  • सुगंध के परख करीं: सूख चाय में ओह प्रकार के चाय खातिर बिसेस सुगंध होखे के चाहीं, बिना पराया गंध के।
  • रस के जाँच करीं: रस के रंग, स्वाद आउर सुगंध बरनन के अनुसार होखे के चाहीं।
  • पेड़ के उमिर पर ध्यान दीं: अगर बतावल गइल होखे त पेड़ के उमिर के जानकारी के जाँच करीं। याद राखीं कि उमिर के जाँच मुश्किल बा, एही से खाली भरोसेमंद स्रोत पर भरोसा करीं।
  • जाँच खातिर थोड़ी मात्रा खरीदीं: महँग चाय के बड़हन खेप खरीदे से पहिले, गुणवत्ता परखे खातिर थोड़ी मात्रा जाँच लीं।

12. दिलचस्प तथ्य:

  • चाय के “टेरुआर”: युन्नान में, शराब बनावे नियर, “टेरुआर” के धारणा – माटी-जलवायु दशा के समुच्चय के कदर कइल जाला, जे चाय के स्वाद आउर सुगंध पर परभाव डालेला। अलग-अलग पहाड़, घाटी आउर अलग-अलग पेड़ भी अनोखा खासियत वाली चाय दे सकेलें।
  • “जंगली” चाय: कुछ प्रकार के दा शू चा जंगली चाय के पेड़न से तोड़ल जाला, जेकरा से उ आउर बेसी दुर्लभ आउर किमती बनेला।
  • चाय आउर सेहत: पारंपरिक चीनी चिकित्सा में पुरान पेड़ के चाय सेहत आउर लमहर आयु खातिर खास फायदेमंद मानल जाला।
  • शक्तिशाली परभाव: दा शू चा, खास क के शेंग पुएर, शरीर पर शक्तिशाली परभाव डालेला, एही से एकर सेवन सावधानी से, अपना अनुभूति सुनत करे के चाहीं।

13. युन्नान में दा शू चा के जानल-मानल उत्पादन क्षेत्र:

  • सिशुआंगबाना (Xishuangbanna):

    • ई वू (Yiwu): सबसे जानल-मानल आउर प्रतिष्ठित चाय क्षेत्र में से एक, अपना प्राचीन चाय के जंगल खातिर मशहूर। ई वू शेंग पुएर सबसे किमती आउर माँग वाला में से एक बा।
    • लाओ बान झांग (Lao Ban Zhang): गाँव जे अपना शक्तिशाली, भरपूर आउर महँग शेंग पुएर के पुरान पेड़ खातिर जानल जाला।
    • बू लांग शान (Bu Lang Shan): पहाड़ी इलाका जहाँ ढेर पुरान चाय के पेड़ बा। बू लांग शान के शेंग पुएर ताकतवर, कसैला स्वाद आउर शक्तिशाली परभाव से अलग होला।
    • मेंग सोंग (Meng Song): एक आउर जानल-मानल क्षेत्र जहाँ प्राचीन चाय के जंगल बा। संतुलित स्वाद आउर सुगंध खातिर कदर कइल जाला।
    • बा दा शान (Bada Shan): पहाड़ी क्षेत्र, अपना जंगली चाय के पेड़न खातिर जानल जाला।
    • नाका (Naka): गाँव जहाँ पुरान पेड़ के मशहूर शेंग पुएर बनेला, जेकर जटिल स्वाद आउर सुगंध होला।
    • मानझुआन (蛮砖, Mánzhuān): प्राचीन काल के “छह मशहूर चाय पहाड़” में से एक।
    • ईबांग (倚邦, Yǐbāng): प्राचीन काल के “छह मशहूर चाय पहाड़” में से एक आउर, अपना कोमल लेकिन भरपूर शेंग पुएर खातिर जानल जाला।
  • लिंकांग (Lincang):

    • बींग दाओ (Bing Dao): गाँव जे अपना पुरान पेड़ के शेंग पुएर खातिर मशहूर बा। बींग दाओ के चाय ऊँच दाम से अलग होला आउर इलाका के सबसे नीमन में से एक मानल जाला।
    • सीगुई (Xigui): अपना शक्तिशाली आउर सुगंधित शेंग पुएर खातिर जानल जाला।
    • मेंगकू (Mengku): लिंकांग में पुएर उत्पादन के सबसे बड़हन क्षेत्र में से एक।
  • पुएर (Pu’er):

    • जिंग माई (Jing Mai): पहाड़ी इलाका जहाँ प्राचीन चाय के बगीचा बा।

14. दा शू चा आउर चाय समारोह:

  • गोंगफू चा: दा शू चा, खास क के शेंग पुएर, गोंगफू चा – पारंपरिक चीनी चाय समारोह के बिधि से बनावे खातिर आदर्श होला। ई बिधि चाय के स्वाद आउर सुगंध के अधिकतम उजागर करे, आउर परक्रिया के आनंद उठावे के मोका देला।
  • बर्तन: बनावे खातिर गायवान भा इशिंग माटी के छोट चायदानी सबसे नीमन रहेला।
  • भोजन से संगति: दा शू चा के प्रायः भोजन के साथ पीए के चलन नइखे, ताकि एकर स्वाद आउर सुगंध पर असर ना पड़े। ई चाय अलग से, हर घूँट के आनंद लेत पीए के होला।
  • दिन के समय: पुरान पेड़ के शेंग पुएर दिन के पहिला हिस्सा में पीए के नीमन रहेला, काहे कि एकर टॉनिक परभाव होला। शू पुएर आउर लाल चाय कबो भी पियल जा सकेला।

15. बिकास के संभावना:

  • बढ़त माँग: दा शू चा के माँग चीन आउर बिदेस में लगातार बढ़त बा।
  • सीमित आपूर्ति: पुरान चाय के पेड़न के संख्या सीमित बा, आउर उमिर के साथ इनकर उत्पादकता घट जाला।
  • टिकाऊ बिकास: प्राचीन चाय के जंगल के बचावल आउर चाय के संग्रह आउर उत्पादन के टिकाऊ तरीका के अभ्यास जरूरी बा, ताकि आवे वाली पीढ़ी भी ई अनोखा उत्पाद के आनंद उठा सके।
  • नकल से सुरक्षा: दा शू चा के लोकप्रियता बढ़ला के साथ नकल के समस्या बेसी गंभीर हो गइल बा। प्रामाणिकता के बिबिध तरीका बिकसित कइल जा रहल बा, लेकिन सबसे नीमन उपाय – भरोसेमंद बिक्रेता से खरीदल।

निष्कर्ष में:

दा शू चा चाय के अनोखा श्रेणी ह, जे अपना में प्राचीन चाय के पेड़न के ताकत आउर बुद्धिमानी, प्रकृति के आदिम सुंदरता आउर युन्नान प्रांत के चाय उगावे के बहुते धनी परंपरा के समेटले बा। ई चाय उ लोग खातिर ह जे असलियत, स्वाद आउर सुगंध के गहिराई, शक्तिशाली परभाव के कदर करेला आउर प्राचीन चाय के जंगलन के दुनिया में मनोरंजक यात्रा पर निकले के तइयार बा। असली दा शू चा के स्वाद लेवे के मतलब ह इतिहास के छुअल, प्रकृति से जुड़ल आउर अतुलनीय चाय के अनुभव पावल। ई खाली पियल जाए वाला चीज से ढेर ह – ई त पूरा दर्शन ह, अपना के आउर बाहरी दुनिया के जाने के रस्ता ह।